मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

भुवनेश्वर में “आयुर्वेद से यकृत-पित्त स्वास्थ्य” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज़

On: October 24, 2025 8:38 PM
Follow Us:
आयुर्वेद उपचार के माध्यम से यकृत और पित्त स्वास्थ्य

📍 भुवनेश्वर, 25 अक्टूबर 2025: आयुष मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से भुवनेश्वर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “आयुर्वेद से यकृत-पित्त स्वास्थ्य: समकालीन विज्ञान के साथ पारंपरिक ज्ञान का जुड़ाव” की शुरुआत आज हुई। यह संगोष्ठी केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) और केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), भुवनेश्वर द्वारा आयोजित की जा रही है।

“यकृत सुरक्षा, जीवित रक्षा” थीम पर होगा मंथन

---Advertisement---
Netaji Advertisement

संगोष्ठी का मुख्य विषय “यकृत सुरक्षा, जीवित रक्षा” (Protect the Liver, Preserve Life) रखा गया है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद और आधुनिक जैव चिकित्सा के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान को प्रोत्साहित करते हुए यकृत (लिवर) एवं पित्त संबंधी बीमारियों के लिए एकीकृत समाधान ढूंढना है।

सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. रवि नारायण आचार्य ने कहा —

“आयुर्वेद यकृत-पित्त स्वास्थ्य के लिए एक समग्र और निवारक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वैज्ञानिक प्रमाणन के ज़रिए हम आयुर्वेदिक सूत्रों को आधुनिक चिकित्सा के अनुरूप सुदृढ़ बना रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर प्रमाण-आधारित परंपरागत चिकित्सा को बढ़ावा मिल सके।”

🩺 ICMR की दृष्टि — एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल की दिशा में

आईसीएमआर की अपर महानिदेशक डॉ. संघमित्रा पति ने कहा कि यकृत-पित्त विकारों की जटिलता से निपटने के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण जरूरी है।

“आयुर्वेद और आधुनिक जैव-चिकित्सा का सहयोग रोग की समझ, सुरक्षित उपचार और रोगी देखभाल को नई दिशा देगा,” उन्होंने कहा।

THE NEWS FRAME

🔬 शोध और प्रस्तुतियों से सजेगा दो दिवसीय सम्मेलन

संगोष्ठी में 58 वैज्ञानिक प्रस्तुतियाँ होंगी — जिनमें 22 मौखिक और 36 पोस्टर प्रस्तुति शामिल हैं। पहले दिन आयुर्वेदिक आहार, दिनचर्या, पंचकर्म और डिटॉक्सिफिकेशन जैसे निवारक तरीकों पर चर्चा होगी। दूसरे दिन वैज्ञानिक एकीकरण और आयुर्वेदिक औषधियों की प्रभावकारिता, सुरक्षा और तंत्र पर शोध निष्कर्ष साझा किए जाएंगे।

सत्रों में NAFLD, हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा, “यकृत-पित्त विकारों में एथनोमेडिसिन” पर विशेष सत्र रखा गया है जिसमें ओडिशा के 20 आदिवासी चिकित्सक अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ साझा करेंगे।

💊 आयुर्वेदिक औषधियों पर साक्ष्य-आधारित अध्ययन

  • आयुष मंत्रालय ने हाल ही में पिक्रोरिज़ा कुरोआ (कुटकी) और आयुष-पीटीके योगों पर प्री-क्लिनिकल अध्ययनों में यकृत-सुरक्षात्मक क्षमता के प्रमाण पाए हैं।
  • इसके अलावा आरोग्यवर्धिनी वटी और पिप्पल्यासव पर हुए बहुकेंद्रीय नैदानिक परीक्षणों ने भी MAFLD के प्रबंधन में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।
  • वर्तमान में तपेदिक रोगियों में ATT चिकित्सा से होने वाले लिवर डैमेज पर आयुष-पीटीके के प्रभाव का डबल-ब्लाइंड नियंत्रित अध्ययन जारी है।

विशेषज्ञों की मौजूदगी से बढ़ी वैज्ञानिक गंभीरता

संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें —

  • प्रो. (डॉ.) आशुतोष विश्वास, कार्यकारी निदेशक, एम्स भुवनेश्वर
  • प्रो. सुब्रत कुमार आचार्य, प्रो-चांसलर, KIMS भुवनेश्वर एवं कार्यकारी निदेशक, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, नई दिल्ली
  • डॉ. शारदा ओटा, प्रभारी सहायक निदेशक, सीएआरआई भुवनेश्वर
    साथ ही प्रो. मानस रंजन साहू, डॉ. एन. श्रीकांत, डॉ. अशोक बीके, डॉ. राजेश कुमावत जैसे जाने-माने वैज्ञानिक और शिक्षाविद भी चर्चा में भाग ले रहे हैं।

आयुर्वेद और विज्ञान का संगम

यह संगोष्ठी आयुष मंत्रालय के उस विजन को साकार कर रही है, जिसमें परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़कर स्वास्थ्य सेवा को अधिक निवारक, सुलभ और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय बनाया जा सके। इस आयोजन से उम्मीद है कि भारत वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगा।

---Advertisement---
Netaji Advertisement
---Advertisement---
Netaji Advertisement

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

और पढ़ें

आयुष Treatment का वरदान समन्वित उपचार से गंभीर रोगों से मिली राहत पश्चिमी सिंहभूम में आयुर्वेद और होम्योपैथी ने बदली मरीजों की जिंदगी

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के एकीकरण की दिशा में बड़ा कदम: केंद्र सरकार की बहुआयामी आयुष पहलें, 450 से अधिक तंबाकू निषेध केंद्र स्थापित

विश्व Breastfeeding सप्ताह 2026 सतत जीवन की मजबूत शुरुआत के लिए स्तनपान को बढ़ावा देने का संदेश टाटा मेन हॉस्पिटल ने शुरू किया जागरूकता अभियान

टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में मोटापा उपचार के लिए समर्पित ‘ओबेसिटी क्लिनिक’ की शुरुआत

हिंद आईटीआई में MY Bharat जागरूकता एवं पंजीकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन

Sarcoma दुर्लभ कैंसर जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है लेकिन समय पर पहचान से इलाज संभव

Leave a Comment