मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

अफ्रीका में Ebola का कहर WHO प्रमुख खुद पहुंचे महामारी के केंद्र बुन्या यात्रा प्रतिबंध हटाने और संघर्ष विराम की अपील

810c92dedce0cbe5e9d700a4ea327a2e
On: May 31, 2026 9:57 PM
Follow Us:
Untitled Design 22 3
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

अफ्रीका: एक बार फिर Ebola वायरस का प्रकोप तेजी से फैलता नजर आ रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम गेब्रेयेसस स्वयं महामारी के केंद्र माने जा रहे कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के इटुरी प्रांत की राजधानी बुन्या पहुंचे हैं।

A 2

बुन्या में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. टेड्रोस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि प्रभावित देशों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों और सीमा बंदी के फैसलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार ऐसे कदम महामारी नियंत्रण में मदद करने के बजाय राहत और स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करते हैं।

बुंडिबुग्यो स्ट्रेन बना नई चुनौती, नहीं है स्वीकृत वैक्सीन

इस बार Ebola का जो स्वरूप सामने आया है वह ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo Strain) है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस स्ट्रेन के खिलाफ अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।

संक्रमण मुख्य रूप से पूर्वी कांगो के इटुरी, उत्तरी कीवू और दक्षिणी कीवू प्रांतों में फैला हुआ है। इसके अलावा वायरस पड़ोसी देश युगांडा तक भी पहुंच चुका है।

WHO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार:

  • 134 पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं
  • 18 लोगों की मौत हो चुकी है
  • 1,000 से अधिक संदिग्ध मामलों की जांच जारी है
  • प्रतिदिन नए मरीज सामने आ रहे हैं

15 मई को प्रकोप की आधिकारिक घोषणा के बाद से स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

यात्रा प्रतिबंधों पर WHO की कड़ी आपत्ति

इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई देशों ने कड़े कदम उठाए हैं। अमेरिका और कनाडा ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के नागरिकों के लिए वीजा प्रतिबंध और यात्रा नियंत्रण लागू कर दिए हैं।

वहीं क्षेत्रीय स्तर पर भी कई देशों ने सीमाएं आंशिक या पूर्ण रूप से बंद कर दी हैं।

  • युगांडा ने कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।
  • रवांडा ने कांगो से आने वाले यात्रियों पर कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं।
  • पिछले 30 दिनों में कांगो की यात्रा करने वाले विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है।

डॉ. टेड्रोस ने कहा कि इतिहास बताता है कि सीमा बंदी और यात्रा प्रतिबंध महामारी को रोकने का प्रभावी तरीका नहीं हैं।

जब सीमाएं बंद कर दी जाती हैं तो लोग वैकल्पिक और अनियंत्रित रास्तों का इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे संक्रमित लोगों की पहचान, स्क्रीनिंग और ट्रैकिंग करना और कठिन हो जाता है।”

WHO का मानना है कि महामारी से लड़ने के लिए पारदर्शिता, सहयोग और खुला संवाद अधिक प्रभावी उपाय हैं।

THE NEWS FRAME

गृहयुद्ध और महामारी का दोहरा संकट

कांगो का पूर्वी क्षेत्र लंबे समय से हिंसा, विद्रोह और आंतरिक संघर्षों से प्रभावित रहा है। विभिन्न सशस्त्र गुटों की गतिविधियों के कारण लाखों लोग विस्थापित होकर अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार इस क्षेत्र में लगभग 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हैं।

ऐसे माहौल में इबोला का प्रकोप स्थिति को और भयावह बना रहा है।

  • स्वास्थ्य कर्मियों की आवाजाही बाधित हो रही है।
  • कई इलाकों में चिकित्सा टीमों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
  • राहत सामग्री और दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

हाल ही में मोंगब्वालु क्षेत्र के एक अस्पताल पर हुए हमले में आइसोलेशन टेंट जला दिए गए, जिसके बाद कई संक्रमित मरीज वहां से भाग निकले।

WHO प्रमुख की संघर्ष विराम की भावुक अपील

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. टेड्रोस ने सभी विद्रोही और सशस्त्र समूहों से तत्काल संघर्ष विराम की अपील की है।

उन्होंने कहा कि बीमारी और युद्ध का यह दोहरा संकट हजारों निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है।

बीमार बच्चे तड़प रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं और लोग जान गंवा रहे हैं। किसी भी राजनीतिक या सैन्य संघर्ष से ज्यादा महत्वपूर्ण मानव जीवन है। हम सभी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि कम से कम मानवीय सहायता के लिए अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा करें।

WHO का कहना है कि यदि स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा तो संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

स्थानीय समुदायों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैक्सीन वाले इस इबोला स्ट्रेन से लड़ने के लिए स्थानीय समुदायों का सहयोग बेहद जरूरी है।

डॉ. टेड्रोस ने कहा कि महामारी नियंत्रण केवल अस्पतालों और दवाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए लोगों का विश्वास जीतना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा:

हम यहां लोगों को निर्देश देने नहीं बल्कि उनकी समस्याएं समझने आए हैं। जब तक स्थानीय समुदाय, महिलाएं और युवा इस अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक संक्रमण की श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ना संभव नहीं होगा।

Ebola वायरस क्या है और कितना खतरनाक है?

Ebola वायरस दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक माना जाता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है।

इनमें शामिल हैं:

  • खून
  • थूक
  • पसीना
  • उल्टी
  • दस्त
  • अन्य शारीरिक तरल पदार्थ

संक्रमण होने के बाद लक्षण आमतौर पर 2 से 21 दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं।

Ebola के शुरुआती लक्षण

बीमारी की शुरुआत सामान्य फ्लू या मलेरिया जैसी दिखाई देती है।

मुख्य लक्षण:

  • अचानक तेज बुखार
  • अत्यधिक कमजोरी
  • मांसपेशियों में दर्द
  • जोड़ों में दर्द
  • तेज सिरदर्द
  • गले में खराश

बीमारी बढ़ने पर दिखने वाले गंभीर लक्षण

जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, वायरस शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है।

गंभीर लक्षणों में शामिल हैं:

  • लगातार उल्टी
  • गंभीर दस्त
  • पेट में असहनीय दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते
  • लिवर और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होना
  • आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव

कई मामलों में मरीज की आंखें लाल हो जाती हैं और मसूड़ों, नाक तथा अन्य अंगों से रक्तस्राव शुरू हो सकता है।

आगे की राह वैश्विक सहयोग ही सबसे बड़ा हथियार

कांगो के स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा ने उम्मीद जताई है कि बेहतर निगरानी, परीक्षण क्षमता और पिछले अनुभवों के आधार पर आगामी 4 से 6 महीनों में प्रकोप को नियंत्रित किया जा सकता है।

इस बीच:

  • यूरोपीय संघ ने चिकित्सा सहायता भेजी है।
  • अमेरिका ने 80 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त सहायता की घोषणा की है।
  • WHO और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और उपचार कार्यों को मजबूत कर रही हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना, संक्रमित लोगों की पहचान करना और स्थानीय समुदायों का भरोसा जीतना है। जब तक सीमाई प्रतिबंधों, सुरक्षा चुनौतियों और स्वास्थ्य संकट के बीच संतुलन नहीं बनता, तब तक अफ्रीका के इस हिस्से पर इबोला का खतरा बना रह सकता है।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM

Leave a Comment

धार्मिक

See All

लाइफस्टाइल

See All

मौसम

See All

खेल

See All

क्राइम

See All

Entertainment

See All

ज्योतिष

See All
Link copied