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“फेरोक्रोम स्लैग से बनेगी सड़कें, टाटा स्टील ने उठाया पर्यावरण अनुकूल कदम”

On: July 1, 2025 8:50 PM
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  • टाटा स्टील सड़क निर्माण और फेरोएलॉय उत्पादन में फेरोक्रोम स्लैग चिप्स का उपयोग कर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे रही
  • हरित पहल के तहत 3,500 टन स्लैग का पुनः उपयोग, नदी की रेत की मासिक खपत में 35% की कटौती

भुवनेश्वर: सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबल औद्योगिक अभ्यासों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, टाटा स्टील के फेरो एलॉयज़ एंड मिनरल्स डिवीजन (एफएएमडी) ने अपने गोपालपुर, गंजाम स्थित फेरो एलॉयज़ प्लांट (एफएपी) परिसर में 1.5 किलोमीटर लंबी आंतरिक सड़क का निर्माण किया है। इस सड़क निर्माण में फेरोक्रोम एलॉय के उत्पादन के दौरान उत्पन्न बाय- प्रोडक्ट फेरोक्रोम स्लैग चिप्स का उपयोग किया गया है।

यह नवाचारी पहल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सस्टेनेबल बनाने के साथ-साथ कंपनी के पर्यावरणीय प्रभाव को भी काफी हद तक कम करती है। इस निर्माण कार्य में लगभग 3,500 टन स्लैग एग्रीगेट्स (6 से 20 मिमी आकार के) का उपयोग किया गया है, जिससे प्राकृतिक पत्थर की आवश्यकता को पूरी तरह प्रतिस्थापित कर दिया गया और खनन गतिविधियों की आवश्यकता भी घटाई गई है।

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सड़क निर्माण के साथ-साथ, एफएएमडी ने गोपालपुर और अथागढ़ स्थित फेरो एलॉय प्लांट्स (FAP) में स्लैग बेड और स्लैग पैन ड्रेसिंग प्रक्रियाओं के लिए नदी की रेत के स्थान पर आंशिक रूप से फेरोक्रोम स्लैग फाइन्सका उपयोग शुरू किया है। इस पहल के परिणामस्वरूप, गोपालपुर FAP में नदी की रेत की मासिक खपत में 35% और कटक जिले के अथागढ़ FAP में 10% की कमी दर्ज की गई है।

THE NEWS FRAME

एफएएमडी के एग्जीक्यूटिव-इन-चार्ज पंकज सतीजा ने कहा,

“उद्योग जगत अपने कार्यप्रणालियों में सर्कुलरिटी को बढ़ावा देने के लिए लगातार नवाचार कर रहा है, ताकि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।”

“फेरोक्रोम स्लैग का पुन: उपयोग न केवल रेत की आवश्यकता के लिए नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव को कम करता है, बल्कि यह हमें बाय प्रोडक्ट्स के ऐसे नवाचारी उपयोग तलाशने के लिए प्रेरित करता है, जिन्हें पहले प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किया जाता था – जिससे भूमि क्षरण और वनस्पति की हानि होती थी। मैं अपनी टीम का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने इस समाधान को सफलतापूर्वक लागू किया।”

पारंपरिक रूप से फेरोएलॉय उत्पादन में नदी की रेत को सोडियम सिलिकेट जैसे बाइंडर्स के साथ मिलाकर कास्ट आयरन पैन के आधार के रूप में और कास्टिंग ऑपरेशन के दौरान पार्टिंग एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता रहा है, ताकि तरल धातु और स्लैग को सुरक्षित रूप से हैंडल किया जा सके। इन प्रक्रियाओं में हर महीने लगभग 1,000 मीट्रिक टन नदी की रेत की आवश्यकता होती थी। अब स्लैग फाइन्स के उपयोग से न केवल प्राकृतिक रेत पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि स्लैग निपटान से जुड़ी भूमि क्षरण की आशंका भी काफी हद तक कम हुई है।

यह सतत पहल टाटा स्टील की संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और परिचालन कुशलता के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सर्कुलर इकोनॉमी जैसे इन प्रयासों के माध्यम से कंपनी फेरोएलॉय क्षेत्र में जिम्मेदार औद्योगिक विकास और हरित विकल्पों की दिशा में नई राह बना रही है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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