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Nepal फ्लैश फ्लड पर MEA की बड़ी अपडेट

On: August 28, 2026 7:45 PM
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नई दिल्ली: Nepal में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक 552 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 1,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ नेपाल में राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है।

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विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल और चीन में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों और लगभग 100 भारतीय मूल के लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं चीन की ओर करीब 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। भारत सरकार इन सभी लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।

नेपाल में तबाही के बाद भारत का राहत अभियान तेज

Nepal में फ्लैश फ्लड के बाद कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अचानक आई बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई क्षेत्रों में संपर्क एवं आवाजाही की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

आपदा के बाद भारत ने राहत एवं बचाव अभियान को प्राथमिकता दी है। भारत की ओर से नेपाल में राहत सामग्री भेजने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय अधिकारी स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं, ताकि प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीय नागरिकों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।

चीन की तरफ करीब 400 भारतीय सुरक्षित

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि चीन की तरफ करीब 400 भारतीय नागरिक मौजूद हैं और सभी फिलहाल सुरक्षित हैं

इनमें से कई भारतीय नागरिक अपने परिवारों के संपर्क में भी हैं। भारतीय दूतावास इन लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और उनकी स्थिति पर नजर रख रहा है।

बताया गया कि चीन में मौजूद भारतीय नागरिकों के परिवारों ने भी भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क किया है। इससे उनके परिजनों को अपने लोगों की स्थिति की जानकारी मिल रही है और उन्हें राहत मिली है।

भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में

चीन की तरफ फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है।

भारत सरकार का प्रयास है कि वहां मौजूद भारतीय नागरिकों को सुरक्षित तरीके से निकाला जाए और उन्हें आगे की यात्रा के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारतीय अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

Nepal के लिए भारत ने भेजी राहत सामग्री

Nepal में आपदा की स्थिति सामने आने के बाद भारत ने मानवीय सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया तेजी से शुरू की।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 26 अगस्त की शाम पहला विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ। इस विमान के जरिए लगभग 10 टन राहत सामग्री भेजी गई।

इस राहत सामग्री में आपदा प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं।

पहली खेप में क्या-क्या भेजा गया?

पहली खेप में मुख्य रूप से—

  • अस्थायी शेल्टर
  • कंबल
  • हाइजीन किट
  • सोलर लैंप
  • दवाइयां

जैसी आवश्यक सामग्री भेजी गई।

इस सहायता का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराना और मुश्किल परिस्थितियों में उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।

27 अगस्त को भेजी गई 37.5 टन राहत सामग्री

पहली खेप के बाद भारत ने राहत अभियान को और तेज किया। 27 अगस्त की सुबह करीब 10:30 बजे दूसरा विमान नेपाल के लिए रवाना हुआ।

इस विमान के जरिए करीब 37.5 टन राहत सामग्री भेजी गई। इस तरह भारत की ओर से नेपाल को भेजी गई राहत सामग्री की मात्रा में तेजी से वृद्धि हुई।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता भेजने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।

तीसरी राहत उड़ान भेजने की तैयारी

नेपाल में लगातार बनी आपदा की स्थिति को देखते हुए भारत की ओर से तीसरी राहत उड़ान भेजने पर भी विचार किया गया। इसका उद्देश्य प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक राहत सामग्री की आपूर्ति को जारी रखना है।

भारत की ओर से यह सहायता ऐसे समय में पहुंचाई जा रही है, जब नेपाल के कई हिस्से प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में लोगों को तत्काल राहत की जरूरत है।

21 भारतीय नागरिक सुरक्षित दिल्ली पहुंचे

नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान के बीच भारतीय नागरिकों के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाके से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक अब सुरक्षित दिल्ली पहुंच गए हैं

बताया गया कि ये सभी 21 नागरिक तमिलनाडु से हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकलकर काठमांडू पहुंचने के बाद उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई।

भारतीय राजदूत ने काठमांडू में की मुलाकात

दिल्ली पहुंचने से पहले भारतीय राजदूत ने काठमांडू में इन 21 भारतीय नागरिकों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली।

इस दौरान अधिकारियों ने उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति को समझा तथा उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई।

इसके बाद इन नागरिकों को सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचाया गया। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान की सफलता का एक उदाहरण सामने आया है।

त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 63 भारतीय भी सुरक्षित

नेपाल में त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन 63 भारतीय नागरिकों को 27 अगस्त को रेस्क्यू किया गया।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले इन लोगों को सुरक्षित निकाले जाने के बाद भारतीय अधिकारियों के लिए राहत की खबर सामने आई। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा भी राहत एवं बचाव अभियान की प्राथमिकताओं में शामिल रही।

चीन की तरफ से 96 भारतीय नेपाल पहुंचे

विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से जमीन के रास्ते नेपाल पहुंच गए हैं

इन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित नेपाल लाने के बाद अब उन्हें वहां से आगे निकालने की कोशिश की जा रही है।

भारतीय अधिकारी इन नागरिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और उनकी आगे की यात्रा को सुगम बनाने के लिए आवश्यक समन्वय कर रहे हैं।

320 भारतीयों से अब भी संपर्क नहीं

नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों को लेकर राहत की खबरों के साथ चिंता भी बनी हुई है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। इन्हें फिलहाल लापता या संपर्क से बाहर माना जा रहा है।

इन लोगों का पता लगाने के लिए भारतीय अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर संभावित स्थानों तथा उपलब्ध सूचनाओं की जांच की जा रही है।

परिजनों को भी अपने लोगों की जानकारी मिलने का इंतजार है। सरकार की कोशिश है कि संपर्क से बाहर चल रहे सभी भारतीय नागरिकों के बारे में जल्द से जल्द जानकारी हासिल की जाए।

करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी संपर्क से बाहर

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी अभी संपर्क से बाहर हैं।

बताया गया कि इनमें से कुछ लोग संभवतः कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। हालांकि, उनके पास अन्य देशों की नागरिकता है। इसलिए उन्हें भारतीय नागरिकों के आंकड़े से अलग रखा जा रहा है।

भारतीय मूल के इन लोगों के संबंध में भी स्थिति की जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

नेपाल में 552 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 552 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के कारण राहत और बचाव एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालना, राहत सामग्री पहुंचाना और लापता लोगों की तलाश करना प्राथमिकता बनी हुई है।

भारत ने नागरिकों की सुरक्षित वापसी को बनाया प्राथमिकता

नेपाल और चीन में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। एक तरफ नेपाल में राहत सामग्री भेजी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीयों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

21 भारतीयों की दिल्ली वापसी और त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट से 63 भारतीयों के रेस्क्यू के बाद कई परिवारों को राहत मिली है। चीन की तरफ मौजूद करीब 400 भारतीयों की सुरक्षा की जानकारी भी महत्वपूर्ण है।

हालांकि, 320 भारतीयों और करीब 100 भारतीय मूल के लोगों से संपर्क नहीं होने के कारण अभियान अभी जारी है।

राहत और बचाव कार्य पर भारत की नजर

भारत की ओर से Nepal में राहत सामग्री की आपूर्ति और भारतीय नागरिकों की निकासी के प्रयास लगातार जारी हैं। विदेश मंत्रालय स्थानीय प्रशासन, भारतीय दूतावासों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर स्थिति पर नजर रख रहा है।

फ्लैश फ्लड जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की प्राथमिकता प्रभावित भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालना और जरूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाना है। आने वाले समय में संपर्क से बाहर लोगों के बारे में और जानकारी मिलने तथा राहत एवं बचाव अभियान के आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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