मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

इंडिया AI मिशन: कैसे भारत बना रहा है सुरक्षित, भरोसेमंद और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य

On: July 27, 2026 7:53 PM
Follow Us:
AI
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

---Advertisement---
Netaji Advertisement

नई दिल्ली । आज पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली तकनीकों में से एक बन चुकी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, बैंकिंग, मीडिया और सरकारी सेवाओं से लेकर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तक एआई का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। लेकिन जितनी तेजी से यह तकनीक आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से इससे जुड़े जोखिम भी सामने आ रहे हैं। फर्जी वीडियो (डीपफेक), गलत जानकारी, डेटा चोरी, पक्षपातपूर्ण निर्णय और गोपनीयता का खतरा जैसे कई मुद्दे दुनिया भर में चिंता का विषय बने हुए हैं।

Headlines

---Advertisement---
Netaji Advertisement

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission) की शुरुआत की है। इस मिशन का उद्देश्य केवल एआई तकनीक विकसित करना ही नहीं, बल्कि इसे सुरक्षित, निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी के लिए उपयोगी बनाना भी है। सरकार का मानना है कि एआई का विकास तभी सफल माना जाएगा, जब आम नागरिक इस तकनीक पर भरोसा कर सकें और इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

प्रधानमंत्री के AI विजन पर आधारित है मिशन

इंडियाएआई मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “तकनीक का लोकतंत्रीकरण” यानी तकनीक को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के विचार पर आधारित है। इसका लक्ष्य युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, शोध को मजबूत करना और भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है।

सरकार ने मार्च 2024 में इस मिशन को मंजूरी दी थी। इसके लिए पांच वर्षों में 10,371 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। यह निवेश भारत में एक मजबूत और आत्मनिर्भर एआई इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सात प्रमुख स्तंभों पर काम कर रहा है मिशन – India AI Mission

इंडियाAI मिशन को सात महत्वपूर्ण स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया है। इनमें उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध कराना, स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना, डेटा प्लेटफॉर्म तैयार करना, नए एआई एप्लिकेशन विकसित करना, युवाओं को एआई की ट्रेनिंग देना, स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता प्रदान करना और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई विकसित करना शामिल है।

इन सभी क्षेत्रों में एक साथ काम करके भारत ऐसा वातावरण तैयार कर रहा है, जहां नई तकनीक का विकास भी हो और उसका उपयोग जिम्मेदारी के साथ भी किया जाए।

स्वदेशी AI मॉडल पर विशेष जोर

सरकार का सबसे बड़ा फोकस विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और भारत में ही आधुनिक एआई मॉडल विकसित करना है। इसके लिए देश के स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता दी जा रही है। अब तक 20 स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने के प्रस्तावों का चयन किया गया है। इनमें 12 बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) और 8 छोटे भाषा मॉडल (Small Language Models) शामिल हैं। इन मॉडलों का उपयोग भारतीय भाषाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सरकारी कार्यों, वीडियो निर्माण, भाषण पहचान, अनुवाद और अन्य कई क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे भारत की भाषाई विविधता और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप एआई समाधान विकसित किए जा सकेंगे।

कंप्यूटिंग क्षमता का तेजी से विस्तार

AI विकसित करने के लिए अत्यधिक शक्तिशाली कंप्यूटर और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) की आवश्यकता होती है। सरकार ने इस दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं।

अब तक 15 कंप्यूटिंग सेवा प्रदाताओं को इस मिशन से जोड़ा गया है। 237 परियोजनाओं को समर्थन दिया जा चुका है और लगभग 93 लाख GPU घंटे स्वीकृत किए गए हैं। इससे शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को महंगे कंप्यूटिंग संसाधनों तक आसानी से पहुंच मिल रही है।

AI आधारित नए समाधान विकसित हो रहे हैं

इंडियाएआई मिशन के तहत केवल शोध ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान भी तैयार किए जा रहे हैं। देशभर में 12 राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन और इनोवेशन चैलेंज आयोजित किए गए हैं। इनके माध्यम से 62 एआई प्रोटोटाइप विकसित किए गए हैं तथा 20 एआई आधारित समाधानों को वास्तविक उपयोग में लाने में सहायता दी गई है। इन समाधानों का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में किया जा रहा है।

युवाओं को मिल रही नई ट्रेनिंग

भारत सरकार का मानना है कि भविष्य में AI से जुड़े लाखों रोजगार पैदा होंगे। इसलिए युवाओं को समय रहते इस तकनीक की जानकारी देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से 178 शैक्षणिक संस्थानों में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर 686 फेलोशिप प्रदान की गई हैं। इसके अलावा “युवा एआई फॉर ऑल” कार्यक्रम के माध्यम से 26 लाख से अधिक लोगों ने एआई का प्रशिक्षण पूरा किया है। इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं।

देशभर में बन रही हैं AI लैब

सरकार स्कूलों और कॉलेजों में AI शिक्षा को मजबूत करने के लिए डेटा एवं एआई प्रयोगशालाएं भी स्थापित कर रही है। अब तक देश में 27 डेटा और एआई लैब स्थापित की जा चुकी हैं। इन प्रयोगशालाओं में 2,500 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 188 नई प्रयोगशालाओं पर कार्य जारी है। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्रों को आधुनिक तकनीक पर व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।

स्थापित हो रहे हैं AI उत्कृष्टता केंद्र

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 58 एआई उत्कृष्टता केंद्र (AI Centres of Excellence) स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में राज्य सरकारें, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थान मिलकर शोध, नवाचार और नई तकनीकों के विकास पर काम करेंगे। इससे स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए भी एआई का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

सुरक्षित और भरोसेमंद एआई क्यों जरूरी है?

