
विश्व मौसम दिवस हर साल हमें मौसम और जलवायु परिवर्तन के बारे में सोचने का मौका देता है। इस बार जमशेदपुर के Karim City कॉलेज में विश्व मौसम दिवस के अवसर पर एक शानदार दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ, जो जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर केंद्रित रही। यह कार्यशाला रसायन विज्ञान स्नातकोत्तर विभाग के तत्वावधान में 22 और 23 मार्च 2026 को आयोजित की गई। Karim City कॉलेज में विश्व मौसम दिवस के अवसर पर आयोजित हुई दो दिवसीय कार्यशाला ने छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों को एक मंच प्रदान किया, जहां जलवायु परिवर्तन के कारणों, प्रभावों और समाधानों पर गहन चर्चा हुई। इस ब्लॉग में हम इस कार्यशाला की पूरी जानकारी, इसके महत्व और इससे जुड़े सबक को विस्तार से जानेंगे। अगर आप पर्यावरण प्रेमी हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए खास है!

Karim City कार्यशाला का शुभारंभ और मुख्य आकर्षण
Karim City कॉलेज, साकची, जमशेदपुर में यह दो दिवसीय कार्यशाला 22 मार्च को शुरू हुई और 23 मार्च की शाम तक चली। इसका मुख्य फोकस जलवायु परिवर्तन था, जो आज की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे ग्लोबल वार्मिंग, चरम मौसम घटनाएं और पर्यावरणीय असंतुलन हमारे जीवन को प्रभावित कर रहे हैं।
कार्यशाला का उद्घाटन Karim City कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने किया। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसी पहलें हमें जागरूक बनाती हैं और व्यक्तिगत स्तर पर कार्रवाई करने की प्रेरणा देती हैं। मुख्य अतिथि डॉ. तपन कुमार शंकर, असिस्टेंट प्रोफेसर, जी.एच. रायसोनी विश्वविद्यालय, अमरावती (महाराष्ट्र) ने अपनी पावर-पॉइंट प्रेजेंटेशन से सबको प्रभावित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पृथ्वी पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस का अत्यधिक उत्पादन जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण है। इससे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, जो बाढ़, सूखा, तूफान जैसी आपदाओं को जन्म दे रहा है।
इसके अलावा, अन्य मुख्य वक्ताओं में डॉ. मुदिला धनंजय राय (वैज्ञानिक एवं प्राध्यापक, नेशनल मेटालर्जिकल लेबोरेट्री), बसंत शुभांकर (के.एस. कॉलेज, सरायकेला) और डॉ. आले अली (करीम सिटी कॉलेज) ने अपने विचार साझा किए। कार्यशाला का संचालन रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. खुर्शीद अनवर के नेतृत्व में हुआ, जबकि कोऑर्डिनेटर अलीजान हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। फैकल्टी इंचार्ज डॉ. तुफैल अहमद और कॉलेज सचिव डॉ. मोहम्मद ज़करिया की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और गरिमामय बनाया।

