
भारत: El Nino की संभावित चुनौती और मानसून की अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार पूरी सतर्कता, स्पष्ट रणनीति और मजबूत ग्राउंड एक्शन के साथ हालात को संभालने में जुटी हुई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कृषि एवं किसान हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहले से ही बहुस्तरीय तैयारी शुरू कर दी थी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार केवल मौसम की स्थिति पर नजर नहीं रख रही, बल्कि बुवाई, बीज, फसल सुरक्षा, किसानों की आर्थिक मदद और राज्यवार मॉनिटरिंग जैसे सभी पहलुओं पर लगातार काम कर रही है।

दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अप्रैल महीने से ही संभावित जोखिमों को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी थी। अब हर हफ्ते उच्चस्तरीय समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी राज्य या जिले में यदि मानसून की स्थिति बिगड़ती है तो तत्काल कदम उठाए जा सकें।
जून में कम बारिश, लेकिन जुलाई में स्थिति में सुधार
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि जून 2026 में देश में सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जिससे खरीफ सीजन की शुरुआत प्रभावित हुई। हालांकि जुलाई में स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है और अब वर्षा की कमी घटकर 24 प्रतिशत रह गई है। पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है, जिससे खेती-किसानी को कुछ राहत मिली है।
उन्होंने बताया कि पहले जहां कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 थी, वह अब घटकर 178 रह गई है। यह संकेत है कि मानसून धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। सरकार को उम्मीद है कि जुलाई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में वर्षा की स्थिति और बेहतर होगी, जिससे खरीफ बुवाई में तेजी आएगी और किसानों की चिंता कुछ हद तक कम होगी।
कई राज्यों में विशेष निगरानी, केंद्र की नजर हर गतिविधि पर
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जिन राज्यों में मानसून की स्थिति या बुवाई पर असर पड़ने की आशंका ज्यादा है, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। इनमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं।
इन राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। जिला स्तर तक स्थिति की समीक्षा हो रही है और स्थानीय अधिकारियों को फील्ड रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का फोकस केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेतों में वास्तविक स्थिति, किसानों की जरूरत और फसल की स्थिति पर भी है।
खरीफ बुवाई पर असर पिछले साल से 91.95 लाख हेक्टेयर कम बोआई
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान समय तक देशभर में 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। मानसून में देरी और बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है, विशेष रूप से उन फसलों पर जिन्हें शुरुआती बारिश की अधिक जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन और कपास जैसी फसलों पर इसका ज्यादा असर देखा गया है, क्योंकि इनकी बुवाई समय पर बारिश पर काफी निर्भर करती है। यदि मानसून में और देरी होती है तो इन फसलों का रकबा और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से सरकार ने राज्यों और कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों को वैकल्पिक फसलों की सलाह देना शुरू कर दिया है।
किसानों को कम अवधि और कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह
अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलें अपनाने की सलाह दी जा रही है, जिनमें कम पानी की जरूरत हो और जो कम समय में तैयार हो सकें। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों की बुवाई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इन फसलों का फायदा यह है कि ये कम पानी में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं और यदि बारिश सामान्य से कम भी हो, तो किसानों को पूरी तरह नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को फसल चयन, बीज, उर्वरक और बुवाई तकनीक से जुड़ी सलाह भी दी जा रही है।
अप्रैल से शुरू हुई तैयारी ICAR के साथ तैयार किए गए कंटिंजेंसी प्लान
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस चुनौती के लिए पहले ही अप्रैल 2026 से तैयारी शुरू कर दी थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से उन जिलों की पहचान की गई, जहां अल नीनो और कमजोर मानसून का प्रभाव पड़ सकता है। इन जिलों के लिए कंटिंजेंसी प्लान तैयार किए गए और उन्हें संबंधित राज्यों के साथ साझा किया गया।
