जमशेदपुर: Kadma मासूम हाथों की कलाकारी, रिश्तों के प्रति गहरा स्नेह और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान—इन सभी भावनाओं का खूबसूरत संगम गुरुवार को DBMS इंग्लिश स्कूल, कदमा के प्रांगण में देखने को मिला। स्कूल में भारत सरकार और इंडिया पोस्ट (India Post) की विशेष पहल के तहत रक्षाबंधन के अवसर पर राखी मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन में विद्यालय के 102 बच्चों ने उत्साह और उमंग के साथ हिस्सा लिया।
रक्षाबंधन की परंपरा को बच्चों ने दिया नया रंग
रक्षाबंधन भारत के प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के भाव को मजबूत करता है। बदलते समय और डिजिटल युग में जहां शुभकामनाएं कुछ सेकंड में मोबाइल फोन के जरिए पहुंच जाती हैं, वहीं हाथ से राखी बनाकर उसे डाक के माध्यम से अपने भाई तक भेजने की पहल ने बच्चों को रिश्तों की पुरानी और भावनात्मक परंपरा से जोड़ने का काम किया।
DBMS इंग्लिश स्कूल में आयोजित राखी मेकिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी Creativity का शानदार प्रदर्शन किया। किसी ने रंग-बिरंगे धागों से राखी तैयार की तो किसी ने मोती, कागज, सजावटी सामग्री और अन्य चीजों का इस्तेमाल कर आकर्षक राखियां बनाईं।
102 बच्चों ने लिया प्रतियोगिता में हिस्सा
इस विशेष कार्यक्रम में विद्यालय के कुल 102 विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों में प्रतियोगिता को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने न सिर्फ राखियां बनाईं, बल्कि उन्हें तैयार करते समय अपने भाई-बहनों और परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी भावनाओं को भी व्यक्त किया।
बच्चों की बनाई गई राखियों में उनकी Creativity के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और पारिवारिक रिश्तों की झलक दिखाई दी। कई बच्चों ने अपनी राखियों को बेहद आकर्षक और अलग अंदाज में तैयार किया।
हाथ से बनी राखियों में दिखा अपनापन
बाजार में उपलब्ध अलग-अलग डिजाइन की राखियों के बीच बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार की गई राखियों की अपनी अलग खासियत रही। इन राखियों में सिर्फ रंग और सजावट नहीं थी, बल्कि बच्चों का प्यार और भावनाएं भी जुड़ी थीं।
राखी बनाते समय बच्चों ने बताया कि अपने हाथों से किसी खास व्यक्ति के लिए कुछ तैयार करने का अनुभव बेहद खास है। यही वजह रही कि प्रतियोगिता के दौरान बच्चों में लगातार उत्साह देखने को मिला।
आरुषी नूरानी ने मामू के लिए बनाई राखी
प्रतियोगिता में शामिल छात्रा आरुषी नूरानी ने बताया कि वह अपने हाथों से बनाई गई राखी बैंगलोर में रहने वाले अपने मामू के लिए तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि राखी को खुद बनाकर अपने परिवार के सदस्य तक पहुंचाने का अनुभव उनके लिए काफी खास है।
आरुषी की तरह कई अन्य बच्चों ने भी अपने परिवार के उन सदस्यों के लिए राखियां तैयार कीं, जो उनसे दूर रहते हैं।

इंडिया पोस्ट के जरिए पंजाब पहुंचेगी राखी
विद्यालय की छात्राओं वैष्णवी कश्यप और माहरूख मिहिन ने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई राखियां इंडिया पोस्ट के माध्यम से पंजाब में रहने वाले उनके भाइयों तक पहुंचाई जाएंगी।
बच्चियों ने कहा कि भाई उनसे दूर हैं, लेकिन उनके हाथों से बनाई गई राखी डाक के जरिए जब उनके भाइयों तक पहुंचेगी तो दूरी के बावजूद प्यार और अपनापन महसूस होगा।
डिजिटल दौर में डाक सेवा की याद दिलाती पहल
आज के समय में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और Instant Messaging के कारण लोगों के बीच संदेश भेजना बेहद आसान हो गया है। कुछ ही सेकंड में WhatsApp या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए Raksha Bandhan की शुभकामनाएं भेजी जा सकती हैं।
ऐसे समय में इंडिया पोस्ट की यह पहल बच्चों को पारंपरिक डाक व्यवस्था से जोड़ने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि हाथ से लिखे पत्र और हाथ से बनाई गई राखी का भावनात्मक महत्व आज भी कायम है।
