
जमशेदपुर: शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान Karim सिटी कॉलेज के उर्दू विभाग और साहित्यिक संस्था उर्दू भवन, जमशेदपुर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को मशहूर शायर एवं साहित्यकार राशिद अनवर राशिद की स्मृति में एक भव्य साहित्यिक सभा “याद-ए-राशिद” का आयोजन किया गया। मानगो स्थित करीम सिटी कॉलेज के मल्टीपर्पस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शायरों, पत्रकारों और उर्दू साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राशिद अनवर राशिद के शेरी मजमुए “एक क़तरा ही सही…” का विमोचन रहा। इसके साथ ही वरिष्ठ शायर अनवर अदीब को सम्मानित किया गया, जबकि युवा शायर सद्दाम गनी को प्रतिष्ठित “राशिद अनवर राशिद अवॉर्ड” से नवाजा गया।
राशिद अनवर राशिद की स्मृति को समर्पित रही पूरी साहित्यिक संध्या
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक साहित्यिक आयोजन करना नहीं था, बल्कि उर्दू अदब की उस विरासत को याद करना भी था, जिसे राशिद अनवर राशिद ने अपने लेखन और शायरी से समृद्ध बनाया। पूरे आयोजन में उनकी रचनाओं, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राशिद अनवर राशिद की शायरी में इंसानियत, संवेदनशीलता, प्रेम, सामाजिक सरोकार और जीवन के विविध रंगों की गहरी झलक मिलती है। उनकी रचनाएं आज भी नई पीढ़ी के साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
‘एक क़तरा ही सही…’ शेरी मजमुए का हुआ विमोचन
सभा के दौरान राशिद अनवर राशिद के शेरी संग्रह “एक क़तरा ही सही…” का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों ने कहा कि यह संग्रह उर्दू साहित्य के पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर साबित होगा।
वक्ताओं ने बताया कि इस पुस्तक में शामिल शायरी जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत करती है। विमोचन के दौरान उपस्थित लोगों ने पुस्तक का गर्मजोशी से स्वागत किया।
अनवर अदीब की अध्यक्षता में संपन्न हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर के प्रख्यात शायर अनवर अदीब ने की। वहीं, रूही अंजुम बेगम, जो राशिद अनवर राशिद की पत्नी हैं और अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) से विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुईं, मुख्य अतिथि रहीं।
इसके अलावा डॉ. मुहम्मद रेयाज़, प्राचार्य, करीम सिटी कॉलेज ने गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में कॉलेज प्रशासन, शिक्षकों, छात्रों और शहर के अनेक साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
मुख्य वक्ताओं ने बताया राशिद अनवर राशिद का साहित्यिक योगदान
कार्यक्रम में डॉ. मुहम्मद ज़कारिया, शिक्षा निदेशक, करीम्स ट्रस्ट एवं सचिव, करीम सिटी कॉलेज तथा डॉ. सैयद मुहम्मद यहिया इब्राहीम, अध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, करीम सिटी कॉलेज ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।
दोनों वक्ताओं ने राशिद अनवर राशिद के जीवन, साहित्यिक यात्रा और उर्दू भाषा के प्रति उनके समर्पण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राशिद अनवर राशिद केवल एक शायर नहीं, बल्कि समाज और साहित्य के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखने वाले संवेदनशील व्यक्तित्व थे।
उन्होंने नई पीढ़ी से आग्रह किया कि वह ऐसे साहित्यकारों की रचनाओं का अध्ययन करे और उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाए।
उर्दू भवन के अध्यक्ष ने किया सभी अतिथियों का स्वागत
उर्दू भवन, जमशेदपुर के अध्यक्ष डॉ. हसन इमाम मल्लिक ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, शायरों, लेखकों, शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत किया।
अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा कि राशिद अनवर राशिद ने अपने व्यावहारिक जीवन की शुरुआत करीम सिटी कॉलेज से की थी। उन्होंने कहा कि वे न केवल एक उत्कृष्ट लेखक और शायर थे, बल्कि अपने व्यवहार और व्यक्तित्व से भी लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखते थे।
उन्होंने कहा कि ऐसे महान साहित्यकार को याद करना केवल नैतिक दायित्व नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए गर्व की बात है।
रूही अंजुम के भावुक संबोधन ने सभी को किया भाव-विभोर
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रूही अंजुम ने अपने संबोधन में अपने पति राशिद अनवर राशिद के व्यक्तित्व, उनके सरल स्वभाव और जीवन के अंतिम दिनों की यादों को साझा किया।
उन्होंने बताया कि साहित्य उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा था और अंतिम समय तक वे लेखन और शायरी से जुड़े रहे। उनके भावनात्मक शब्दों ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया।
सभा में कई लोगों की आंखें नम हो गईं और उपस्थित साहित्यकारों ने खड़े होकर उन्हें सम्मान दिया।
बेटी जवेरिया अंजुम ने सुनाए पिता के शेर
कार्यक्रम का एक अत्यंत भावुक क्षण तब आया जब राशिद अनवर राशिद की बेटी जवेरिया अंजुम ने अपने पिता की लिखी हुई ग़ज़लों और शेरों का पाठ किया।
उनकी प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन किया और राशिद अनवर राशिद की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने की उनकी भावना की प्रशंसा की।
अनवर अदीब और सद्दाम गनी को मिला सम्मान
इस अवसर पर उर्दू साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ शायर अनवर अदीब को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
वहीं, युवा शायर सद्दाम गनी को उनके साहित्यिक योगदान और उभरती प्रतिभा के लिए “राशिद अनवर राशिद अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें बेहतर साहित्य सृजन के लिए और अधिक प्रेरित करेगा।
अध्यक्षीय संबोधन में अनवर अदीब ने साझा की यादें
कार्यक्रम के समापन अवसर पर अध्यक्षीय संबोधन देते हुए अनवर अदीब ने कहा कि राशिद अनवर राशिद उनके सबसे प्रिय शायरों में से एक थे।
उन्होंने कहा कि उनकी शायरी में जीवन का दर्शन, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यकार कभी भुलाए नहीं जा सकते और उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेंगी।
शहर की कई जानी-मानी हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यक्रम में प्रसिद्ध शायर असलम बद्र, अर्का जैन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. सफदर रज़ी, उर्दू विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर सीमा जाबीं, वरिष्ठ पत्रकार शाकिर अज़ीमाबादी सहित शहर की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया।
इसके अलावा बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों, छात्रों, साहित्यकारों और उर्दू प्रेमियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शहबाज़ अंसारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन समाज में भाषा, संस्कृति और साहित्य के प्रति नई पीढ़ी को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
करीम सिटी कॉलेज और उर्दू भवन, जमशेदपुर द्वारा आयोजित “याद-ए-राशिद” केवल एक साहित्यिक सभा नहीं, बल्कि उर्दू अदब की समृद्ध परंपरा को सम्मान देने का एक भावपूर्ण प्रयास था। राशिद अनवर राशिद की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महान साहित्यकार भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न रहें, लेकिन उनकी रचनाएं और विचार हमेशा समाज को दिशा देते रहेंगे। वरिष्ठ शायर अनवर अदीब का सम्मान और युवा शायर सद्दाम गनी को “राशिद अनवर राशिद अवॉर्ड” प्रदान किया जाना भी इस बात का प्रतीक है कि साहित्य की परंपरा नई पीढ़ी तक निरंतर आगे बढ़ रही है।






