एआई जितनी उपयोगी तकनीक है, उससे जुड़े खतरे भी उतने ही गंभीर हो सकते हैं। आज इंटरनेट पर फर्जी वीडियो, नकली आवाज, गलत जानकारी, डेटा चोरी, एल्गोरिदम में पक्षपात और गोपनीयता से जुड़े मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि इन चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो लोगों का एआई पर भरोसा कम हो सकता है। इसी कारण इंडियाएआई मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा “सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई” बनाया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे नियम, तकनीक और मूल्यांकन प्रणाली विकसित करना है जिससे एआई का उपयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जा सके।

13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं पर काम

सरकार ने देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में 13 जिम्मेदार एआई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में मुख्य रूप से डीपफेक की पहचान, एआई में पक्षपात कम करना, गोपनीयता की सुरक्षा, एआई के निर्णयों को समझने योग्य बनाना, मशीन अनलर्निंग तथा एआई जोखिमों का आकलन शामिल है। इन शोध परियोजनाओं से भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित होगी जो एआई को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगी।

डीपफेक से लड़ने की तैयारी

आज डीपफेक पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। भारत के कई प्रमुख संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं। आईआईटी जोधपुर, आईआईटी मद्रास और अन्य संस्थानों द्वारा ऐसे सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं जो नकली वीडियो और आवाज की पहचान कर सकें। आईआईटी खड़गपुर वास्तविक समय में फर्जी आवाज की पहचान करने वाली तकनीक पर कार्य कर रहा है।इन तकनीकों से साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी और गलत सूचना फैलाने की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

गोपनीयता और निष्पक्षता पर विशेष ध्यान

AI सिस्टम कभी-कभी उपलब्ध डेटा के कारण पक्षपातपूर्ण निर्णय भी ले सकते हैं। इसे रोकने के लिए एनआईटी रायपुर स्वास्थ्य सेवाओं में निष्पक्ष एआई एल्गोरिदम विकसित कर रहा है। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी धारवाड़ ऐसे मशीन लर्निंग मॉडल तैयार कर रहे हैं जिनमें उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी अधिक सुरक्षित रहे। रक्षा उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान (DIAT) भी सुरक्षा क्षेत्र के लिए गोपनीयता-संरक्षित एआई तकनीक विकसित कर रहा है।

AI सुरक्षा संस्थान करेगा निगरानी

भारत सरकार ने जनवरी 2025 में इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान की स्थापना की घोषणा की थी। इस संस्थान का उद्देश्य एआई सुरक्षा से जुड़े वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना, नई तकनीकों का परीक्षण करना और यह सुनिश्चित करना है कि भारत में विकसित होने वाले एआई सिस्टम सुरक्षित और विश्वसनीय हों। यह संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही भारत की भूमिका

भारत केवल अपने देश में एआई विकसित नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक AI नीति निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भारत जी-20, संयुक्त राष्ट्र और ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (GPAI) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार भागीदारी कर रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत ने जिम्मेदार एआई के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। इनमें सुरक्षित एआई विकास के लिए स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएं, एआई शासन पर मार्गदर्शन और ट्रस्टेड एआई कॉमन्स जैसे प्रयास शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य दुनिया भर में सुरक्षित और जिम्मेदार एआई के विकास को बढ़ावा देना है।

भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI भारत की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग में बड़े बदलाव ला सकता है। यदि इसका उपयोग सुरक्षित और जिम्मेदारी से किया जाए, तो यह करोड़ों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है। इंडियाएआई मिशन इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है कि तकनीक केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ देश के हर नागरिक तक पहुंचे।

सरकार का लक्ष्य ऐसा AI इकोसिस्टम तैयार करना है जो नवाचार को बढ़ावा दे, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करे, भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दे तथा दुनिया के सामने सुरक्षित, निष्पक्ष और भरोसेमंद एआई का नया मॉडल प्रस्तुत करे। यही कारण है कि भारत आज केवल एआई तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि जिम्मेदार और विश्वसनीय एआई के वैश्विक भविष्य को आकार देने वाले देशों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

---Advertisement---
Netaji Advertisement

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment

💬
TNF AI असिस्टेंट
● ताज़ा खबरों के लिए तैयार
नमस्ते! 👋 मैं आपका TNF AI असिस्टेंट हूँ। आप हमारी वेबसाइट की कोई भी खबर, topic या इंटरनेट का कोई भी सवाल यहाँ पूछ सकते हैं!