मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

भारत बना इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का नया केंद्र — 5500 करोड़ की 7 परियोजनाओं की मंजूरी, 36 हजार करोड़ का उत्पादन और 5,100 नौकरियां सृजित

On: October 27, 2025 9:18 PM
Follow Us:

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2025 | PIB रिपोर्ट

---Advertisement---
Netaji Advertisement

भारत सरकार ने देश को “विनिर्माण महाशक्ति” बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (Electronics Components Manufacturing Scheme – ECMS) के तहत 5,532 करोड़ रुपये के निवेश वाली सात परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं से देश में 36,559 करोड़ रुपये मूल्य के कलपुर्जों का उत्पादन होगा और 5,100 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

ये सभी परियोजनाएं देश के तीन राज्यों — तमिलनाडु (5 इकाइयां), आंध्र प्रदेश (1 इकाई) और मध्य प्रदेश (1 इकाई) — में स्थापित की जाएंगी। इससे क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ देश के दक्षिण और मध्य भाग में उच्च-तकनीकी विनिर्माण का नया आधार तैयार होगा।

भारत की आत्मनिर्भरता की नई छलांग

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अब केवल तैयार उत्पादों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन घटकों, सामग्रियों और मॉड्यूल्स का भी घरेलू निर्माण करेगा जिन पर अब तक देश की निर्भरता विदेशी बाजारों पर थी।

इन परियोजनाओं से भारत में अब कॉपर क्लैड लैमिनेट (Copper Clad Laminate), मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (Multi-layer PCB), एचडीआई पीसीबी, कैमरा मॉड्यूल, और पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म्स जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटक भारत में ही निर्मित होंगे।

THE NEWS FRAME

घरेलू मांग की पूर्ति और निर्यात में उछाल

मंत्री वैष्णव ने बताया कि इन इकाइयों के शुरू होने के बाद —

  • भारत की कॉपर क्लैड लैमिनेट की 100% मांग देश के भीतर पूरी की जाएगी।
  • पीसीबी (Printed Circuit Board) की 20% और कैमरा मॉड्यूल्स की 15% घरेलू मांग भी यहीं से पूरी होगी।
  • इन संयंत्रों से उत्पादित लगभग 60% कलपुर्जों का निर्यात किया जाएगा।

यह कदम भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि उसे वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण भागीदार भी बनाएगा।

आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक प्रभाव

इन परियोजनाओं से देश की आयात निर्भरता घटेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और स्थानीय बाजार में उत्पादों की कीमतें प्रतिस्पर्धात्मक रूप से कम होंगी।
इसके साथ ही, 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और हजारों अप्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होंगी, जिनमें इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ और अनुसंधान कर्मियों के लिए अवसर शामिल होंगे।

यह पहल रक्षा, दूरसंचार, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इससे इन क्षेत्रों के लिए भरोसेमंद और स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का निर्माण होगा।

“मेक इन इंडिया” से “डिज़ाइन इन इंडिया” तक

अब भारत केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माता नहीं रहेगा, बल्कि उनके डिज़ाइन, घटक निर्माण और निर्यात तक की पूरी प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

यह योजना सरकार की अन्य प्रमुख योजनाओं — उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) और भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) — के साथ मिलकर देश में एक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (Value Chain) का निर्माण करेगी, जो उपकरणों से लेकर चिप्स और नवाचार तक फैली होगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण घटक योजना (ECMS) भारत को “विनिर्माण हब” बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
यह कदम न केवल देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार

---Advertisement---
Netaji Advertisement
---Advertisement---
Netaji Advertisement

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment