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टाटा लीज नवीकरण: विधायक सरयू राय ने की राजस्व सचिव से विस्तृत चर्चा, समझौते में जनसुविधाओं की अनदेखी पर जताई चिंता

On: April 29, 2025 6:24 PM
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  • टाटा लीज नवीकरण के संबंध में रांची में सरयू राय मिले भूमि सुधार व राजस्व सचिव से
  • टाटा स्टील समझौते के तहत नहीं उपलब्ध कराता जनसुविधाएं- सरयू राय
  • झारखंड सरकार 31 दिसंबर के पूर्व टाटा लीज नवीकरण पर करे ठोस निर्णय

जमशेदपुर/रांची
जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने सोमवार को झारखंड सरकार के भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव चंद्रशेखर से मुलाकात कर टाटा लीज समझौता नवीकरण के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने 1985 और 2005 के लीज समझौतों की पृष्ठभूमि रखते हुए अनुरोध किया कि आगामी 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहे मौजूदा समझौते से पहले ठोस निर्णय लिया जाए। सचिव चंद्रशेखर ने जानकारी दी कि इस विषय पर एक समिति गठित की गई है जो वस्तुस्थिति से सरकार को अवगत कराएगी।

📜 लीज समझौते की पृष्ठभूमि:

  • 1985 में बिहार सरकार और टिस्को लिमिटेड के बीच पहला समझौता हुआ, जो 1956 से प्रभावी माना गया।
  • यह समझौता 31 दिसंबर 1995 को समाप्त हुआ।
  • 2005 में 30 वर्षों के लिए लीज का नवीकरण हुआ, जो 1 जनवरी 1996 से लागू माना गया और अब 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।

⚖️ विधिक त्रुटियों और जनसुविधाओं की अनदेखी का मामला:

श्री राय ने सचिव को बताया कि लीज समझौते में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे आम उपभोक्ता जनसुविधाओं में कमी की शिकायत कर सके। उन्होंने इसे संविधान विरोधी और भूमि सुधार अधिनियम के विरुद्ध बताया।

उनका कहना था कि जब अधिनियम की धारा 7 में संशोधन कर 7डी और 7ई जोड़ी गई हैं, तो एप्रोप्रिएट मशीनरी कमिटी बनाकर खाली भूमि को सबलीज पर देने का अधिकार देना विधिसम्मत नहीं है।

💧⚡ जनसुविधाओं की भारी अनदेखी:

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विधायक राय ने बताया कि टाटा स्टील ने समझौते में दर्जनों जनसुविधाएं उपलब्ध कराने की बात स्वीकारी थी, लेकिन व्यवहार में ये सुविधाएं नदारद हैं

  • साकची डीएम लाइब्रेरी में बिजली कनेक्शन के लिए ₹40 लाख का बिल
  • बस्तियों में पानी कनेक्शन के लिए ₹21,000 का बिल
  • सफाई व्यवस्था केवल टाटा लीज क्षेत्र तक सीमित

उन्होंने मांग की कि आने वाले लीज समझौते में जनसुविधा शिकायत निपटारा कोषांग अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए ताकि आम आदमी की पहुंच इसमें हो सके।

🕵️‍♂️ समिति गठित करने का सुझाव:

श्री राय ने सुझाव दिया कि 1985 से 2025 तक हुए समझौता उल्लंघनों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बने।
यह समिति:

  • संचिकाओं की समीक्षा करे
  • लाभुकों/उपभोक्ताओं से सुझाव ले
  • पूर्व उपायुक्तों के अनुभवों का लाभ उठाए

🛡️ जनहित और विधिसम्मत प्रक्रिया पर ज़ोर:

विधायक राय ने कहा कि लीज समझौते में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए और यह झारखंड भूमि सुधार अधिनियम की धारा 7डी, 7ई और अन्य सुसंगत विधियों के तहत ही संपन्न होना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि राज्य सरकार इस विषय को गंभीरता से लेकर समय पर, पारदर्शी और जनहितकारी निर्णय ले।

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विस्तार से

जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने सोमवार को झारखंड सरकार के भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव चंद्रशेखर से उनके कार्यालय में मुलाकात कर टाटा लीज समझौता नवीकरण पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने 1985 और 2005 के टाटा लीज समझौतों की कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि सचिव को बताई और आग्रह किया कि 31 दिसंबर 2025 से पहले लीज पर सरकार स्पष्ट और ठोस निर्णय ले।

विधायक राय ने बताया कि टिस्को लिमिटेड (अब टाटा स्टील) के साथ 1985 में हुआ पहला लीज समझौता 1956 से लागू माना गया और यह 1995 में समाप्त हुआ। इसके बाद अगस्त 2005 में 30 वर्षों के लिए लीज का नवीकरण हुआ, जो अब समाप्ति की ओर है। उन्होंने इस प्रक्रिया में देरी के ऐतिहासिक और राजनीतिक कारणों को भी रखा।

राजस्व सचिव को राय ने बताया कि वर्तमान लीज समझौते में गंभीर त्रुटियाँ हैं। इनमें सबसे अहम है – समझौते में जनसुविधाओं को लेकर स्पष्ट शिकायत प्रणाली का न होना। उन्होंने कहा कि यह अनुबंध संविधान और भूमि सुधार अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध है। विशेष रूप से 7डी और 7ई जैसी धाराओं के बावजूद टाटा स्टील को खाली भूमि पर सबलीज का अधिकार देना कानून सम्मत नहीं है।

सरयू राय ने यह भी बताया कि टाटा स्टील ने समझौते में जिन दर्जनों जनसुविधाओं को मुहैया कराने की बात मानी थी, उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि साकची डीएम लाइब्रेरी के बिजली कनेक्शन के लिए ₹40 लाख का बिल दिया गया है और बस्तीवासियों को पेयजल कनेक्शन के लिए ₹21 हजार तक का शुल्क चुकाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था भी केवल लीज क्षेत्र तक सीमित है, जबकि समझौते के अनुसार कंपनी को पूरे जमशेदपुर में अपने खर्च पर सुविधाएं देनी चाहिए।

राय ने आग्रह किया कि अगले लीज समझौते में इन त्रुटियों को सुधारा जाए, साथ ही एक ऐसा “शिकायत निपटारा कोषांग” बनाया जाए जहां आम नागरिक अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकें। उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि टाटा स्टील द्वारा लीज समझौते के उल्लंघनों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित हो जो 1985 से अब तक के दस्तावेज़ों, टिप्पणियों और पत्राचारों की समीक्षा करे। इस समिति को उपभोक्ताओं और पूर्व उपायुक्तों से भी सुझाव लेने चाहिए।

विधायक ने यह स्पष्ट किया कि लीज नवीकरण की यह प्रक्रिया पूरी तरह भूमि सुधार अधिनियम की विधिसम्मत धाराओं के अनुरूप होनी चाहिए और इसमें जनहित सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस दिशा में विशेष प्रयास की अपील की।

 

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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