
गोविंदपुर: जमशेदपुर के छोटा गोविंदपुर L.I.G. कॉलोनी के सैकड़ों परिवारों को परेशान कर रही है। छोटागोविंदपुर L.I.G फ्लैट निवासियों ने 50 साल बाद भी स्वामित्व का हक न मिलने पर आदित्यपुर हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। जम्मी भास्कर के नेतृत्व में कार्यपालक अभियंता अरशद हुसैन को यह ज्ञापन दिया गया, जिसमें नियमितीकरण और आवंटन की मांग उठाई गई। 1975 में बिहार आवास बोर्ड द्वारा बने ये फ्लैट आज भी बिना रजिस्ट्रेशन के हैं। इस ब्लॉग में हम पूरी घटना, मांगों और संभावित समाधान पर विस्तार से चर्चा करेंगे। अगर आप भी हाउसिंग बोर्ड की योजनाओं से जुड़े हैं, तो अंत तक पढ़ते रहिए!

छोटा गोविंदपुर L.I.G. कॉलोनी का इतिहास
छोटागोविंदपुर L.I.G फ्लैट निवासियों की समस्या पुरानी है। 1975 में तत्कालीन बिहार आवास बोर्ड ने लो इनकम ग्रुप (L.I.G.) के लिए ये फ्लैट बनाए थे। जमशेदपुर के इस इलाके में सैकड़ों परिवार पिछले 50 साल से यहां रह रहे हैं। लेकिन 90 प्रतिशत फ्लैटों का न तो आवंटन हुआ, न रजिस्ट्रेशन और न ही एग्रीमेंट। कई जगह आवंटन तो हो गया, लेकिन कागजी कार्रवाई लंबित है।
ये परिवार मासिक किराया तो भरते हैं, लेकिन मकान मालिक नहीं बन पा रहे। बरसात में लीकेज, रखरखाव की कमी जैसी समस्याएं आम हैं। झारखंड बनने के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी। निवासी कहते हैं कि वे टैक्स, बिजली-पानी के बिल भरते हैं, फिर भी स्वामित्व नहीं मिला। यह कॉलोनी आदित्यपुर के पास है, जहां हाउसिंग बोर्ड की जिम्मेदारी है।
ज्ञापन में क्या मांगें उठाई गईं?
छोटागोविंदपुर L.I.G फ्लैट निवासियों ने स्पष्ट मांगें रखीं। जम्मी भास्कर के नेतृत्व में सैकड़ों लोग आदित्यपुर हाउसिंग बोर्ड पहुंचे। मुख्य मांगें:
- रहा हुआ मकान ही आवंटन: जिस फ्लैट में कोई रह रहा है, वही उसे मिले।
- झारखंड सरकार की 17 मार्च 2017 अधिसूचना लागू करें: 10 साल से ज्यादा रहने वालों को शर्तों पर नियमितीकरण।
- रियायती दर और आसान किस्तें: गरीब परिवारों के लिए किफायती भुगतान।
- लीज अवधि पुनर्निर्धारण: पुरानी लीज को नया रूप दें।
- पारदर्शी नीति और शिविर: कॉलोनी में विशेष कैंप लगाकर प्रक्रिया पूरी करें।
ये मांगें न्यायसंगत हैं। निवासी कहते हैं कि बिना कागज के लोन नहीं ले पाते, मकान बेच नहीं सकते। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्होंने जीवन भर मेहनत की, लेकिन घर का मालिकाना हक नहीं।
L.I.G. कार्यपालक अभियंता का आश्वासन
कार्यपालक अभियंता अरशद हुसैन ने ज्ञापन लिया और सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सभी मांगें रांची मुख्यालय भेजी जाएंगी। लिखित आवेदन लेंगे और शीघ्र कॉलोनी में शिविर लगाकर आवंटन प्रक्रिया शुरू करेंगे। यह आश्वासन निवासियों के लिए राहत भरा है।
