
मुसाबनी, 6 जून 2026। पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड से शनिवार सुबह एक बेहद दुखद समाचार सामने आया। क्षेत्र के वरिष्ठ, कर्मठ और निर्भीक पत्रकार मृत्युंजय सिंह का करंट लगने से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और पत्रकारिता जगत में गहरा दुख व्याप्त हो गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह लगभग 8 बजे अपने आवास परिसर में किसी कार्य के दौरान वे अचानक बिजली के करंट की चपेट में आ गए। घटना इतनी गंभीर थी कि मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिजन, स्थानीय लोग, पत्रकार साथी एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उनके आवास पहुंचने लगे। बाद में प्रशासन को भी घटना की जानकारी दी गई।
मृत्युंजय सिंह लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे और अपनी निष्पक्ष, निर्भीक एवं जनहित से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए पूरे क्षेत्र में पहचान रखते थे। उन्होंने हमेशा आम लोगों की समस्याओं, सामाजिक सरोकारों और क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनकी खबरें न केवल प्रशासन का ध्यान आकर्षित करती थीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बनती थीं।

सहकर्मियों के अनुसार मृत्युंजय सिंह पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानते थे। उनकी लेखनी में सच्चाई, संवेदनशीलता और जनहित की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी। यही कारण था कि क्षेत्र के लोग उनकी खबरों पर विश्वास करते थे और उनकी रिपोर्टिंग का इंतजार करते थे।
अपने सरल, सौम्य और मिलनसार स्वभाव के कारण वे सभी वर्गों के लोगों के बीच लोकप्रिय थे। पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। उन्होंने हमेशा युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन किया और पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखने की प्रेरणा दी।
उनके निधन की खबर मिलते ही मुसाबनी, घाटशिला, जमशेदपुर समेत पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले में शोक का माहौल बन गया। विभिन्न पत्रकार संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।
शोक संदेश जारी करते हुए कई लोगों ने कहा कि मृत्युंजय सिंह जैसे समर्पित और ईमानदार पत्रकार का इस तरह असमय चले जाना समाज और मीडिया जगत दोनों के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
मृत्युंजय सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता, जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता और समाज के प्रति उनका योगदान हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा। पत्रकारिता जगत ने आज एक ऐसा साथी खो दिया है जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।















