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अलवर में बाघों के पुनर्वास पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ, संरक्षण को बताया जैव विविधता बचाने की कुंजी

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On: June 28, 2026 9:36 PM
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अलवर । केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को राजस्थान के अलवर में “बाघों का पुनर्वास: अवसर और चुनौतियां” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने बाघ संरक्षण और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया।

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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के बाघ अभ्यारण्यों के क्षेत्रीय निदेशक, मुख्य वन्यजीव वार्डन और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य बाघों के पुनर्वास, संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर अनुभव साझा करना तथा भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है।

बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति नहीं, पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि बाघों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जंगल, जल स्रोत और समृद्ध जैव विविधता भी सुरक्षित रहती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ वन और समृद्ध जैव विविधता देश के पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

सरिस्का बना वैश्विक उदाहरण

मंत्री ने सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के सफल पुनर्वास को विश्वस्तरीय उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह दुनिया का पहला सफल वैज्ञानिक प्रयास है, जहां स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो चुके बाघों की आबादी को दोबारा स्थापित किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में जहां सरिस्का से बाघ पूरी तरह समाप्त हो चुके थे, वहीं आज यहां 56 बाघों का सुरक्षित निवास है।

भारत ने बढ़ाए बाघ अभ्यारण्य और हासिल किया बड़ा लक्ष्य

भूपेंद्र यादव ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने के अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है।

स्थानीय समुदायों की भूमिका सबसे अहम

उन्होंने कहा कि पन्ना और सरिस्का में बाघों की वापसी स्थानीय समुदायों के सहयोग और भागीदारी के कारण ही संभव हो सकी। वहीं जिन क्षेत्रों में जनसहभागिता कमजोर रही, वहां अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने प्रोजेक्ट चीता की सफलता में भी स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया।

वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय विकास पर भी जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल वन्यजीव संरक्षण नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों के सामाजिक और आर्थिक हितों को भी समान महत्व देना है। उन्होंने पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका और कल्याण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

तीन महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन

इस अवसर पर मंत्री ने निम्नलिखित प्रकाशनों का लोकार्पण किया—

  • भारत में बाघों के सक्रिय प्रबंधन पर रोडमैप
  • भारत में बाघों के संरक्षण एवं पुनर्वास पर पुस्तिका
  • प्रोजेक्ट चीता की वार्षिक रिपोर्ट (सितंबर 2024 से दिसंबर 2025)

इन दस्तावेजों में बाघों के वैज्ञानिक प्रबंधन, पुनर्वास, आवास संरक्षण, शिकार प्रजातियों के संवर्धन तथा प्रोजेक्ट चीता की प्रगति का विस्तृत विवरण शामिल है।

तकनीकी सत्रों में साझा हुए अनुभव

कार्यशाला में आवास बहाली, वन्यजीव स्थानांतरण, शिकार प्रजातियों के संवर्धन, भूदृश्य संपर्क, निगरानी प्रणाली और सक्रिय संरक्षण रणनीतियों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की। सरिस्का, पन्ना सहित विभिन्न बाघ अभ्यारण्यों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि बाघों की कमी वाले अभ्यारण्यों ने भविष्य की पुनर्वास योजनाएं प्रस्तुत कीं।

भविष्य की संरक्षण नीति को मिलेगा नया आधार

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव और सिफारिशें देश के बाघ संरक्षण कार्यक्रमों को नई दिशा देंगी। वैज्ञानिक प्रबंधन, आवास बहाली, शिकार प्रजातियों के विकास और विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से बाघों की संख्या और उनके सुरक्षित आवास को मजबूत करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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