इन योजनाओं में यह तय किया गया है कि यदि बारिश कम होती है, देर से होती है या बीच में रुक जाती है, तो किसानों को कौन-सी वैकल्पिक फसलें बोनी चाहिए, किन बीजों का इस्तेमाल करना चाहिए, सिंचाई प्रबंधन कैसे करना चाहिए और किस तरह नुकसान को कम किया जा सकता है। यह तैयारी इस बात का संकेत है कि सरकार मौसमी अनिश्चितता को केवल मौसम विभाग की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उसे जमीनी कृषि रणनीति से जोड़कर देख रही है।
खेत बचाओ अभियान से 80 लाख से अधिक किसानों तक पहुंच
जून महीने में सरकार ने “खेत बचाओ अभियान” चलाया, जिसके तहत किसानों तक सीधे पहुंच बनाकर उन्हें मानसून की स्थिति, फसल विकल्प, जल प्रबंधन और सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस अभियान के तहत 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 80 लाख से ज्यादा किसानों तक सीधा संपर्क स्थापित किया गया।
यह अभियान केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं था, बल्कि किसानों को बदलते मौसम के अनुसार त्वरित सलाह देने का एक बड़ा प्रयास था। कृषि विभाग, राज्य सरकारें, कृषि विज्ञान केंद्र, पंचायत स्तर के कर्मचारी और अन्य एजेंसियां इसमें सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
बीज की कमी न हो इसके लिए 1.75 लाख क्विंटल राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार
सरकार ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि यदि किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर जाना पड़े, तो उन्हें समय पर बीज उपलब्ध हो सके। इसी उद्देश्य से केंद्र ने करीब 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में बुवाई प्रभावित न हो और किसानों को बीज संकट का सामना न करना पड़े।

बीज भंडार की यह व्यवस्था उन राज्यों और जिलों के लिए खास तौर पर अहम है, जहां बारिश की स्थिति अचानक बदल सकती है और किसानों को तुरंत वैकल्पिक फसल की ओर शिफ्ट होना पड़ सकता है।
किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा पर भी जोर
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) अभियान को भी तेज किया गया है। 30 जून 2026 तक प्राप्त 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इससे किसानों को खेती के लिए जरूरी पूंजी समय पर मिल सकेगी।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं। सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक किसान बीमा योजना से जुड़ें, ताकि यदि बारिश की कमी, फसल खराब होने या किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति बनती है तो किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
El Nino मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अल नीनो की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। इसके तहत अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप, राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम और विभिन्न राज्यों में नियुक्त अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
ये सभी इकाइयां मानसून की प्रगति, बुवाई की रफ्तार, फसल की स्थिति, बाजार की स्थिति और किसानों की जरूरतों की नियमित समीक्षा कर रही हैं। इसका फायदा यह होगा कि यदि किसी क्षेत्र में संकट गहराता है तो समय रहते राहत, सलाह और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
सरकार की रणनीति: सतर्कता, संसाधन और समयबद्ध कार्रवाई
पूरे घटनाक्रम से साफ है कि केंद्र सरकार अल नीनो की चुनौती को गंभीरता से लेते हुए बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसमें मौसम की निगरानी, राज्यवार समीक्षा, वैकल्पिक फसल सलाह, बीज भंडारण, किसानों तक पहुंच, ऋण सुविधा और बीमा सुरक्षा जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
सरकार का उद्देश्य केवल मानसून की स्थिति का इंतजार करना नहीं, बल्कि संभावित नुकसान को पहले से कम करना और किसानों को हर स्तर पर सहायता देना है। यही वजह है कि शिवराज सिंह चौहान खुद हर हफ्ते हाई-लेवल मॉनिटरिंग कर रहे हैं और राज्यों से सीधे फीडबैक ले रहे हैं।
अल नीनो की आशंका और मानसून की अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार की सक्रियता यह दिखाती है कि कृषि क्षेत्र को लेकर इस बार तैयारी पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और संगठित है। जून में बारिश की कमी से जरूर चिंता बढ़ी, लेकिन जुलाई में सुधार के संकेत और सरकार की लगातार मॉनिटरिंग ने उम्मीद भी जगाई है। बीज भंडार, कंटिंजेंसी प्लान, खेत बचाओ अभियान, KCC और फसल बीमा जैसी पहलों के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसान किसी भी परिस्थिति में अकेला न पड़े।
आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार और सरकारी रणनीति का असर खरीफ सीजन पर साफ दिखाई देगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि सरकार अल नीनो की चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड में है।


















