जमशेदपुर: Jamshedpur पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पुरानी और नई पीढ़ी के बीच सोच के अंतर को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी पर शंका करने के बजाय उस पर विश्वास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी बदलती परिस्थितियों, आधुनिक जीवनशैली और तेजी से विकसित हो रही तकनीक के दौर में बड़ी हो रही है। ऐसे में उसका सोचने, समझने और काम करने का तरीका पुरानी पीढ़ी से अलग होना स्वाभाविक है। पुरानी पीढ़ी को अपने अनुभवों के आधार पर नई पीढ़ी को आंकने के बजाय उसे अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए।
सोनारी में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित श्री श्री श्रावणी रामायण पाठ के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए सरयू राय ने नई पीढ़ी, तकनीक और बदलते सामाजिक परिवेश को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज में पीढ़ियों के बीच विचारों का अंतर हमेशा रहा है और आने वाले समय में भी रहेगा। इसे विवाद या अविश्वास का कारण बनाने के बजाय अनुभव और नई सोच के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत है।
पुरानी और नई पीढ़ी की सोच में अंतर स्वाभाविक
सरयू राय ने कहा कि पुरानी पीढ़ी अक्सर यह मान लेती है कि नई पीढ़ी उतना नहीं कर रही है या उतना नहीं कर पाएगी, जितना उसने अपने समय में किया था। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच उचित नहीं है। हर पीढ़ी अपने समय की परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि जिस समय पुरानी पीढ़ी बड़ी हुई, उस समय की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिस्थितियां आज से बिल्कुल अलग थीं। आज की पीढ़ी के सामने नई तरह की चुनौतियां और अवसर हैं। इसलिए दोनों पीढ़ियों की तुलना करना उचित नहीं है।
नेहरू के पत्र का किया उल्लेख
नई पीढ़ी की सोच को समझाने के लिए सरयू राय ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी बेटी इंदिरा गांधी को लिखे पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ी अपने अनुभवों, मान्यताओं और पुराने तौर-तरीकों के आधार पर दुनिया को देखने की आदी होती है।
वहीं, नई पीढ़ी अलग समय और अलग परिस्थितियों में जन्म लेती है। उसके सामने नई समस्याएं होती हैं और उनके समाधान के लिए वह नए तरीकों को अपनाती है। इसलिए उसका सोचने का तरीका भी अलग होना स्वाभाविक है।
नई सोच को केवल अलग होने के कारण गलत न मानें
सरयू राय ने कहा कि केवल इसलिए नई पीढ़ी की सोच को गलत नहीं माना जा सकता क्योंकि वह पुरानी पीढ़ी की सोच से अलग है। समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं और परिस्थितियों के साथ विचारों में बदलाव भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ी का अनुभव समाज की महत्वपूर्ण पूंजी है। अनुभव से नई पीढ़ी को सीख मिल सकती है, लेकिन यह अनुभव उसकी स्वतंत्र सोच और नए प्रयोगों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए। दोनों पीढ़ियों के बीच संवाद और विश्वास होना जरूरी है।
मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी रखी बात
कार्यक्रम के दौरान सरयू राय ने मोबाइल फोन और नई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर नई पीढ़ी की होने वाली आलोचना पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज लगभग हर हाथ में स्मार्टफोन है। ऐसे में सवाल यह नहीं होना चाहिए कि युवा मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं, बल्कि सवाल यह होना चाहिए कि वह मोबाइल का इस्तेमाल किस उद्देश्य से कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट आज ज्ञान और जानकारी का बड़ा माध्यम बन चुके हैं। यदि कोई युवा मोबाइल के माध्यम से शिक्षा, ज्ञान, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यवसाय या अपने काम से संबंधित उपयोगी जानकारी प्राप्त कर रहा है तो तकनीक उसके लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है।
गलत इस्तेमाल से तकनीक बन सकती है परेशानी
सरयू राय ने कहा कि तकनीक अपने आप में न तो अच्छी है और न बुरी। उसका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है।
यदि कोई व्यक्ति मोबाइल पर अनावश्यक सामग्री देखने में अपना समय बर्बाद करता है तो वही मोबाइल उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। वहीं यदि उसका उपयोग सीखने, पढ़ने, रोजगार तलाशने और समाज के लिए उपयोगी कार्य करने में किया जाए तो वही तकनीक जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम बन सकती है।
