भारत: अगर आप पहली बार वोटर बनने जा रहे हैं या फिर अपना नाम मतदाता सूची Voter List में जुड़वाने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) ने ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब ऑनलाइन Form-6 भरने वाले आवेदकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी से जुड़ी SIR (Special Intensive Revision) की जानकारी भी देनी होगी।
इस नए बदलाव के बाद पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं को आवेदन करते समय कुछ अतिरिक्त जानकारी भरनी होगी। हालांकि, यह नियम फिलहाल केवल ऑनलाइन आवेदन करने वालों पर लागू किया गया है। ऑफलाइन आवेदन करने वाले लोगों के लिए अभी तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग ने ऑनलाइन प्रक्रिया में किया अहम बदलाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने ECINET पोर्टल पर ऑनलाइन Form-6 को अपडेट किया है। इस अपडेट के तहत आवेदन फॉर्म में नया डिक्लेरेशन सेक्शन जोड़ा गया है, जिसमें आवेदक को अपने परिवार के पुराने वोटर रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी देनी होगी।
इस बदलाव का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, इस नए नियम को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं, खासकर उन परिवारों को लेकर जिनके पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।
क्या होता है Form-6?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Form-6 आखिर है क्या।
Form-6 वह आवेदन पत्र है जिसके माध्यम से—
- 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक पहली बार वोटर बनने के लिए आवेदन करते हैं।
- जिनका नाम किसी कारणवश मतदाता सूची से हट गया हो, वे दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
- नए निवास स्थान पर वोटर सूची में नाम जोड़ने के लिए भी Form-6 का उपयोग किया जाता है।
अब इसी Form-6 के ऑनलाइन संस्करण में नया डिक्लेरेशन जोड़ा गया है।
ऑनलाइन Form-6 में क्या नया जोड़ा गया?
चुनाव आयोग ने 11 जुलाई को ऑनलाइन पोर्टल पर Form-6 में नया डिक्लेरेशन सेक्शन शामिल किया है।
अब आवेदन करने वाले व्यक्ति को Form-6 के J और K सेक्शन में दिए गए तीन विकल्पों में से किसी एक का चयन करना होगा। इसके साथ ही, कुछ मामलों में माता-पिता या दादा-दादी के पुराने वोटर रिकॉर्ड की जानकारी भी देनी होगी।
इस बदलाव के बाद ऑनलाइन आवेदन पहले की तुलना में थोड़ा अधिक विस्तृत हो गया है।
आवेदक को चुनने होंगे ये तीन विकल्प
नए ऑनलाइन Form-6 में आवेदक को निम्नलिखित विकल्पों में से किसी एक का चयन करना होगा—
1. यदि आवेदक का नाम पहले की SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची में शामिल था
यदि पहले किसी विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान आवेदक का नाम मतदाता सूची में था, तो उससे संबंधित जानकारी भरनी होगी।
2. यदि आवेदक का नाम नहीं था लेकिन माता-पिता या दादा-दादी का नाम मतदाता सूची में था
इस स्थिति में आवेदक को अपने माता-पिता या दादा-दादी का विवरण देना होगा। साथ ही संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ संख्या तथा सीरियल नंबर भी दर्ज करना होगा।
3. यदि किसी प्रकार की जानकारी उपलब्ध नहीं है
यदि आवेदक के पास पुराने वोटर रिकॉर्ड, EPIC नंबर या SIR से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो वह तीसरा विकल्प चुन सकता है।
यानी जिन लोगों के पास पुराने रिकॉर्ड नहीं हैं, उनके लिए भी आवेदन का रास्ता खुला रहेगा।
क्या भरनी होगी SIR से जुड़ी जानकारी?
पहले दो विकल्प चुनने वाले आवेदकों को निम्न जानकारी देनी होगी—
- विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (Assembly Constituency)
- बूथ संख्या (Booth Number)
- माता-पिता या दादा-दादी का नाम
- SIR के दौरान मिला सीरियल नंबर
यह सीरियल नंबर वर्ष 2000 की SIR प्रक्रिया या हाल ही में कुछ राज्यों में हुए विशेष पुनरीक्षण के दौरान जारी किया गया था।
SIR क्या है और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट को अपडेट करता है।
इस प्रक्रिया के दौरान मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं।
हाल के वर्षों में कई राज्यों में SIR अभियान चलाया गया, जिसके बाद लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए। इसी वजह से अब नए नियम को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटने के बाद उठे सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।
इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि यदि किसी परिवार के माता-पिता या दादा-दादी का नाम पुराने रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होगा, तो क्या नई पीढ़ी के लोगों को वोटर बनने में कठिनाई होगी?
हालांकि, ऑनलाइन फॉर्म में तीसरा विकल्प दिए जाने से ऐसे आवेदकों के लिए आवेदन की सुविधा बनी हुई है।
ऑफलाइन आवेदन करने वालों के लिए क्या नियम है?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यह बदलाव केवल ऑनलाइन Form-6 में किया गया है।

यदि कोई व्यक्ति ऑफलाइन Form-6 भरकर आवेदन करता है, तो उसके लिए पहले जैसी प्रक्रिया ही लागू रहेगी।
यानी ऑफलाइन आवेदन करने वाले लोगों को अतिरिक्त डिक्लेरेशन भरने की आवश्यकता नहीं है।
पहली बार आवेदन करने वाले रखें इन बातों का ध्यान
यदि आप पहली बार वोटर बनने जा रहे हैं, तो आवेदन से पहले कुछ तैयारियां कर लें—
- परिवार के पुराने वोटर कार्ड की जानकारी रखें।
- यदि उपलब्ध हो तो EPIC नंबर नोट कर लें।
- विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र की जानकारी जुटा लें।
- आवेदन के समय सभी दस्तावेज सही रखें।
- यदि पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, तो ऑनलाइन फॉर्म में दिए गए उपयुक्त विकल्प का चयन करें।
सही जानकारी देने से आवेदन प्रक्रिया आसान हो जाएगी और भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
क्या पुराने रिकॉर्ड न होने पर आवेदन रुक जाएगा?
नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यदि किसी आवेदक के पास माता-पिता या दादा-दादी के पुराने वोटर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, तो वह ऑनलाइन Form-6 में दिए गए तीसरे विकल्प का चयन कर सकता है।
इसलिए ऐसे लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, आवेदन करते समय सही और सत्य जानकारी देना आवश्यक होगा।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ऑनलाइन Form-6 में किया गया यह नया बदलाव पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। अब ऑनलाइन आवेदन के दौरान कई मामलों में माता-पिता या दादा-दादी की SIR हिस्ट्री से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी। हालांकि, जिन लोगों के पास पुराने वोटर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए भी आवेदन की सुविधा जारी रहेगी। यदि आप जल्द ही वोटर आईडी बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन से पहले परिवार के पुराने वोटर रिकॉर्ड, EPIC नंबर और विधानसभा क्षेत्र की जानकारी जुटा लेना आपके लिए लाभदायक रहेगा।


















