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ऑनलाइन खतियान के बावजूद टाटा विस्थापित रैयतों से मालगुजारी वसूली पर उठे सवाल, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

On: March 20, 2026 4:27 PM
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जमशेदपुर : झारखंड मूलवासी अधिकार मंच की ओर से टाटा विस्थापित रैयतों की जमीन से संबंधित एक गंभीर मुद्दा उठाया गया है। संगठन ने उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि ऑनलाइन खतियान दर्ज होने के बावजूद रैयतों से मालगुजारी (राजस्व) वसूली नहीं की जा रही है, जिससे उन्हें विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला?

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ज्ञापन के अनुसार, टाटा कंपनी द्वारा पूर्व में औद्योगिक प्रयोजनों के लिए अधिग्रहित की गई कई जमीनें वर्तमान में उपयोग में नहीं हैं और कई भूमि टाटा लीज क्षेत्र से बाहर स्थित हैं। ऐसे में इन जमीनों का खतियान अब झारखंड सरकार के ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज हो चुका है।

लेकिन समस्या यह है कि—

  • ऑनलाइन रिकॉर्ड होने के बावजूद मालगुजारी वसूली नहीं हो रही
  • अंचल कार्यालयों द्वारा रैयतों की जमीन को राजस्व सूची में शामिल नहीं किया जा रहा
  • कई बार आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

इस स्थिति ने रैयतों को अधिकारिक रूप से अपनी जमीन पर दावा स्थापित करने में कठिनाई पैदा कर दी है।

रैयतों को हो रही हैं ये समस्याएं

ज्ञापन में बताया गया है कि मालगुजारी नहीं कटने के कारण रैयतों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है—

  • बैंक लोन लेने में दिक्कत
  • सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा
  • जमीन से जुड़े कानूनी दस्तावेज अधूरे रह जाते हैं
  • भविष्य में विवाद की आशंका बढ़ रही है

इससे यह स्पष्ट होता है कि यह सिर्फ राजस्व का मुद्दा नहीं, बल्कि रैयतों के अधिकार और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने आरोप लगाया कि—

  • अंचल कार्यालयों में कई बार आवेदन देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई
  • अधिकारियों की उदासीनता के कारण समस्या लगातार बनी हुई है
  • यह स्थिति प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है

संगठन का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो यह बड़े स्तर पर सामाजिक और कानूनी विवाद का कारण बन सकता है।

क्या है संगठन की मांग?

ज्ञापन में प्रशासन से निम्न मांगें की गई हैं—

✔️ संबंधित अंचल अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं
✔️ ऑनलाइन दर्ज खतियान के आधार पर तुरंत मालगुजारी वसूली शुरू हो
✔️ प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए
✔️ यदि किसी स्तर पर बाधा आ रही है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाए

ज्ञापन का महत्व

यह ज्ञापन न केवल रैयतों की समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

खास बात यह है कि—

  • जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड होना एक सकारात्मक पहल है
  • लेकिन उसका व्यावहारिक लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा

वृहद प्रभाव: स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो—

  • भूमि से जुड़े निवेश प्रभावित होंगे
  • स्थानीय आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं
  • लोगों का प्रशासन पर विश्वास कम हो सकता है

विश्लेषण (Analysis)

यह मामला झारखंड में जमीन प्रबंधन और डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।

एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया के तहत रिकॉर्ड ऑनलाइन कर रही है,
वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उसकी प्रक्रिया लागू नहीं हो पा रही है।

यदि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई करता है, तो—

  • रैयतों को राहत मिलेगी
  • जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे
  • प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी
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