काठमांडू: Nepal में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान अभी पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है कि एक और गंभीर खतरा सामने आ गया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता बाधित होने से एक झील बन गई है। इस झील में लगातार पानी जमा हो रहा है और इसके अचानक टूटने की आशंका जताई जा रही है।
चीन और Nepal के अधिकारियों ने इस संभावित खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। आशंका है कि यदि प्राकृतिक रूप से बना यह जलाशय अचानक टूट गया, तो बड़ी मात्रा में पानी तेज गति से निचले इलाकों की ओर बह सकता है। इससे पहले से बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में एक और विनाशकारी स्थिति पैदा हो सकती है।
प्रशासन ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और राहत एवं बचाव कार्य में लगे कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
भूस्खलन से बनी झील बनी नई चिंता
नेपाल और तिब्बत सीमा के पास पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन के कारण बड़ी मात्रा में मलबा नदी में आ गया। इस मलबे ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोक दिया, जिसके बाद वहां पानी जमा होने लगा।
धीरे-धीरे जमा हुआ पानी एक बड़ी झील का रूप लेने लगा। ऐसी झील को प्राकृतिक रूप से बना अस्थायी जलाशय माना जाता है। इसका सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि यदि पानी का दबाव बढ़ जाए और मलबे से बना प्राकृतिक बांध टूट जाए, तो अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।
यही वजह है कि अधिकारियों ने इसे गंभीर खतरा मानते हुए निगरानी बढ़ा दी है।
लगातार बढ़ रहा है झील का जलस्तर
चीनी सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार, शुक्रवार सुबह तक इस झील में करीब 25 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था।
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को झील में लगभग 20 लाख घन मीटर पानी होने की जानकारी थी। इसके अलावा अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी जमा होने की आशंका जताई गई है।
यदि पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा और प्राकृतिक बांध कमजोर हुआ, तो झील के टूटने का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में अचानक पानी का तेज बहाव निचले क्षेत्रों में तबाही मचा सकता है।
झील फटी तो फिर आ सकती है विनाशकारी बाढ़
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण जब मलबा नदी के प्रवाह को रोक देता है, तो उसके पीछे पानी जमा होकर अस्थायी झील बना सकता है।
शुरुआत में यह झील सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन लगातार पानी जमा होने से मलबे पर दबाव बढ़ता जाता है। यदि यह प्राकृतिक अवरोध टूट जाता है, तो जमा पानी अचानक तेजी से नीचे की ओर बह सकता है।
इसे अचानक आने वाली बाढ़ की बेहद खतरनाक स्थिति माना जाता है। पानी के साथ मलबा, पत्थर और पेड़ भी नीचे की ओर बह सकते हैं, जिससे रास्ते, पुल, बस्तियां और अन्य ढांचे प्रभावित हो सकते हैं।
नेपाल पहले ही भारी बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। ऐसे में नई झील का बढ़ता जलस्तर प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा रहा है।
Nepal के आपदा प्राधिकरण ने भी जारी की चेतावनी
नेपाल के आपदा प्राधिकरण ने गुरुवार को संभावित खतरे को देखते हुए चेतावनी जारी की। प्राधिकरण ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नदी का प्रवाह मलबे के कारण बाधित हुआ है और इसके पीछे पानी लगातार जमा हो रहा है।
प्राधिकरण ने नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
इसके साथ ही यात्रियों और राहत एवं बचाव कार्य में जुटे कर्मचारियों से भी नदी के किनारे और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।
नदी किनारे रहने वालों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह
अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता नदी के निचले किनारों पर रहने वाली आबादी को लेकर है। यदि झील अचानक टूटती है तो पानी बहुत कम समय में निचले इलाकों तक पहुंच सकता है।
इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के आसपास या संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित स्थानों पर रहें।
बचाव दलों को भी नदी के किनारे काम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
चीन ने भी स्थिति को लेकर बढ़ाई निगरानी
नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इस क्षेत्र में चीन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। चीनी अधिकारियों और वैज्ञानिकों द्वारा झील में जमा हो रहे पानी तथा आसपास के भौगोलिक बदलावों की निगरानी की जा रही है।
इसका उद्देश्य संभावित खतरे का पहले से अनुमान लगाना और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।
प्राकृतिक बांध की स्थिति और झील के जलस्तर में होने वाले बदलाव को लगातार देखा जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते कदम उठाया जा सके।
499 ग्रामीणों और निर्माण श्रमिकों को सुरक्षित निकाला गया
सीसीटीवी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम चीन के शिजांग स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में भूस्खलन से प्रभावित 499 ग्रामीणों और निर्माण श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यदि झील का पानी अचानक टूटता है तो संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
