
📍 जमशेदपुर | विशेष रिपोर्ट : पूर्व जिला पार्षद करुणामय मंडल (पोटका, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड) ने 23 जून 2025 की सुबह 9:46 बजे एक प्रभावशाली और भावपूर्ण शिव भक्ति कविता की प्रस्तुति दी, जिसमें ईश्वर के प्रति गहन श्रद्धा, समाज की पीड़ा, और मानवता के लिए प्रार्थना का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है।

✒️ कविता – “ॐ नमः शिवाय”
“संसार जिसके स्मरण में
हे शक्ति के स्वामी।
भोले शंकर सर्व शुभंकर
सर्वेश्वर तुझे नमामि।।तू ही तो चिर सत्य है
तू ही सर्वत्र शिव।
तू ही पवित्र सुंदर है
तू ही चराचर जीव।।संसार के संकट हारी
तू ही त्रिपुरारी है।
भक्ति भरो संशय हारो
समय बहत भारी है।।स्वार्थ की सागर मंथन
फिर करो नीलकंठ।
हर हरो उसके हलाहल
हरो संसार संकट।।स्नेह प्रेम पवित्रता की
भर दो सब में अमृत।
हर हृदय में भक्ति भाव की
गूंजे शिव संगीत।।”🙏🌹 “ॐ नमः शिवाय” 🌹🙏
📚 कविता का भावार्थ और शब्दार्थ:
| पंक्ति | भावार्थ |
|---|---|
| संसार जिसके स्मरण में… | शिव को स्मरण करने मात्र से संसार को शुभ और कल्याण मिलता है। |
| तू ही चिर सत्य है… | शिव परम सत्य, शाश्वत और सर्वत्र व्याप्त हैं। |
| संसार के संकट हारी… | त्रिपुरारी शिव संकटों के नाशक हैं, उन पर विश्वास से भय मिटता है। |
| स्वार्थ की सागर मंथन… | आज का युग स्वार्थ और विष से भरा है, शिव जैसे नीलकंठ ही इस विष को रोक सकते हैं। |
| स्नेह प्रेम पवित्रता की… | समाज में प्रेम, पवित्रता और भक्ति का पुनः संचार आवश्यक है। |
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🧠 लेखक की मनोदशा एवं दृष्टिकोण:
यह रचना एक साधक, समाजसेवी और चिन्तक की चेतना का अद्भुत संगम है। करुणामय मंडल इस कविता के माध्यम से न केवल शिव के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं, बल्कि समाज की पीड़ा, स्वार्थ, विषमता और विषैले वातावरण से मुक्ति की कामना भी करते हैं।
वर्तमान समय को वे “समय बहत भारी है” कहकर चिन्हित करते हैं, जो दर्शाता है कि कवि समाज के पतनशील मूल्यों, आत्मकेंद्रित प्रवृत्तियों और नकारात्मक शक्तियों से व्यथित हैं। वे शिव को केवल पूज्य नहीं, बल्कि समाधान का स्रोत मानते हैं।
करुणामय मंडल इस कविता के माध्यम से एक भक्त, चिंतक और समाजसेवी की भूमिका निभाते हैं। कविता में उन्होंने आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक परिस्थितियों को जोड़कर यह संदेश दिया है कि:
- जब संसार विषाक्त हो जाए, तब नीलकंठ शिव ही समाधान हैं।
- जब समाज में संशय, भय और स्वार्थ हो, तब भक्ति और प्रेम ही सबसे बड़ा उपाय है।
- शिव की आराधना केवल आध्यात्मिक नहीं, सामाजिक शुद्धिकरण का भी माध्यम है।
🗣️ समाज के लिए संदेश:
यह कविता केवल ईश्वर की आराधना नहीं, बल्कि आधुनिक युग के संकटों से उबरने की प्रार्थना है। करुणामय मंडल का यह रचनात्मक प्रयास हमें यह सोचने पर विवश करता है कि क्या हमारे भीतर भक्ति का भाव, सेवा की भावना और आत्मशुद्धि की प्रेरणा जीवित है?
करुणामय मंडल की यह रचना एक सामयिक भक्ति काव्य है, जो धार्मिक भावना के साथ-साथ समाज में प्रेम, करुणा और सकारात्मक परिवर्तन की आकांक्षा भी जगाती है।
यह केवल कविता नहीं, एक पुकार है — “ॐ नमः शिवाय” के साथ ईश्वर से, मानवता से और स्वयं से।









































