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टाटा लीज नवीकरण में विस्थापितों और मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा हो : झारखंड मूलवासी अधिकार मंच

On: May 29, 2026 8:52 PM
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जमशेदपुर : झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मुलाकात कर टाटा लीज नवीकरण, विस्थापितों के अधिकार तथा खतियान से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा।

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प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को अवगत कराया कि जमशेदपुर में टाटा कंपनी की स्थापना के दौरान 18 मौजा के हजारों आदिवासी और मूलवासी परिवार विस्थापित हुए थे। मंच का आरोप है कि आज भी बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार पुनर्वास, रोजगार, विस्थापित प्रमाण-पत्र, भूमि वापसी तथा अन्य मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पुराने खतियानों को मान्यता देने की मांग

मंच की ओर से मांग की गई कि विस्थापितों और मूल रैयतों से जुड़े मामलों में वर्ष 1996 के सर्वे खतियान के बजाय 1908 और 1937 के खतियानों को आधार माना जाए। प्रतिनिधियों का कहना था कि पुराने खतियानों में आदिवासी और मूलवासी रैयतों के वास्तविक अधिकार दर्ज हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

टाटा लीज नवीकरण पर उठाए सवाल

मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि टाटा लीज नवीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर स्थानीय विस्थापितों और मूलवासियों की सहमति तथा अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए गंभीर और ठोस कदम उठाने चाहिए।

लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग उठाई कि खतियान और भूमि संबंधी जो आवेदन पहले प्रशासन को सौंपे गए हैं, उनकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। साथ ही विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए विशेष पहल करने की आवश्यकता बताई गई।

उपायुक्त ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

प्रतिनिधिमंडल की बातों को सुनने के बाद उपायुक्त ने संबंधित मुद्दों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत मांगों और तथ्यों का परीक्षण कर नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस दौरान मंच से जुड़े कई सामाजिक कार्यकर्ता, आंदोलनकारी और प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

प्रमुख मांगें

🔹 टाटा लीज नवीकरण में विस्थापितों और मूलवासियों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
🔹 1908 एवं 1937 के खतियानों को मान्यता दी जाए।
🔹 विस्थापित परिवारों को पुनर्वास, नौकरी और प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाए।
🔹 भूमि एवं खतियान संबंधी लंबित मामलों की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
🔹 प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए विशेष पहल की जाए।

झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने स्पष्ट किया है कि विस्थापितों और मूल रैयतों के अधिकारों की रक्षा के लिए उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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