
जमशेदपुर: जिले में पत्रकारों पर कथित फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाने और “फर्जी पत्रकार नेटवर्क” के मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन (AISMJWA) का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त राजीव रंजन से मिला और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय महासचिव प्रीतम सिंह भाटिया कर रहे थे। पत्रकारों ने उपायुक्त को बताया कि संगठन के जिला महासचिव आशीष गुप्ता के खिलाफ लगातार एससी-एसटी एक्ट के तहत कथित तौर पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो जिले में पत्रकारिता की आड़ में अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
“असली और नकली पत्रकारों” की पहचान बड़ा मुद्दा
राष्ट्रीय महासचिव प्रीतम सिंह भाटिया ने प्रशासन से कहा कि जिले में असली और नकली पत्रकारों की पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति बनती जा रही है। इसका असर उन पत्रकारों पर पड़ रहा है, जो जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में निजी हित साधने में लगे हुए हैं, जबकि वास्तविक पत्रकारों को प्रताड़ना और मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ऐसे तत्वों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्थिति प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
उपायुक्त ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा
पत्रकारों की बात सुनने के बाद उपायुक्त राजीव रंजन ने मामले की विस्तृत जानकारी ली और भरोसा दिलाया कि पूरे प्रकरण को वरीय पुलिस अधीक्षक के पास भेजकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन से यह भी मांग की गई कि पत्रकारिता की आड़ में अवैध गतिविधियां चलाने वाले लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
“कुछ लोग अपनी दुकानदारी बचाने में जुटे”
AISMJWA के जिला अध्यक्ष बिनोद सिंह ने कहा कि विडंबना यह है कि “फर्जी पत्रकारों” के खिलाफ आवाज उठाने वालों में ही कई ऐसे लोग शामिल हैं, जिनका पत्रकारिता से वास्तविक संबंध नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रशासन को भ्रमित कर “असली और नकली पत्रकार” का मुद्दा उछाल रहे हैं, जबकि उनका उद्देश्य अपनी “दुकानदारी” बचाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग पत्रकारों के खिलाफ माहौल बनाने और कथित फर्जी मुकदमे दर्ज कराने में पर्दे के पीछे से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
आशीष गुप्ता बोले — “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं”
जिला महासचिव आशीष गुप्ता ने पूरे मामले को अपने खिलाफ रची गई साजिश बताया। उन्होंने दावा किया कि जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में कथित अवैध कारोबारों और पत्रकारिता की आड़ में चल रही गतिविधियों को उजागर करने के बाद उन्हें निशाना बनाया गया।
उन्होंने कहा कि उनकी रिपोर्टिंग के बाद यूसील जैसी बड़ी कंपनी को कथित अवैध ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करनी पड़ी, जिसके बाद उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने की कोशिश शुरू हुई। आशीष गुप्ता ने कहा कि पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य वरीय अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं और जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
पत्रकारों ने चलाने का किया फैसला अभियान
बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने निर्णय लिया कि पत्रकारिता की आड़ में पेशे की छवि खराब करने वाले लोगों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। पत्रकारों ने कहा कि ऐसे सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा बनी रहे।
उपायुक्त से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में विपिन चंद्र पांडेय, धनंजय कुमार, नगेंद्र कुमार, मनोरंजन सिन्हा, चिंटू सिंह राजपूत, चरणजीत सिंह, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, देवेंद्र, सुजीत कुमार और अरूप कुमार सहित कई पत्रकार मौजूद रहे।











































