खैरथल-तिजारा: वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान में भागीदारी बढ़ाने पर जोर, प्रभारी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने जिला अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक।
राज्य के कृषि, उद्यानिकी, आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री और अलवर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने शनिवार को खैरथल-तिजारा में जिले के आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान में जन सहभागिता को सर्वोपरि प्राथमिकता दी जाए और सभी संबंधित विभागीय अधिकारी फील्ड में जाकर जमीनी कार्यों का अवलोकन करें।
बैठक के दौरान मंत्री डॉ. मीना ने अभियान की कार्ययोजना, अब तक की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को लेकर प्रस्तुति देखी। जिला कलेक्टर किशोर कुमार ने इस संबंध में एक विस्तृत पीपीटी प्रस्तुत कर मंत्री को अवगत कराया।
💧 जल संरक्षण की दिशा में विशेष निर्देश
डॉ. मीना ने बैठक में स्पष्ट कहा—
“पारंपरिक जल स्रोतों और पद्धतियों का पुनरुद्धार जरूरी है। भूजल स्तर बनाए रखने के लिए तालाब, कुएं और जोहड़ जैसे संसाधनों का संरक्षण करना समय की मांग है। अधिकारी इस जिम्मेदारी को केवल कागजों पर नहीं, धरातल पर उतारें।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के जल-पर्यावरण संरक्षण और प्रदेश कल्याण के संकल्प को साकार किया जा सकता है।

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📜 पम्फलेट विमोचन व संकल्प
बैठक में वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान से संबंधित पम्फलेट का विमोचन किया गया और सभी उपस्थित जनों ने जल संरक्षण का संकल्प भी लिया।
🌳 दुर्लभ नाथ मंदिर में वृक्षारोपण और श्रमदान
बैठक के पश्चात मंत्री डॉ. मीना कोटकासिम स्थित दुर्लभ नाथ मंदिर पहुँचे, जहां उन्होंने “हरियालो राजस्थान” अभियान के तहत वृक्षारोपण और श्रमदान किया। उन्होंने जोहड़ की सफाई में श्रमदान करते हुए पारंपरिक औजारों की सहायता से मिट्टी निकालकर पाल पर डाली ताकि जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि हो सके।
इस दौरान उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की और उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा—
“जल ही जीवन है, और आज यदि हमने इसके संरक्षण के लिए कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थिति संकटपूर्ण हो जाएगी।”
🌍 प्रकृति संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी
डॉ. मीना ने लोगों से आह्वान किया कि—
- हर नागरिक कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए।
- उसका पालन-पोषण करें।
- पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि वृक्षारोपण और जल संरक्षण आपस में जुड़ी हुई क्रियाएं हैं और इनसे वातावरण संतुलन, वर्षा वृद्धि और जल संकट नियंत्रण में मदद मिलती है।
👥 उपस्थित जनप्रतिनिधि और अधिकारी
इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव, जिला कलेक्टर किशोर कुमार, पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सालुखे गौरव रविंद्र, एडीएम शिवपाल जाट, एएसपी रतनलाल भार्गव, डीएफओ राजेंद्र हुड्डा सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
🟢 विशेष बिंदु:
- वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान को लेकर पब्लिक अवेयरनेस और भागीदारी पर फोकस।
- अधिकारियों को जमीनी क्रियान्वयन पर विशेष जोर देने का निर्देश।
- पर्यावरण संरक्षण के तहत वृक्षारोपण और जल स्रोतों की सफाई को प्राथमिकता।
- जन सहयोग से जल संकट का समाधान संभव।






