टेक्नोलॉजी को मालिक नहीं, सेवक बनाइए
सरयू राय ने तकनीक के सही इस्तेमाल को लेकर कहा कि टेक्नोलॉजी को अपने जीवन का मालिक बनाने के बजाय उसे अपना सेवक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी को मालिक बनाइएगा तो बर्बाद हो जाइएगा। टेक्नोलॉजी को सेवक के रूप में रखेंगे तो कल्याण हो जाएगा।”
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल व्यक्ति के विकास के साथ-साथ समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और संचार सहित लगभग हर क्षेत्र में तकनीक का उपयोग हो रहा है।
रामायण पाठ से समझाया तकनीक का सकारात्मक उपयोग
सरयू राय ने तकनीक के सकारात्मक इस्तेमाल को समझाने के लिए श्री श्री श्रावणी रामायण पाठ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले जब कुछ लोग एक साथ बैठकर रामायण पाठ करते थे तो वहां जितने लोग मौजूद होते थे, उतने ही लोग उसे सुन पाते थे।
उस समय लाउडस्पीकर जैसी तकनीक उपलब्ध नहीं थी। बाद में जब तकनीक का विकास हुआ और लाउडस्पीकर आया तो धार्मिक कार्यक्रमों की आवाज दूर तक पहुंचने लगी। इससे रामायण पाठ सुनने वालों की संख्या भी बढ़ गई और सैकड़ों-हजारों लोग एक साथ इसका लाभ लेने लगे।
मोबाइल और इंटरनेट ने बढ़ाई पहुंच
उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन और इंटरनेट ने किसी भी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम की पहुंच को और व्यापक बना दिया है। रामायण पाठ का सीधा प्रसारण इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठे व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।
इस तरह तकनीक का इस्तेमाल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रचार-प्रसार तथा अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक के सकारात्मक उपयोग का उदाहरण है।
तकनीक को दोष देने के बजाय इस्तेमाल की दिशा देखें
सरयू राय ने कहा कि मोबाइल फोन और आधुनिक तकनीक को दोष देने के बजाय यह देखना चाहिए कि उसका इस्तेमाल किस दिशा में हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी साधन की उपयोगिता उसके इस्तेमाल पर निर्भर करती है।
तकनीक को अपने ऊपर हावी करने के बजाय उसे अपने उद्देश्य की पूर्ति का साधन बनाया जाना चाहिए। यदि व्यक्ति तकनीक को नियंत्रित करते हुए उसका सही इस्तेमाल करता है तो यह उसके जीवन में प्रगति के नए रास्ते खोल सकती है।
अनुभव और नई सोच का समन्वय जरूरी
सरयू राय ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए पुरानी पीढ़ी के अनुभव और नई पीढ़ी की सोच का समन्वय जरूरी है। पुरानी पीढ़ी के पास अनुभव है तो नई पीढ़ी के पास नई ऊर्जा, नए विचार और नई तकनीक को अपनाने की क्षमता है।
यदि दोनों पीढ़ियां एक-दूसरे को समझें और सम्मान दें तो समाज के विकास की गति और तेज हो सकती है। उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ी को नई पीढ़ी के प्रति अविश्वास की भावना छोड़नी होगी और युवाओं को भी अपने अनुभवों का सम्मान करते हुए बुजुर्गों से सीख लेने की जरूरत है।
नई पीढ़ी पर भरोसा करने की अपील
अपने संबोधन के अंत में सरयू राय ने पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी पर भरोसा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल उनकी अलग सोच के कारण गलत नहीं समझना चाहिए। उन्हें अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा, “नई पीढ़ी पर भरोसा कीजिए। निश्चित जानिए कि नई पीढ़ी बढ़िया करेगी।”
श्रावणी रामायण पाठ का हुआ समापन
छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित श्री श्री श्रावणी रामायण पाठ का समापन धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और रामायण पाठ के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश दिया।
समापन समारोह में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम ने एक ओर जहां लोगों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ा, वहीं दूसरी ओर बदलते समय में तकनीक और नई पीढ़ी के महत्व को लेकर भी सार्थक संदेश दिया।
समारोह के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि परंपरा और आधुनिकता के बीच टकराव की जरूरत नहीं है। यदि अनुभव, संस्कार, नई सोच और तकनीक का सही तालमेल बनाया जाए तो समाज को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।


























