जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम के रसुनचोपा गांव में मंगलवार को महान आध्यात्मिक विभूति Mahendra Gupta की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इसी अवसर पर माताजी आश्रम द्वारा आयोजित आठ दिवसीय रामकृष्ण कथामृत उत्सव का भी भव्य समापन हुआ। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण देखने को मिला।
इस वर्ष आयोजित यह 18वां रामकृष्ण कथामृत उत्सव था, जिसमें विभिन्न गांवों में लगातार आठ दिनों तक धार्मिक कार्यक्रम, कथामृत पाठ, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचन आयोजित किए गए।
आठ दिनों तक अलग-अलग गांवों में चला धार्मिक आयोजन
माताजी आश्रम की ओर से इस वर्ष कथामृत उत्सव का आयोजन अलग-अलग गांवों में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 7 जुलाई को हलुदपुकुर गांव में श्याम सुंदर सरकार के निवास से हुई।

इसके बाद 8 जुलाई को सुलेखा पालित के घर, 9 जुलाई को झूमा सरकार के घर, 10 जुलाई को जाम्बनी गांव स्थित राधा माधव मंदिर, 11 जुलाई को पोड़ा भाल्कि गांव में सार्वजनिक रूप से, 12 जुलाई को माताजी आश्रम में दुलाल मुखर्जी के आयोजन में तथा 13 जुलाई को माताजी आश्रम हाता में नीलकमल पाल के आयोजन में कथामृत उत्सव संपन्न हुआ।
अंतिम दिन 14 जुलाई को रसुनचोपा गांव में संतोष मंडल एवं बेला रानी मंडल के सौजन्य से समापन समारोह आयोजित किया गया।
ठाकुर, माँ, स्वामीजी और महेंद्र गुप्त की हुई पूजा-अर्चना
समापन दिवस पर शाम लगभग 6:30 बजे भगवान श्री रामकृष्ण, माँ शारदा देवी, स्वामी विवेकानंद और महेंद्र गुप्त की विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती की गई।
इसके बाद आयोजक संतोष मंडल ने सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का स्वागत किया। वहीं शंकर चंद्र गोप ने आठ दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी भक्तों, आयोजकों एवं ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया।
Mahendra Gupta की जीवनी पर डाला गया प्रकाश
कार्यक्रम के दौरान सुनील कुमार दे ने महेंद्र गुप्त के जीवन और उनके आध्यात्मिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि रामकृष्ण कथामृत महेंद्र गुप्त द्वारा लिखी गई लगभग 240 दिनों की डायरी है, जिसमें उन्होंने भगवान श्री रामकृष्ण परमहंस के साथ बिताए अपने अनुभवों और उनके अमृत वचनों को शब्दों में संजोया है।
उन्होंने कहा कि यदि महेंद्र गुप्त यह अमूल्य कार्य नहीं करते, तो आज दुनिया इस महान आध्यात्मिक धरोहर से वंचित रह जाती।
Mahendra गुप्त इस युग के व्यासदेव हैं बादल मामा
कार्यक्रम में कथामृत पाठ करते हुए कमल कांति घोष ने कहा कि रामकृष्ण कथामृत इस युग का भागवत है।
उन्होंने कहा कि महेंद्र गुप्त ने भगवान श्री रामकृष्ण की शिक्षाओं को जिस प्रकार सुरक्षित रखा, वह अतुलनीय कार्य है। इसी कारण उन्हें इस युग का व्यासदेव कहा जाता है।
वहीं प्रसिद्ध भजन गायक बादल मामा ने भी कहा कि महेंद्र गुप्त का योगदान भारतीय आध्यात्मिक साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनकी रचनाएँ आज भी लाखों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देती हैं।
भक्ति संगीत और कथामृत पाठ ने बांधा समां
धार्मिक कार्यक्रम के दौरान कथामृत पाठ के साथ-साथ भक्ति संगीत का भी भव्य आयोजन किया गया।
इस अवसर पर भास्कर दे, सुनील कुमार दे, पतित पावन दास, प्रवीर दास, सावित्री गोप, बादल मामा, गदाधर दास, पूनम मंडल, तरुण दे, सुधांशु मिश्र, माताजी आश्रम की महिला भक्तों तथा भुइयाडीह कालिंदी समिति के श्रद्धालुओं ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ भक्ति रस में डूबे नजर आए।
माँ शारदा और स्वामी विवेकानंद के जीवन पर भी हुआ वाचन
कार्यक्रम में बेला रानी मंडल ने माँ शारदा देवी के जीवन एवं आदर्शों पर प्रकाश डाला।
वहीं सुधांशु मिश्र ने स्वामी विवेकानंद के विचारों और उनके प्रेरणादायक जीवन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाने का आह्वान भी किया।
हरिनाम संकीर्तन और हरि लूट के साथ हुआ समापन
धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं ने सामूहिक हरिनाम संकीर्तन किया, जिसके बाद पारंपरिक हरि लूट का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण मंडल ने किया, जबकि पूरे आयोजन का सफल संचालन सुनील कुमार दे ने किया।
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
समापन समारोह में कृष्ण पद मंडल, तपन मंडल, अर्जुन मुड़ी, तरुण मंडल, तरुण दे, सुधांशु मिश्र, स्वपन मंडल, अंजलि मंडल, छवि रानी मंडल, सुबोध मंडल, अमित मंडल, सावित्री गोप, तपन कुमार मंडल, काजल मंडल, बुलु रानी मंडल, बेला रानी मंडल, बिमल मंडल, वंदना मंडल, असित मंडल, सहदेव मंडल, मोनिका मंडल, तुसार मंदाकिनी और बलराम गोप सहित जमशेदपुर एवं आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और भक्त उपस्थित रहे।
रसुनचोपा गांव में आयोजित Mahendra गुप्त जयंती एवं आठ दिवसीय रामकृष्ण कथामृत उत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम साबित हुआ। आठ दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने न केवल श्री रामकृष्ण परमहंस, माँ शारदा और स्वामी विवेकानंद के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाया, बल्कि महेंद्र गुप्त के अमूल्य योगदान को भी नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी ने यह साबित किया कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही मजबूत है।


















