
सरायकेला: Seraikela खरसावां जिले के गम्हरिया स्थित वात्सल्य बालिका गृह से दो बच्चियों के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच चिंता और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, जनसहभागी विकास केंद्र द्वारा संचालित वात्सल्य बालिका गृह से दो बच्चियां अचानक गायब हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
बालिका गृह जैसी संवेदनशील संस्था से बच्चियों के गायब होने की खबर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग लगातार यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था के बीच बच्चियां कैसे गायब हो गईं।
जांच के लिए पहुंचीं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी
घटना के दो दिन बाद जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) सत्या ठाकुर मामले की जांच के लिए वात्सल्य बालिका गृह पहुंचीं। लेकिन उनके पहुंचने के साथ ही पूरे बालिका गृह के मुख्य दरवाजे बंद कर दिए गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार जांच के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। यहां तक कि मीडिया कर्मियों और ग्रामीणों को भी मुख्य गेट के बाहर ही रोक दिया गया।
दरवाजे बंद कर जांच किए जाने को लेकर अब इलाके में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि जब मामला दो बच्चियों के लापता होने जैसा गंभीर हो, तब जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए थी।
ग्राम प्रधान को भी अंदर जाने से रोका गया
मामला उस समय और अधिक संवेदनशील हो गया जब ग्राम प्रधान को भी बालिका गृह के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। जानकारी के मुताबिक ग्राम प्रधान पत्रकारों के साथ मुख्य गेट के बाहर काफी देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मुख्य गेट बंद रहने के कारण अंदर क्या चल रहा है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी बाहर मौजूद लोगों को नहीं मिल पा रही थी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर रहा था, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम प्रधान को जानकारी देने में क्या समस्या थी। इस घटना के बाद लोगों के मन में संदेह और बढ़ गया है।
जांच के दौरान दो महिलाओं की एंट्री से बढ़े सवाल
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि जांच के दौरान दो महिलाएं बालिका गृह के अंदर जाती हुई दिखाई दीं। जब मौजूद लोगों ने उनसे उनका परिचय पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और सीधे अंदर चली गईं।
इस घटना के बाद ग्रामीणों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोगों का कहना है कि जब आम लोगों और मीडिया को अंदर जाने से रोका गया था, तब उन महिलाओं को अंदर प्रवेश की अनुमति किस आधार पर दी गई।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही थी, तो प्रशासन को इस तरह की गतिविधियों पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी
घटना को लेकर आसपास के गांवों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि बालिका गृह जैसी संस्थाओं में रहने वाली बच्चियों की सुरक्षा प्रशासन और संचालकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में दो बच्चियों का अचानक गायब हो जाना बेहद गंभीर मामला है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बालिका गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद बालिका गृह की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि ऐसी संस्थाओं में सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा गार्ड और नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होती, तो बच्चियों के गायब होने जैसी घटना नहीं होती।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बालिका गृह की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी समीक्षा की जाए और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो।
प्रशासन ने बच्चियों की तलाश जारी होने की कही बात
फिलहाल प्रशासन की ओर से दोनों बच्चियों की तलाश जारी होने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है।
प्रशासन का दावा है कि बच्चियों की खोज के लिए संबंधित विभागों और पुलिस की मदद ली जा रही है। साथ ही बालिका गृह के कर्मचारियों और संचालकों से भी पूछताछ की जा रही है।
हालांकि अब तक बच्चियों के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ पाई है, जिससे लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
इलाके में डर और चर्चा का माहौल
घटना के बाद पूरे इलाके में डर और चर्चा का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सुरक्षित माने जाने वाले बालिका गृह से बच्चियां कैसे गायब हो गईं।
लोगों का कहना है कि यदि बालिका गृह जैसी जगहों पर भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
इस मामले ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि बाल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कई सवाल अब भी बाकी
पूरा मामला अब कई अनसुलझे सवालों के बीच घिर गया है। आखिर दोनों बच्चियां कहां गईं? जांच के दौरान दरवाजे बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? ग्राम प्रधान और पत्रकारों को अंदर जाने से क्यों रोका गया? और जांच के दौरान अंदर गई दो महिलाएं कौन थीं?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही सामने आ पाएंगे।
फिलहाल सरायकेला-खरसावां जिले में यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।