अब गेंद सरकार के पाले में है। झारखंड हाउसिंग बोर्ड को तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। पिछले मामलों में लॉटरी सिस्टम अपनाया गया, लेकिन यहां पुराने निवासियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उपस्थित प्रमुख लोग
इस धरने में रमन सिंह, अवधेश सिंह, शशि भूषण सिंह, बबलू सिंह, राजू सिंह, मंजीत कुमार, पवन वर्मा जैसे कई लोग थे। उदय शंकर, सुधा श्रीनिवास राव, भोला, नकुल कुमार सिंह सहित सैकड़ों उपस्थित रहे। जम्मी भास्कर ने कहा कि एकजुटता से अधिकार दिलाएंगे।
हाउसिंग बोर्ड की पुरानी समस्याएं और समाधान
छोटागोविंदपुर L.I.G फ्लैट निवासियों की समस्या झारखंड में आम है। गोविंदपुर हाउसिंग कॉलोनी में भी सीवरेज, ड्रेनेज की शिकायतें हैं। आवास बोर्ड अतिक्रमण हटाने में लगा रहता है, लेकिन पुराने निवासियों को राहत नहीं। 2017 अधिसूचना का लाभ कई जगह मिला, लेकिन यहां देरी हो रही।
सरकार को क्या करना चाहिए:
- डिजिटल पोर्टल: ऑनलाइन आवेदन और ट्रैकिंग।
- विशेष टास्क फोर्स: पुरानी कॉलोनियों के लिए।
- कानूनी सहायता: मुफ्त वकील गरीबों के लिए।
- अपडेटेड नीति: लीज को फ्रीहोल्ड में बदलें।
ऐसे कदम से हजारों परिवार खुशहाल होंगे। केंद्र सरकार की PMAY योजना से जोड़कर सब्सिडी भी दे सकते हैं।
निवासियों की आपबीती एक उदाहरण
कल्पना कीजिए, रमन सिंह 1975 से एक ही फ्लैट में हैं। बच्चे बड़े हो गए, लेकिन कागज नहीं। लोन लेकर बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, बैंक मना कर देता है। ऐसी कहानियां सैकड़ों हैं। महिलाएं जैसे सुधा श्रीनिवास राव कहती हैं कि बिना मालिकाना हक के सुरक्षा की कमी लगती है। ये परिवार मजदूर, क्लर्क हैं – मध्यम वर्ग।

सरकार की 2017 अधिसूचना विस्तार से
17 मार्च 2017 की अधिसूचना महत्वपूर्ण है। इसमें कहा गया कि 10+ साल रहने वाले, किराया भरने वाले और कोई विवाद न हो तो नियमितीकरण। निर्धारित फीस पर रजिस्ट्री। लेकिन अमल में देरी। छोटागोविंदपुर L.I.G फ्लैट निवासियों को इसका लाभ मिलना चाहिए। रांची से आदेश जल्द आए।
L.I.G. भविष्य की उम्मीदें और सलाह
छोटागोविंदपुर L.I.G फ्लैट निवासियों को एकजुट रहना चाहिए। सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाएं, विधायक-सांसद से मिलें। RTI डालकर स्टेटस चेक करें। बोर्ड को जवाबदेह बनाएं। सरकार अगर शिविर लगाती है, तो सभी दस्तावेज तैयार रखें – आधार, किराया रसीदें।
यह संघर्ष सिर्फ जमशेदपुर का नहीं, पूरे झारखंड का है। सफलता मिलेगी तो अन्य कॉलोनियों को प्रेरणा मिलेगी।
छोटागोविंदपुर L.I.G फ्लैट निवासियों का संघर्ष प्रेरणादायक है। 50 साल की मेहनत का फल मिलना चाहिए। झारखंड हाउसिंग बोर्ड और सरकार से अपील है – जल्द कार्रवाई करें। रियायती दर, आसान किस्तें और पारदर्शिता से ये परिवार मकान मालिक बनें। एकजुट रहें, अधिकार पाएं। बेहतर कल के लिए लड़ाई जारी रखें!








