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Palasbani पंचायत में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर पंचायत समिति सदस्य बने भारत राम लोहरा के विरुद्ध जांच एवं कार्रवाई की मांग

On: April 23, 2026 5:47 PM
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झारखंड: जमशेदपुर में एक ऐसे मामले की, जो पंचायती राज व्यवस्था और आरक्षण प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। Palasbani पंचायत के पंचायत समिति सदस्य भारत राम लोहरा पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने और जीतने का गंभीर आरोप लगा है। ग्राम सभा छोटा बांकी और बिरसा सेना ने मिलकर उपायुक्त को ज्ञापन देकर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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यह मामला 17 अप्रैल 2026 को सामने आया, जब ग्रामीणों ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की। अनुसूचित जनजाति (ST) की आरक्षित सीट नंबर 67 से 2022 के पंचायत चुनाव में चुने गए लोहरा पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज दिखाकर यह पद हासिल किया। अगर यह साबित हो गया, तो न सिर्फ उनका जाति प्रमाण-पत्र रद्द होगा, बल्कि पद भी चला जाएगा। आइए, इस पूरे प्रकरण को विस्तार से समझते हैं।

फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का पूरा मामला

Palasbani पंचायत पूर्वी सिंहभूम जिले में आती है, जहां 2022 के पंचायत चुनाव में भारत राम लोहरा ने ST आरक्षित सीट से जीत हासिल की। लेकिन अब ग्रामीणों का कहना है कि उनका जाति प्रमाण-पत्र नंबर JHCST/2022/194655, जो 4 मई 2022 को जारी हुआ, पूरी तरह फर्जी है। झारखंड सरकार के नियमों के मुताबिक, ST का लाभ लेने के लिए 6 सितंबर 1950 से पहले का स्थायी निवास या 1964 का खतियान जरूरी होता है। लोहरा के परिवार का इस क्षेत्र से कोई पुराना संबंध नहीं है – वे मूल खतियानधारी नहीं हैं।

Palasbani ग्रामीणों के अनुसार, लोहरा मूल रूप से कुमार (EBC-1) जाति से ताल्लुक रखते हैं, जो ST में नहीं आती। उनके दादा बुद्धदेव लोहरा उर्फ बुधू कमार पश्चिम सिंहभूम के पिल्का गांव के निवासी थे, और उनका खतियान भी ‘कमार’ जाति का दर्ज है। सिर्फ सरकारी जमीन की बंदोबस्ती के आधार पर अंचल अधिकारी ने प्रमाण-पत्र जारी कर दिया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। ऐसे में पूरा सिस्टम ही सवालों के घेरे में आ गया है।

इसके अलावा, जाति प्रमाण-पत्र जारी करने में राजस्व उप-निरीक्षक और अंचल निरीक्षक की लापरवाही भी सामने आई है। गलत जांच रिपोर्ट के चलते यह फर्जीवाड़ा पनप गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करने की मांग की है।

अन्य गंभीर आरोप जो चौंका देंगे

फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के अलावा लोहरा पर कई और संगीन आरोप हैं। सबसे पहले, उनके खिलाफ पूर्वी सिंहभूम कोर्ट में पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ग्रामीण बताते हैं कि वे क्षेत्र में अवैध शराब का निर्माण और सप्लाई करते हैं, जो गांव की शांति को भंग कर रहा है।

दूसरा बड़ा आरोप सरकारी जमीनों की अवैध बंदोबस्ती का है। लोहरा ने अपने माता-पिता के नाम पर कई सरकारी प्लॉट्स पर कब्जा कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब गलत दस्तावेजों के दम पर हुआ। अगर जांच हुई, तो इन बंदोबस्तियों को रद्द करने की मांग तेज हो सकती है। ऐसे मामले न सिर्फ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि गरीब ग्रामीणों के हक छीनते हैं।

ये आरोप कोई नया नहीं हैं। झारखंड में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के कई केस सामने आ चुके हैं। मसलन, धनबाद में राजगंज थाना प्रभारी का प्रमाण-पत्र रद्द हो गया, और गोपीनाथडीह व जमुआ के मुखियाओं का चुनाव ही रद्द कर दिया गया। ऐसे उदाहरण बताते हैं कि अगर शिकायत सही पाई गई, तो कार्रवाई तय है।

Palasbani ग्रामीणों की एकजुट मांग और ज्ञापन

17 अप्रैल 2026 को छोटा बांकी ग्राम सभा और बिरसा सेना ने संयुक्त रूप से उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। मांगें साफ हैं:

  • भारत राम लोहरा का जाति प्रमाण-पत्र तुरंत रद्द हो।
  • उन्हें पंचायत समिति सदस्य पद से हटा दिया जाए।
  • उनके परिवार के नाम पर सभी अवैध बंदोबस्तियां निरस्त हों।
  • संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो।

ज्ञापन सौंपने के मौके पर ग्राम प्रधान विद्याधर सिंह, मुखिया प्रतिनिधि सुफल सिंह, दिनकर कच्छप, हरमोहन सिंह, पूजा कार्मकार, मीना लोहार, आशा लोहार, संकुतला करमाकार, पूर्णिमा कार्मकार, दुखू मार्डी, पूर्व मुखिया जगदीश सिंह, जय सिंह भूमिज, बसंती सिंह, बुद्धेश्वरी सिंह, रजनी सिंह, फुलमनी सिंह, बुधनी कर्मकार, कमला सिंह, अजय सिंह, ललटू सिंह, मंगल टुडू, सिमरन किस्कू, दिकू मुर्मू, उप-मुखिया जोगेंद्र भगत समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे। यह एकता दर्शाती है कि मामला कितना गंभीर है।

झारखंड Palasbani में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र की बढ़ती समस्या

झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में ST आरक्षण एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। लेकिन फर्जी प्रमाण-पत्र इसकी गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही कई मामलों में सख्ती बरत चुका है। धनबाद के दो मुखियाओं का चुनाव रद्द होना इसका जीता-जागता उदाहरण है। हाईकोर्ट भी ऐसे मामलों में जाति छानबीन समिति को निर्देश देता रहा है।

लोहरा मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। अगर जांच में फर्जीवाड़ा साबित हुआ, तो न सिर्फ पद जाएगा, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होगी। ग्रामीणों की मांग जायज लगती है, क्योंकि बिना जांच के किसी को निर्दोष नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन लोहरा की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

प्रशासन क्या कदम उठा सकता है?

प्रशासन के पास कई विकल्प हैं। सबसे पहले, जाति प्रमाण-पत्र की सत्यता की जांच के लिए समिति गठित हो सकती है। झारखंड सरकार के ST/SC कल्याण विभाग ने पहले भी ऐसे प्रमाण-पत्र रद्द किए हैं। उसके बाद, पंचायती राज एक्ट के तहत सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

अवैध बंदोबस्ती पर राजस्व विभाग कार्रवाई करेगा। अवैध शराब और आपराधिक मामलों की अलग जांच होगी। कुल मिलाकर, यह केस पंचायती राज में पारदर्शिता लाने का मौका है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उपायुक्त निष्पक्ष जांच करवाएंगे।

Palasbani पंचायत में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर पंचायत समिति सदस्य बने भारत राम लोहरा के विरुद्ध जांच एवं कार्रवाई की मांग एक बड़ा मुद्दा बन गया है। यह केस न सिर्फ स्थानीय ग्रामीणों की एकजुटता दिखाता है, बल्कि पूरे सिस्टम में सुधार की जरूरत भी बताता है। अगर समय पर निष्पक्ष जांच हुई, तो आरक्षण का असली उद्देश्य मजबूत होगा। हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा।

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