बच्चों ने इंडिया पोस्ट का जताया आभार
प्रतियोगिता में शामिल बच्चों ने इस पहल के लिए इंडिया पोस्ट का आभार जताया। बच्चों का कहना था कि डाक सेवा के माध्यम से वे अपनी बनाई हुई राखियां उन भाइयों और परिवार के सदस्यों तक भेज सकते हैं, जो दूसरे शहर या राज्य में रहते हैं।
इस पहल ने बच्चों के लिए रक्षाबंधन को सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर भी बना दिया।
शिक्षकों ने बताया संस्कृति से जोड़ने का माध्यम
विद्यालय की शिक्षिकाओं ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आज की तेज रफ्तार और डिजिटल दुनिया में बच्चों को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों से जोड़ना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हाथ से राखी बनाना बच्चों को Creativity के साथ-साथ रिश्तों की अहमियत समझने का अवसर देता है। इसके अलावा डाक के माध्यम से राखी भेजने से बच्चों को यह भी समझने का मौका मिलता है कि तकनीक के दौर से पहले लोग किस तरह अपने प्रियजनों तक संदेश और भावनाएं पहुंचाते थे।
प्रशासनिक सदस्यों ने भी की पहल की सराहना
विद्यालय के प्रशासनिक सदस्यों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं को समझने और उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार और इंडिया पोस्ट की यह पहल भारतीय संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है।
रक्षाबंधन के साथ देशभक्ति का भाव
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें केवल भाई-बहन के रिश्ते की भावना ही नहीं, बल्कि देश की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान भी देखने को मिला।
बच्चों ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारतीय त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं हैं, बल्कि वे हमें परिवार, रिश्तों, संस्कार और अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।
बच्चों की Creativity को मिला मंच
राखी मेकिंग प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी Creativity दिखाने का एक शानदार मंच दिया। अलग-अलग रंगों और डिजाइन की राखियों के माध्यम से बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति का परिचय दिया।
किसी राखी में रंगों का सुंदर संयोजन देखने को मिला तो किसी में मोतियों और सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया गया। बच्चों ने पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ कुछ Modern Designs भी तैयार किए।
रिश्तों की अहमियत समझाने वाली पहल
इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल महंगे उपहार या डिजिटल Messages की जरूरत नहीं होती। कई बार अपने हाथों से बनाई गई एक छोटी-सी चीज भी सामने वाले के लिए बेहद खास बन जाती है।
बच्चों द्वारा तैयार की गई राखियों में यही भाव साफ दिखाई दिया। उनके लिए राखी सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक रही।
DBMS इंग्लिश स्कूल, कदमा में आयोजित राखी मेकिंग प्रतियोगिता ने रक्षाबंधन के त्योहार को एक अलग और भावनात्मक रंग दिया। 102 बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बनाया। बच्चों ने अपनी Creativity के जरिए सुंदर राखियां तैयार कीं और उन्हें दूर रहने वाले अपने भाइयों तक इंडिया पोस्ट के माध्यम से पहुंचाने की तैयारी की।
बैंगलोर से लेकर पंजाब तक रहने वाले परिवार के सदस्यों के लिए तैयार की गई इन राखियों ने यह साबित किया कि दूरी चाहे कितनी भी हो, प्यार और अपनापन हमेशा अपने प्रियजनों तक पहुंच सकता है।
डिजिटल दौर में हाथ से बनाई गई राखी और डाक सेवा के जरिए उसे भेजने की यह पहल भारतीय परंपरा, आधुनिकता और भावनाओं के बीच एक खूबसूरत पुल के रूप में सामने आई। DBMS कदमा का यह आयोजन बच्चों को प्यार, रिश्तों, Creativity, भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने वाला यादगार प्रयास बन गया।

























