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निर्वंश आदिवासी भूमि पर गैर-आदिवासी कब्जे की कोशिश! रामहरि गोप ने किया विरोध, बंदोबस्ती की उठाई मांग

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On: June 24, 2025 10:34 PM
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चाईबासा (जय कुमार): पश्चिमी सिंहभूम मंझारी अंचल अंतर्गत मौजा-बिदरी, खाता संख्या 56 एवं 57 की आदिवासी भूमि को लेकर विवाद गरमा गया है। यह भूमि स्व. कांडे हो (पिता- स्व. धूलिया हो), अनुसूचित जनजाति के नाम दर्ज थी, जो अब निर्वंश घोषित हो चुकी है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अब इस जमीन को कुछ प्रभावशाली तत्वों द्वारा गैर-आदिवासी व्यक्ति को अवैध रूप से हस्तांतरित कराने की साजिश रची जा रही है।

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एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि गोप ने उपायुक्त को दिए आवेदन में स्पष्ट लिखा है कि इस जमीन को विद्यालय संचालन के नाम पर एक गैर-आदिवासी को देने का प्रयास किया जा रहा है, जो छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट), 1908 और संविधान की पाँचवी अनुसूची का खुला उल्लंघन है।

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क्या कहते हैं कानून:

  • सीएनटी अधिनियम की धारा 23 के अनुसार, निर्वंश घोषित आदिवासी भूमि को सरकार अपने अधीन लेकर भूमिहीन आदिवासियों को दे सकती है।
  • अनुच्छेद 244(1) राज्य को आदिवासी क्षेत्रों में भूमि की रक्षा की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपता है।
  • राज्य सरकार के निर्देश भी इसी ओर संकेत करते हैं कि भूमिहीन आदिवासी परिवारों को प्राथमिकता दी जाए।

एंटी करप्शन ऑफ इंडिया द्वारा चार सूत्रीय मांग:-

1. भूमि का अविलंब अधिग्रहण कर स्थानीय भूमिहीन आदिवासियों में बंदोबस्ती की जाए।

2. अवैध कब्जे या लेन-देन की जांच की जाए।

3. यदि गैर-आदिवासी के नाम पर हस्तांतरण हुआ हो तो कार्रवाई हो।

4. वैकल्पिक रूप से इस भूमि को उकुमडकम उच्च विद्यालय को बंदोबस्ती किया जाए।

शैक्षणिक उपयोग को मिला समर्थन

ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि यदि सामाजिक बंदोबस्ती तुरंत संभव न हो, तो भूमि को स्थानीय विद्यालय को दी जाए, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों को लाभ मिलेगा। मौक पर बनमली तामसोय, मंजीत बोयपाई आदि मौजूद थे।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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