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डोबो में स्थित – पंचगव्य चिकित्सा (Panchagavya Therapy) : प्रकृति आधारित उपचार से असाध्य रोगों का इलाज संभव है।

On: March 13, 2026 12:34 PM
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Panchagavya Therapy : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला में स्थित एक अनोखा चिकित्सालय इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। डोबो (केनरा बैंक के पास, फुटबॉल मैदान के समीप) स्थित पंचगव्य चिकित्सालय में प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से साधारण से लेकर गंभीर और असाध्य रोगों का उपचार किया जा रहा है।

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यहां आने वाले अनेक मरीजों का कहना है कि उन्हें ऐसे समय में नई जिंदगी मिली, जब बड़े-बड़े अस्पतालों और डॉक्टरों ने इलाज से हाथ खड़े कर दिए थे।

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क्या है पंचगव्य चिकित्सा (Panchagavya Therapy) पद्धति

पंचगव्य चिकित्सा भारतीय परंपरा और आयुर्वेद से जुड़ी एक प्राचीन उपचार प्रणाली है। इसमें गाय से प्राप्त पांच मुख्य पदार्थों का औषधीय रूप में उपयोग किया जाता है।

पंचगव्य के पांच तत्व

  • 🥛 दूध
  • 🥣 दही
  • 🧈 घी
  • 💧 गोमूत्र
  • 🌱 गोबर

इन सभी को विशेष प्रक्रिया से तैयार कर औषधि, अर्क, घृत, लेप या अन्य रूपों में रोगियों को दिया जाता है। माना जाता है कि इन तत्वों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की क्षमता होती है।

डोबो स्थित पंचगव्य चिकित्सालय बना आशा का केंद्र

सरायकेला-खरसावां जिले के डोबो में केनरा बैंक के पास फुटबॉल मैदान के समीप स्थित पंचगव्य चिकित्सालय आज कई मरीजों के लिए उम्मीद का केंद्र बन गया है। यहां सैकड़ों मरीजों का सफल उपचार होने का दावा किया जाता है। ऐसे कई मरीज भी यहां पहुंचे, जिनके बारे में उनके परिजनों ने बताया कि बड़े अस्पतालों में उन्हें इलाज से मना कर दिया गया था।

संस्था के संचालक सह आचार्य मदन सिंह कुशवाहा के अनुसार यहां आने वाले मरीजों में कई ऐसे भी थे जो मरणासन्न स्थिति में थे और उनके परिजन केवल अंतिम समय का इंतजार कर रहे थे। लेकिन पंचगव्य चिकित्सा और प्राकृतिक उपचार के माध्यम से उनमें सुधार देखा गया और आज वे सामान्य जीवन जी रहे हैं।

किन-किन रोगों का किया जाता है उपचार

चिकित्सालय के अनुसार यहां कई प्रकार के रोगों के उपचार का प्रयास किया जाता है, जैसे:

  • कैंसर से संबंधित समस्याएं
  • मधुमेह (डायबिटीज)
  • त्वचा रोग
  • जोड़ों का दर्द और गठिया
  • लीवर संबंधी रोग
  • पाचन तंत्र की समस्याएं
  • लकवा और नसों से जुड़ी बीमारियां
  • अन्य जटिल और असाध्य माने जाने वाले रोग

आचार्य मदन सिंह कुशवाहा बताते हैं कि उपचार के दौरान रोगी को पंचगव्य आधारित औषधियां, प्राकृतिक आहार, योग-प्राणायाम और जीवनशैली में सुधार की सलाह दी जाती है।

प्राकृतिक जीवनशैली पर भी दिया जाता है जोर

पंचगव्य चिकित्सा केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। इस पद्धति में रोगी को संतुलित आहार, योग, प्राणायाम, और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।

चिकित्सालय का मानना है कि जब शरीर प्राकृतिक नियमों के अनुसार चलता है तो कई रोग स्वतः नियंत्रित होने लगते हैं।

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पंचमहाभूत और पंचगव्य चिकित्सा : प्राकृतिक संतुलन से स्वास्थ्य की राह

आयुर्वेद और भारतीय परंपरा के अनुसार मानव शरीर पाँच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—से मिलकर बना है। प्राचीन वैदिक ज्ञान के अनुसार इन पाँच तत्वों का संतुलन ही स्वस्थ जीवन का आधार माना जाता है। प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सा विचारक कुशवाहा जी का कहना है कि जब शरीर में इन पाँच तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है, तब विभिन्न प्रकार के रोग जन्म लेते हैं और मनुष्य रोगग्रस्त हो जाता है।

कुशवाहा जी के अनुसार शरीर का हर अंग और हर क्रिया इन पाँच तत्वों से प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए पृथ्वी तत्व शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देता है, जल तत्व शरीर में तरलता और रक्त संचार को नियंत्रित करता है, अग्नि तत्व पाचन और ऊर्जा का स्रोत है, वायु तत्व शरीर की गति और श्वसन क्रिया को संचालित करता है, जबकि आकाश तत्व शरीर के भीतर की रिक्तता और संतुलन को बनाए रखता है। जब इनमें से किसी भी तत्व का संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न होने लगती हैं।

कुशवाहा जी का मानना है कि यदि इन तत्वों को पुनः संतुलित कर दिया जाए, तो रोगी व्यक्ति धीरे-धीरे निरोग हो सकता है। इसी सिद्धांत पर आधारित है पंचगव्य चिकित्सा, जो गाय से प्राप्त पाँच पदार्थों—दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर—से निर्मित औषधियों का उपयोग करती है।

पंचगव्य से तैयार औषधियाँ शरीर को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं और शरीर के अंदर बिगड़े हुए तत्वों के संतुलन को सुधारने में सहायक मानी जाती हैं। परंपरागत मान्यता के अनुसार ये औषधियाँ कई प्रकार के रोगों में लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं और शरीर को प्राकृतिक स्वास्थ्य की दिशा में ले जाती हैं।

इस प्रकार पंचमहाभूतों के संतुलन और पंचगव्य आधारित चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना ही नहीं, बल्कि मनुष्य को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देना भी है।

शोध और आधुनिक चिकित्सा का दृष्टिकोण

पंचगव्य चिकित्सा भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का हिस्सा है। कुछ शोधों में गोमूत्र और अन्य पंचगव्य तत्वों में एंटीबैक्टीरियल और इम्युनिटी बढ़ाने वाले गुण पाए गए हैं। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अभी भी इस पर व्यापक शोध और प्रमाण की आवश्यकता बताई जाती है।

सरायकेला-खरसावां जिले के डोबो में स्थित पंचगव्य चिकित्सालय आज उन मरीजों के लिए उम्मीद का केंद्र बनकर उभर रहा है, जो प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करना चाहते हैं।

संस्था के संचालक आचार्य मदन सिंह कुशवाहा का कहना है कि पंचगव्य चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोग का इलाज करना ही नहीं बल्कि मानव जीवन को प्रकृति के साथ संतुलित और स्वस्थ बनाना भी है।

वीडियो देखें :

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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