
लखनऊ: उत्तर प्रदेश Police सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद चर्चित आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने अपनी बर्खास्तगी पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पुलिस विभाग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

दूसरी ओर, लखनऊ पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई विभागीय जांच में सोशल मीडिया के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और सरकारी सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप सिद्ध होने के बाद की गई है।
बर्खास्तगी के बाद वीडियो में क्या बोले सुनील शुक्ला?
वीडियो की शुरुआत में सुनील शुक्ला एक शायरी पढ़ते हुए कहते हैं—
“लिखा प्रदेश किस्मत में तो वतन को याद क्या करना, जहां बेदर्द हो हाकिम, वहां पर याद क्या करना। जय हिंद… वंदे मातरम्।”
इसके बाद उन्होंने कहा कि 28 जून को उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस कार्रवाई से कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि उनके अनुसार उन्हें पहले से इसकी आशंका थी।
वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा पर भी साधा निशाना
सुनील शुक्ला ने अपने वीडियो में भारतीय जनता पार्टी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन उनके अनुसार अब पार्टी पहले जैसी नहीं रही।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार और समाज को इस घटना को याद रहेगा। वीडियो में उन्होंने भाजपा के लिए विवादित टिप्पणी करते हुए “ईस्ट इंडिया बीजेपी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया।
यह टिप्पणी पूरी तरह सुनील शुक्ला का व्यक्तिगत बयान है, जिस पर भाजपा की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे और कार्रवाई की आशंका भी जताई
वीडियो में सुनील शुक्ला ने दावा किया कि उनके खिलाफ भविष्य में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी हो सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज होता है तो उसे एक साजिश के रूप में देखा जाना चाहिए।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
क्यों हुई बर्खास्तगी? पुलिस ने बताया कारण
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सुनील कुमार शुक्ला के खिलाफ विभागीय जांच कराई गई थी।
पुलिस के अनुसार जांच में निम्न आरोप सिद्ध पाए गए—
- सोशल मीडिया और मीडिया मंचों का अनुचित उपयोग।
- विभागीय अनुशासनहीनता।
- सरकारी सेवा नियमों का लगातार उल्लंघन।
- बिना अनुमति सार्वजनिक मंचों पर विभाग से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करना।
जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।
7 मई को गठित हुई थी जांच समिति
पुलिस के अनुसार, 7 मई 2026 को इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी।
समिति ने संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। साथ ही सुनील कुमार शुक्ला को भी अपना पक्ष रखने और अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया।
विभाग का कहना है कि जांच के दौरान वह अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
सोशल मीडिया पर लगाए थे गंभीर आरोप
सुनील कुमार शुक्ला पिछले कुछ समय से लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रहे थे।
इन वीडियो में उन्होंने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि ड्यूटी लगाने के नाम पर कुछ कर्मचारियों से धन लिया जाता है और यह राशि कथित रूप से वरिष्ठ स्तर तक पहुंचाई जाती है।
इसके अलावा उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। उनके वीडियो वायरल होने के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया था।
विभाग ने आरोपों को माना अनुशासनहीनता
लखनऊ पुलिस का कहना है कि सरकारी कर्मचारी होने के नाते सुनील कुमार शुक्ला को सेवा नियमों और सोशल मीडिया नीति का पालन करना आवश्यक था।
विभागीय जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया कि उन्होंने बिना अनुमति सार्वजनिक मंचों पर विभाग से संबंधित बयान दिए, जिससे Police विभाग की छवि प्रभावित हुई।
पुलिस का कहना है कि इसी आधार पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।
उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति का भी हवाला
Police के अनुसार, जांच में यह भी पाया गया कि सुनील कुमार शुक्ला ने उत्तर प्रदेश की सोशल मीडिया नीति-2023 और सरकारी सेवक आचरण नियमों का उल्लंघन किया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारी कर्मचारी के रूप में उन्हें सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार की टिप्पणियों से बचना चाहिए था।
इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर पुलिस कमिश्नरेट ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया।
मामले पर छिड़ी नई बहस
सुनील शुक्ला की बर्खास्तगी के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
एक पक्ष इसे विभागीय अनुशासन लागू करने की कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सुनील शुक्ला के आरोपों और उनके बयानों पर चर्चा कर रहा है।
हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विभाग ने जांच के बाद उन्हें नियमों के उल्लंघन का दोषी माना है।
आगे क्या हो सकता है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुनील कुमार शुक्ला अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देना चाहते हैं तो वे संबंधित न्यायिक या प्रशासनिक मंच का रुख कर सकते हैं।
वहीं, यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में कोई नया साक्ष्य सामने आता है, तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।
फिलहाल विभागीय कार्रवाई प्रभावी है और पुलिस की ओर से इसे नियमानुसार लिया गया निर्णय बताया गया है।
उत्तर प्रदेश Police से आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी और उसके बाद जारी उनका वीडियो एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर सुनील शुक्ला ने सरकार, भाजपा और पुलिस विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर लखनऊ पुलिस का कहना है कि विभागीय जांच में सोशल मीडिया के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप सिद्ध होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
फिलहाल यह मामला सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है। यदि भविष्य में इस प्रकरण में कोई नई कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई होती है, तो उससे इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।








