555 पर्यटकों को भी सुरक्षित निकाला गया
चीन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में मौजूद 555 पर्यटकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार अब वहां कोई पर्यटक फंसा नहीं है। पर्यटकों को सुरक्षित निकालना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल था, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र में मौसम और भूस्खलन के कारण आवाजाही पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
समय रहते पर्यटकों को निकालने से संभावित खतरे के दौरान होने वाली परेशानी को कम किया जा सका है।
Nepal में बाढ़ से भारी तबाही
Nepal में आई विनाशकारी बाढ़ ने पहले ही बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। द हिमालयन की रिपोर्ट के अनुसार आठ जिलों में 547 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि 2,381 लोग लापता बताए गए हैं।
लापता लोगों में 644 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़क संपर्क, आवागमन और राहत कार्यों के सामने भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
अब नई झील के बढ़ते जलस्तर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
मृतकों की संख्या बढ़कर 547 हुई
Nepal में बाढ़ के बाद जारी तलाश और बचाव अभियान के दौरान अलग-अलग इलाकों से शव बरामद किए जाने के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 547 हो गई।
पुलिस के अनुसार अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं।
अलग-अलग जिलों से बरामद शव
- नवलपरासी पूर्व: 134 शव
- चितवन: 221 शव
- गोरखा: 46 शव
- नुवाकोट: 37 शव
- धादिंग: 33 शव
- तनहूं: 28 शव
- नवलपरासी पश्चिम: 27 शव
- रसुवा: 12 शव
इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के कई जिलों में कितना व्यापक असर डाला है।
तीसरे दिन भी जारी रहा राहत और बचाव अभियान
बाढ़ की घटना के तीसरे दिन भी नेपाल में बड़े स्तर पर तलाशी और बचाव अभियान जारी रहा। लापता लोगों की तलाश के लिए सुरक्षाबलों की बड़ी संख्या को लगाया गया है।
कुल 7,451 सुरक्षाकर्मियों को राहत एवं बचाव अभियान में तैनात किया गया है। इनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान भी शामिल हैं।
सुरक्षाकर्मी प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश, शवों की बरामदगी, लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के कार्य में जुटे हुए हैं।
भारतीय नागरिकों को लेकर भी भारत सक्रिय
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत सरकार भी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि वह आपदा से प्रभावित भारतीय नागरिकों के बचाव और निकासी के समन्वय के लिए नेपाल और चीन के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है।
भारतीय अधिकारियों का प्रयास है कि प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाई जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए।
वैज्ञानिकों की नजर संभावित खतरे पर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के पीछे पहाड़ पर स्थित ग्लेशियर के नदी में गिरने की संभावना जताई गई है। इसके बाद भूस्खलन और मलबे के कारण नदी का प्रवाह बाधित हुआ और पानी जमा होने लगा।
हालांकि, इस घटना के वास्तविक कारण और झील के भविष्य के खतरे का आकलन वैज्ञानिक निगरानी और विस्तृत जांच के आधार पर किया जाएगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात झील के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर रखना है।
लोगों से नदी और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील
Nepal के आपदा प्राधिकरण ने स्पष्ट रूप से लोगों को नदी के किनारे और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।
विशेषकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है तो पानी के तेज बहाव से लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए बहुत कम समय मिल सकता है।
इसलिए प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना और किसी भी तरह की अफवाह से बचना जरूरी है।
पहले बाढ़ की मार, अब झील टूटने का खतरा
नेपाल इस समय एक के बाद एक प्राकृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। पहले भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई और अब उसी आपदा के बाद बनी झील एक नए खतरे के रूप में सामने आई है।
एक तरफ राहत एवं बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन को संभावित नई बाढ़ से निपटने की तैयारी भी करनी पड़ रही है।
स्थिति पर नेपाल और चीन दोनों की नजर बनी हुई है। भारत भी अपने नागरिकों की सुरक्षा और निकासी के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के संपर्क में है।
Nepal में आई प्राकृतिक आपदा ने बड़ी संख्या में लोगों की जान ले ली है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। ऐसे समय में भूस्खलन से बनी झील का बढ़ता जलस्तर चिंता का नया कारण बन गया है। यदि यह प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है तो निचले इलाकों में दोबारा बड़े पैमाने पर बाढ़ आ सकती है।
फिलहाल प्रशासन संभावित खतरे को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है और झील के जलस्तर की निगरानी की जा रही है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। आने वाले कुछ दिन नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, क्योंकि एक ओर लापता लोगों की तलाश जारी है, वहीं दूसरी ओर संभावित नई बाढ़ के खतरे से निपटने की तैयारी भी की जा रही है।





























