
जमशेदपुर : खनिज संपदा किसी भी राज्य की आर्थिक रीढ़ होती है। लेकिन जब यह संपदा अवैध रूप से दोहन का शिकार हो जाए, तो न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि सरकार को राजस्व की भी भारी क्षति होती है। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में खनिजों के अवैध खनन, भंडारण और परिवहन की समस्या गंभीर बनती जा रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए जमशेदपुर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए खनन टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की, जिसमें अनेक ठोस फैसले लिए गए।

जमशेदपुर समाहरणालय सभागार में बुधवार को जिला खनन टास्क फोर्स की अहम बैठक हुई। 18 जून 2025 को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय, सिटी एसपी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर, दोनों एसडीएम, और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में रैयती एवं सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध बालू भंडारण, खनिजों के अवैध परिवहन, ओवरलोडिंग और फर्जी चालानों पर कड़ा संदेश दिया गया।
अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी वर्चुअली बैठक से जुड़े।
प्रशासन की सख्ती
बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि अब कार्रवाई सिर्फ संख्यात्मक नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और असरदार होनी चाहिए।
- यदि रैयती जमीन पर अवैध भंडारण मिलता है, तो संबंधित रैयतदार पर एफआईआर होगी।
- सरकारी जमीन पर भंडारण मिलने की स्थिति में अंचलाधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
- सभी विभागों को मिलकर संयुक्त रूप से त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
अब तक की कार्रवाई और आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक
- 57 अवैध खनन मामलों में
- 14 एफआईआर दर्ज,
- 43 वाहन जप्त,
- और 8 लाख रुपये से अधिक जुर्माना वसूला गया है।
पिछले एक महीने में ही 8 वाहन जब्त किए गए हैं। यह आंकड़े प्रशासन की सक्रियता का संकेत देते हैं।
ईंट भट्ठों, क्रशर और श्रमिक सुरक्षा पर भी नजर
प्रशासन ने अवैध ईंट भट्ठों और क्रशर यूनिट्स पर भी सघन निगरानी और जांच का निर्देश दिया।
- नाबालिग श्रमिकों के प्रयोग पर रोक
- बंद पड़ी खदानों में अवैध उत्खनन की संभावनाओं पर सतत निगरानी
- पर्यावरणीय स्वीकृति, लाइसेंस और श्रम कानूनों के अनुपालन की सख्त जांच
यह निर्णय यह दर्शाता है कि प्रशासन सिर्फ खनिज ही नहीं, मानवाधिकार और पर्यावरण सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रहा है।
‘जीरो टॉलरेंस नीति’ की घोषणा
उपायुक्त ने घोषणा की कि अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
- हर औद्योगिक इकाई की नियमित ऑडिट की जाएगी।
- खनन टीमों को क्षेत्रीय भ्रमण और समय-समय पर निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
खनिजों की लूट पर लगाम लगाने की यह रणनीति झारखंड के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल उदाहरण बन सकती है। खनन टास्क फोर्स की यह बैठक केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि नीतिगत और संवेदनशील निर्णयों का दस्तावेज साबित हुई है।
यदि प्रशासन इसी संकल्प और समन्वय के साथ कार्य करता रहा, तो आने वाले समय में पूर्वी सिंहभूम न केवल अवैध खनन से मुक्त होगा, बल्कि खनिज संसाधनों के पारदर्शी उपयोग में भी राज्य का अग्रणी जिला बन सकता है।
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📌 बैठक के मुख्य बिंदु और निर्देश:
- अवैध खनन, भंडारण और परिवहन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
- उपायुक्त ने कहा – “केवल दिखावटी नहीं, असरदार और ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।”
- रैयती जमीन पर बालू का भंडारण मिलने पर एफआईआर होगी, और अगर सरकारी जमीन पर भंडारण हुआ तो सीओ की जिम्मेदारी तय होगी।
- सभी विभाग संयुक्त रूप से मिलकर कार्रवाई करें, सूचना तंत्र को और मज़बूत बनाएं।
अब तक की कार्रवाई:
- 2025-26 में 57 मामलों में 14 एफआईआर दर्ज, 43 वाहन जब्त
- 8 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया
- पिछले एक माह में 8 वाहन जब्त किए गए
उपायुक्त ने कहा कि खनन टास्क फोर्स को और तेजी से काम करना होगा, खासकर ओवरलोड वाहनों और फर्जी खनिज चालानों पर।
ईंट भट्ठे और क्रशर पर भी निगरानी:
- अवैध ईंट भट्ठों और क्रशर संचालकों पर जांच और कार्रवाई के निर्देश
- बंद पड़ी खदानों में अवैध उत्खनन रोकने के लिए निरंतर निगरानी
- नाबालिग श्रमिकों की मौजूदगी पर सख्ती – कोई बच्चा मजदूरी करता न दिखे
- पर्यावरण और श्रमिक सुरक्षा का विशेष ध्यान – सभी औद्योगिक इकाइयों का नियमित ऑडिट और जांच होगी
✅ उपायुक्त के निर्देशों की मुख्य बातें:
- अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू हो
- लाइसेंस, पर्यावरणीय स्वीकृति और श्रम कानूनों के पालन की जांच की जाए
- प्रशासनिक टीमें फील्ड में जाकर निरीक्षण करें
बैठक में मौजूद प्रमुख अधिकारी:
डीटीओ धनंजय, जिला खनन पदाधिकारी सतीश नायक, जनसंपर्क पदाधिकारी पंचानन उरांव, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, डीएसपी भोला प्रसाद, एसडीपीओ अजीत कुजूर और अन्य विभागीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जमशेदपुर जिला प्रशासन ने खनिजों की अवैध तस्करी और भंडारण पर शिकंजा कसने की ठोस योजना बनाई है।
खनन टास्क फोर्स की कार्रवाई में अब और तेजी आएगी, साथ ही पर्यावरण सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों की निगरानी भी कड़ी होगी।
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