जलवायु परिवर्तन क्या है? कारण और प्रभाव समझें
Karim City कॉलेज में विश्व मौसम दिवस के अवसर पर आयोजित हुई दो दिवसीय कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन को सबसे आगे रखा गया। सरल शब्दों में कहें तो जलवायु परिवर्तन का मतलब है पृथ्वी के मौसम पैटर्न में लंबे समय तक होने वाले बदलाव। डॉ. तपन कुमार शंकर ने बताया कि मुख्य वजह है मानवीय गतिविधियां – जैसे कोयला जलाना, वनों की कटाई, वाहनों से निकलने वाली गैसें। इनसे ग्रीनहाउस गैसें (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन) बढ़ जाती हैं, जो सूर्य की गर्मी को फंसाकर तापमान बढ़ाती हैं।
जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण
- औद्योगिक: फैक्टरियां और बिजली संयंत्र सबसे बड़े प्रदूषक हैं।
- वनों का विनाश: पेड़ कार्बन सोखते हैं, उनकी कमी से समस्या बढ़ती है।
- कृषि और पशुपालन: मीथेन गैस चावल के खेतों और गाय-भैंसों से निकलती है।
- प्लास्टिक और कचरा: ये लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।
Karim City जलवायु परिवर्तन प्रभाव जो हमें चिंतित कर रहे हैं
भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव साफ दिख रहे हैं। हिमालय की ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ा है। झारखंड जैसे इलाकों में अनियमित मानसून से किसान परेशान हैं। डॉ. मुदिला धनंजय राय ने बताया कि चरम मौसम घटनाएं – जैसे 2023 की भारी बारिश या गर्मी की लहरें – इसी का नतीजा हैं। समुद्र स्तर बढ़ने से तटीय शहर डूबने के कगार पर हैं। स्वास्थ्य पर असर: गर्मी से हीट स्ट्रोक, मच्छरों से मलेरिया जैसी बीमारियां फैल रही हैं।
कार्यशाला में चर्चा हुई कि अगर अभी नहीं चेते, तो 2050 तक भारत का 20% हिस्सा प्रभावित हो सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि समाधान संभव हैं!
पर्यावरणीय स्थिरता और ग्लोबल वार्मिंग पर विशेष चर्चा
विश्व मौसम दिवस की थीम हमेशा जागरूकता पर होती है, और इस दो दिवसीय कार्यशाला में ग्लोबल वार्मिंग को प्रमुखता दी गई। बसंत शुभांकर ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी को ‘ग्रीनहाउस’ की तरह गर्म बना रही है। समाधान के रूप में उन्होंने सस्टेनेबल लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी।

पर्यावरणीय स्थिरता के उपाय
- नवीकरणीय ऊर्जा: सोलर पैनल और पवन चक्कियां अपनाएं।
- पेड़ लगाएं: एक पेड़ सालाना 22 किलो कार्बन सोखता है।
- कम प्लास्टिक: रीयूजेबल बैग और बोतलें इस्तेमाल करें।
- सार्वजनिक परिवहन: कार कम चलाएं, बस या साइकिल चुनें।
डॉ. आले अली ने संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया। कॉलेज जैसे संस्थान रिसाइक्लिंग यूनिट लगा सकते हैं, वेस्ट मैनेजमेंट सिखा सकते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर, हम घर में LED बल्ब, वाटर हार्वेस्टिंग से योगदान दे सकते हैं। कार्यशाला में इंटरएक्टिव सेशन हुए, जहां छात्रों ने अपने आइडिया शेयर किए – जैसे स्कूलों में ‘ग्रीन क्लब’ बनाना।
मौसम की चरम घटनाएं और जलवायु कार्रवाई की भूमिका
Karim City कॉलेज की यह कार्यशाला मौसम की चरम घटनाओं पर भी रोशनी डालती रही। हाल के वर्षों में झारखंड में बाढ़-सूखा बढ़ा है। विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु कार्रवाई में हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। पेरिस समझौते के तहत भारत ने 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है।

व्यक्तियों की भूमिका
- जागरूकता फैलाएं: सोशल मीडिया पर शेयर करें।
- ऊर्जा बचाएं: लाइट बंद करना छोटा लेकिन प्रभावी कदम।
- वोट दें: पर्यावरण नीतियों को प्राथमिकता दें।
संस्थानों की भूमिका
कॉलेज जैसे करीम सिटी कॉलेज आगे आ रहे हैं। यह कार्यशाला इसका उदाहरण है। सरकार को सख्त कानून बनाने चाहिए, जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा।
जागरूकता से बदलाव लाएं
Karim City कॉलेज में विश्व मौसम दिवस के अवसर पर आयोजित हुई दो दिवसीय कार्यशाला ने साबित कर दिया कि शिक्षा और जागरूकता से जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है। इस कार्यशाला ने न सिर्फ ज्ञान दिया, बल्कि कार्रवाई की प्रेरणा भी। दोस्तों, आज से ही छोटे कदम उठाएं – पेड़ लगाएं, प्लास्टिक न फेंकें। याद रखें, पृथ्वी हमारी है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य। विश्व मौसम दिवस हमें याद दिलाता है कि कल बेहतर बनाने का समय आज है। अधिक ऐसी पहलों के लिए बने रहें!









































