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पद्मश्री सम्मानित समाजसेविका छुटनी महतो को वीर सिंह देवगम ने किया सम्मानित, बताया झारखंड की शान

On: January 21, 2026 11:45 AM
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चाईबासा (जय कुमार) :-नववर्ष के प्रथम माह में समाज सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल करते हुए झारखंड जनशक्ति क्रांतिकारी मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष एवं 10 सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र (चाईबासा) के पूर्व प्रत्याशी श्री वीर सिंह देवगम ने पद्मश्री सम्मान से अलंकृत प्रख्यात समाजसेविका श्रीमती छुटनी महतो से शिष्टाचार भेंट की एवं उन्हें सम्मानित किया।

इस अवसर पर श्री देवगम ने कहा कि डायन-प्रथा और डायन-हत्या जैसी अमानवीय, बर्बर और जघन्य कुप्रथाओं के विरुद्ध श्रीमती छुटनी महतो द्वारा वर्षों से किया जा रहा संघर्ष न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग की महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए छुटनी महतो ने जिस साहस, दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया है, वह अत्यंत सराहनीय है।

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श्री देवगम ने बताया कि श्रीमती छुटनी महतो के सतत जनजागरण अभियान, सामाजिक हस्तक्षेप और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों के कारण अब तक लाखों निर्दोष महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास, कुरीतियों और सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ उनका संघर्ष ऐतिहासिक है, जिसे आने वाली पीढ़ियां सदैव स्मरण रखेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज से अंधविश्वास और कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए सरकार, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है, और इस दिशा में छुटनी महतो जैसी समाजसेविकाएं मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं।

मुलाकात के दौरान दोनों के बीच समाज में व्याप्त कुरीतियों, महिला सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को और अधिक सशक्त करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान सामाजिक परिवर्तन के लिए मिलकर कार्य करने पर भी सहमति बनी।

श्री वीर सिंह देवगम ने श्रीमती छुटनी महतो के योगदान को समाज के लिए अमूल्य बताते हुए उनके प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया और कहा कि ऐसे समाजसेवियों को सम्मान देना पूरे समाज के लिए गर्व की बात है। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाएं और सकारात्मक बदलाव की मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस सम्मान समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सामाजिक बदलाव के लिए समर्पण, साहस और निरंतर संघर्ष से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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