
📍 जमशेदपुर: सफाई व्यवस्था की बदहाली और लगातार मिल रही जन शिकायतों के बाद विधायक सरयू राय ने सोमवार को सोनारी स्थित मिनी डिपो का एक बार फिर औचक निरीक्षण किया। यह इस हफ्ते का उनका दूसरा दौरा था, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं दिखा।

👷 20 मजदूर ही मिले, सुपरवाइजर फिर गायब
निरीक्षण के दौरान डिपो पर सिर्फ 20 मजदूर मौजूद थे। सुपरवाइजर गायब था और जेएनएसी (जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमिटी) की ओर से भी कोई निगरानी में नहीं था। विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा:
“जेएनएसी ठेकेदारों को सफाई का ठेका देकर खुद सो गया है। ना उपस्थिति रजिस्टर है, ना निगरानी तंत्र। पिछले निरीक्षण में भी यही हाल था।”
— सरयू राय, विधायक
📋 रजिस्टर तक नहीं, कौन कहां गया—किसी को नहीं पता
विधायक ने मौके पर मौजूद मुंशी से पूछा कि डोर-टू-डोर सफाई के लिए कितने मजदूर भेजे गए हैं और कहां। लेकिन मुंशी यह स्पष्ट नहीं बता सका। न तो मजदूरों के नाम बताए जा सके, न इलाके और न ही यह कि वे किस वाहन से गए हैं।
“विडंबना यह है कि ठेकेदार बदलते हैं, लेकिन मुंशी वही रहता है। ऐसे में पारदर्शिता की कोई गुंजाइश नहीं रहती।“

🧾 सवाल उठे मजदूरों की हाजिरी पर
सरयू राय ने यह भी जानना चाहा कि गैरहाजिर मजदूरों की भी हाजिरी काटी जाती है या पूरे पैसे दिए जाते हैं? इस पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला।
⚠️ जेएनएसी पर उठे सवाल, ठेकेदार बदलने की मांग
विधायक ने कहा कि उप नगर आयुक्त को सुनिश्चित करना होगा कि मिनी डिपो पर जेएनएसी का कोई जिम्मेदार अधिकारी हर दिन मौजूद रहे। यदि यही स्थिति रही तो:
“ठेकेदार मनमानी करते रहेंगे, सफाई व्यवस्था यूं ही लचर रहेगी, और मोहल्लों की गलियों में कचरा बिखरा रहेगा। ऐसे ठेकेदार को तत्काल बदला जाना चाहिए।“
👥 जन प्रतिनिधियों का मिला साथ
निरीक्षण के दौरान जनसुविधा प्रतिनिधि मुकुल मिश्रा, प्रशांत पोद्दार, अशोक सिंह, प्रदीप सिंह, महेंद्र यादव, बाबू सिंह, नरेश बागती, संजय रजक, रवि शर्मा, संजय मुंडा समेत दर्जनों स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।
📌 विशेष बिंदु:
- हफ्ते में दूसरी बार निरीक्षण
- मजदूरों की संख्या कम, सुपरवाइजर अनुपस्थित
- उपस्थिति रजिस्टर तक नहीं
- जेएनएसी और ठेकेदार पर गंभीर सवाल
- ठेकेदार बदलने की मांग
- जनता के सहयोग से दबाव बढ़ाने की चेतावनी
निष्कर्ष: यह मामला सिर्फ एक डिपो की लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी नींद का संकेत है। विधायक सरयू राय की सक्रियता और जनता की शिकायतों ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जनदबाव और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों जरूरी हैं।











































