जमशेदपुर: विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर Karim सिटी कॉलेज, जमशेदपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा एक लघु संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बढ़ती जनसंख्या, उसके सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं एनएसएस स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन के साथ हुई, जिसके बाद एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. शाहबाज अंसारी ने विश्व जनसंख्या दिवस की प्रासंगिकता और कार्यक्रम के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जनसंख्या वृद्धि केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। इसके समाधान के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
डॉ. शाहबाज अंसारी ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर डाला प्रकाश
एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. शाहबाज अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व जनसंख्या दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि बढ़ती जनसंख्या का सीधा प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण पर पड़ता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करें और परिवार नियोजन, स्वास्थ्य शिक्षा तथा जिम्मेदार नागरिकता के संदेश को गांवों और शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज़ ने युवाओं को किया प्रेरित
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज़ ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि जनसंख्या नियंत्रण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज स्वयं जागरूक नहीं होगा, तब तक किसी भी सरकारी योजना का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाएगा।
उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के कारण देश में रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आवास, पेयजल तथा प्राकृतिक संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह चुनौती और गंभीर रूप ले सकती है।
डॉ. रेयाज़ ने विद्यार्थियों को शिक्षित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश देते हुए कहा कि युवा पीढ़ी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे वैज्ञानिक सोच अपनाएं और समाज में जनसंख्या नियंत्रण एवं स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश को आगे बढ़ाएं।
रोहित शर्मा ने परिवार नियोजन और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर दिया जोर
कार्यक्रम के अन्य मुख्य वक्ता रोहित शर्मा ने विश्व जनसंख्या दिवस के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या केवल संख्या का विषय नहीं है, बल्कि यह विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।
उन्होंने परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, महिलाओं की शिक्षा और संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार जिम्मेदारी के साथ परिवार नियोजन अपनाए और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को प्राथमिकता दे, तो समाज का समग्र विकास संभव है।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाकर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।
विद्यार्थियों ने दिखाई उत्साहपूर्ण भागीदारी
संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों ने जनसंख्या वृद्धि से जुड़ी विभिन्न समस्याओं, उनके समाधान तथा सामाजिक जिम्मेदारियों पर अपने विचार भी साझा किए। कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को यह समझाया गया कि बढ़ती जनसंख्या का प्रभाव केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पर्यावरण, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों ने समाज में जागरूकता फैलाने तथा जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प भी लिया।
धन्यवाद ज्ञापन और सफल संचालन
कार्यक्रम के अंत में निलेश सोरेन ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी के सहयोग की सराहना की।
वहीं कार्यक्रम का कुशल संचालन ज़रीन अबेदी ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए सभी वक्ताओं का परिचय कराया और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
Karim सिटी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुई। कार्यक्रम के माध्यम से बढ़ती जनसंख्या के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीर चर्चा की गई तथा युवाओं को जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि जनसंख्या नियंत्रण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी और जागरूकता ही इस दिशा में सबसे प्रभावी कदम साबित होगी।
















