
चक्रधरपुर: Chakradharpur रेल मंडल में यात्री ट्रेनें लेट होने और मालगाड़ियों को प्राथमिकता मिलने से जनता में भारी आक्रोश फैल गया है। जनता रेल आंदोलन के तहत सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह मुद्दा अब रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है, जहां प्रारंभिक स्टेशन से ही ट्रेनें विलंबित हो रही हैं।

आंदोलनकारियों ने मांग की है कि ट्रेन संचालन का डेटा सार्वजनिक हो और पारदर्शिता आए। जमशेदपुर से Chakradharpur तक के रेलयात्रियों की परेशानी रोज बढ़ रही है। एक सप्ताह में सुधार न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
Chakradharpur रेल मंडल की समस्या
Chakradharpur रेल मंडल दक्षिण पूर्व रेलवे का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हावड़ा-मुंबई मेन लाइन को जोड़ता है। यहां यात्री ट्रेनें लेट होना आम बात हो गई है। टाटानगर-राउरकेला और डांगुवापोसी-चाईबासा रेलखंडों पर मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने से यात्री ट्रेनें घंटों खड़ी रहती हैं। कई ट्रेनें प्रारंभिक स्टेशन से ही 2-10 घंटे लेट चल रही हैं।
यह समस्या पिछले तीन वर्षों से चली आ रही है। छात्र, मरीज और आम यात्री सबसे अधिक प्रभावित हैं। रेलवे की आय मालगाड़ियों से हो रही है, लेकिन यात्री सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। आंदोलनकारियों ने संचालन नियंत्रण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जनता रेल आंदोलन का ज्ञापन
आज DRM कार्यालय में सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि यात्री ट्रेनें लेट होने का कारण स्थानीय संचालन है। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के मूवमेंट का डेटा सार्वजनिक करने की मांग उठी। बिना पूर्व सूचना के रेलवे गेट बंद करने से आवागमन बाधित हो रहा है, खासकर भारत भवन के सामने।
जनता रेल आंदोलन ने चार प्रमुख मांगें रखीं:
- सभी यात्री ट्रेनें समयसारिणी अनुसार चलें।
- एक्सप्रेस ट्रेनें निर्धारित समय में संचालित हों।
- विलंब के कारण सार्वजनिक हों और पारदर्शिता आए।
- बंद गेट तत्काल खोले जाएं या वैकल्पिक व्यवस्था हो।
आंदोलनकारी झामुमो नेता रामलाल मुंडा, बैरम खान, विजय सिंह सुंब्रुई, सन्नी खान, मोहम्मद अशरफ जैसे नेताओं के नेतृत्व में एकजुट हैं।

यात्रियों की परेशानी
यात्री ट्रेनें लेट होने से रोज हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। शालीमार-मुंबई समरसता एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें 6-7 घंटे लेट पहुंच रही हैं। प्लेटफॉर्म पर इंतजार, खान-पान की समस्या और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए हैं। छात्र परीक्षाओं के लिए, मरीज इलाज के लिए परेशान।
एनआई कार्यों के चलते ट्रेनें रद्द हो रही हैं। मालगाड़ियों की भारी दौड़ यात्री ट्रेनों को ‘रेड सिग्नल’ दे रही है। कोल्हान रक्षा संघ जैसे संगठन भी आंदोलन में शामिल हैं।
रेलवे प्रशासन पर आरोप
आंदोलनकारियों ने DRM तरुण हुरिया की कार्यशैली पर सवाल उठाए। मालगाड़ियों को ‘ग्रीन सिग्नल’ देने का आरोप है। गेट बंद करना ‘जनविरोधी’ बताया गया। BJP नेता पवन शंकर पांडे ने भी विरोध किया। रेलवे की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तीखी प्रतिक्रिया आई।
ट्रेनों का 62 किमी सफर 3 घंटे लगना बैलगाड़ी जैसा है। पारदर्शिता की कमी से भ्रष्टाचार के संदेह हैं।
आंदोलन की चेतावनी
आंदोलनकारियों ने एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया। सुधार न होने पर जनता रेल आंदोलन में धरना, प्रदर्शन, रेल रोको और भूख हड़ताल होगी। Chakradharpur में व्यापक जनआंदोलन की रणनीति तैयार है। यह आम जनता के अधिकारों का संघर्ष है।
रेल सुधार के सुझाव
रेलवे को चाहिए:
- यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दें।
- डायनामिक सिग्नलिंग सिस्टम अपनाएं।
- ऐप पर रीयल-टाइम अपडेट दें।
- गेट पर वैकल्पिक पुलिया बनाएं।
- यात्री फीडबैक सिस्टम मजबूत करें।
ये कदम समस्या हल कर सकते हैं।
Chakradharpur में रेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं, जहां यात्री ट्रेनें लेट और मालगाड़ियों को प्राथमिकता जनआक्रोश का कारण बनी। जनता रेल आंदोलन ने साफ चेतावनी दी है—सुधार हो या आंदोलन। रेलवे को अब पारदर्शिता और यात्री हित में कदम उठाने होंगे।
जनता रेल आंदोलन ने कहा कि यह संघर्ष आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।









