
रांची, 23 अगस्त 2025। गरीब आदिवासी किसानों की जमीन की रक्षा को लेकर नगड़ी में संघर्ष तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में किसान संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने 24 अगस्त (रविवार) को “नगड़ी चलो” आंदोलन का आह्वान किया है।

“अस्पताल का विरोध नहीं, उपजाऊ जमीन की लूट का विरोध है” – चंपाई सोरेन
आंदोलन का उद्देश्य
किसान नेताओं ने साफ किया है कि उनका मकसद सरकार द्वारा प्रस्तावित रिम्स-2 अस्पताल का विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा –
“सरकार चाहे तो रिम्स-2 ही नहीं, रिम्स-3 और रिम्स-4 भी बना सकती है, इसके लिए स्मार्ट सिटी समेत कई स्थानों पर सैकड़ों एकड़ बंजर और खाली जमीन उपलब्ध है।”
लेकिन, किसानों ने चेतावनी दी है कि वे अपनी उपजाऊ/खेती योग्य जमीन छिनने का हर स्तर पर विरोध करेंगे।

क्यों है विरोध?
नगड़ी के आसपास की जमीन पीढ़ियों से गरीब आदिवासी किसान खेती के लिए इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इस जमीन से हजारों परिवारों की जीविका और खाद्यान्न उत्पादन जुड़ा है।
आंदोलनकारी कहते हैं कि अगर यही जमीन छिनी गई तो किसान न सिर्फ आजीविका से वंचित होंगे बल्कि उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ें भी प्रभावित होंगी।
चंपाई सोरेन का आह्वान
पूर्व मुख्यमंत्री और BJP नेता चंपाई सोरेन ने भी किसानों के इस संघर्ष को समर्थन देते हुए लोगों से 24 अगस्त को नगड़ी पहुंचने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि –
“नगड़ी की लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि आदिवासियों की अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई है। सरकार को किसानों की जमीन छीनने का कोई हक नहीं है।”
जनता से अपील
किसान संगठनों ने रांची और आसपास के लोगों से अपील की है कि वे 24 अगस्त को नगड़ी पहुंचकर इस “जमीन बचाओ आंदोलन” में शामिल हों। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ नगड़ी के किसानों की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है।









































