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Tata स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन में डीजीएमएस के 125 वर्ष पूरे होने पर वृक्षारोपण अभियान 120 से ज्यादा फलदार पौधे लगाए गए

On: July 9, 2026 6:49 PM
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जमशेदपुर: Tata स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के 125वें स्थापना वर्ष के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूती से सामने रखा है। इस विशेष मौके पर वेस्ट बोकारो डिवीजन की ओर से एक वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया, जिसके तहत 120 से अधिक फलदार पौधे लगाए गए। इस अभियान का आयोजन वेस्ट बोकारो स्थित सर दोराबजी टाटा पार्क में किया गया, जहां आम, अमरूद और बेल जैसे पौधों का रोपण किया गया।

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यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक पौधारोपण अभियान नहीं था, बल्कि इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण, खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्स्थापन और हरित विकास की दिशा में टाटा स्टील की सोच को भी रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में खान सुरक्षा महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों और टाटा स्टील प्रबंधन की मौजूदगी ने इस पहल को और महत्वपूर्ण बना दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए डीजीएमएस के उप महानिदेशक श्याम सुंदर प्रसाद

इस विशेष अवसर पर खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के उप महानिदेशक श्री श्याम सुंदर प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ कार्यक्रम में संजय राजोरिया, जनरल मैनेजर (कोल), टाटा स्टील और मुकेश रंजन, जनरल मैनेजर, वेस्ट बोकारो (डेज़िग्नेट) भी मौजूद थे। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को औपचारिक और संस्थागत महत्व प्रदान किया।

कार्यक्रम में डीजीएमएस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इनमें श्री अजीत कुमार, निदेशक (माइनिंग); श्री नरेश गोविंद फुले, निदेशक (मैकेनिकल); श्री परवेज आलम, उप निदेशक (माइनिंग); श्री शेख मिन्हाजुद्दीन, उप निदेशक (इलेक्ट्रिकल); तथा श्री द्यामप्पा अडनूर, उप निदेशक (मैकेनिकल) शामिल रहे। इसके अलावा टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रमुख भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

सर दोराबजी Tata पार्क में लगाए गए आम, अमरूद और बेल के पौधे

वृक्षारोपण अभियान के तहत सर दोराबजी टाटा पार्क में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया। इस दौरान आम, अमरूद और बेल जैसे फलदार पौधों का चयन किया गया, जो न केवल पर्यावरण के लिए उपयोगी हैं, बल्कि स्थानीय जैव विविधता और हरित आवरण को भी मजबूत करने में सहायक होंगे। कुल 120 से अधिक फलदार पौधे लगाए गए, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र को हराभरा बनाने के साथ-साथ स्थानीय पारिस्थितिकी को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे।

फलदार पौधों का चयन इस पहल को और खास बनाता है, क्योंकि इससे हरियाली के साथ-साथ स्थानीय समुदाय और जैविक तंत्र को भी लाभ मिल सकता है। ऐसे पौधे पर्यावरणीय संतुलन, पक्षियों और अन्य जीवों के लिए आवास, तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक पर्यावरणीय सोच का हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान हाइड्रोसीडिंग मशीन का उद्घाटन

वृक्षारोपण अभियान के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई, जब डीजीएमएस के उप महानिदेशक श्री श्याम सुंदर प्रसाद ने गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में हाइड्रोसीडिंग मशीन का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन के साथ ही टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन में पहली बार हाइड्रोसीडिंग तकनीक का उपयोग शुरू किया गया।

यह कदम टाटा स्टील के लिए केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि खनन के बाद प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और पर्यावरणीय पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हाइड्रोसीडिंग तकनीक के इस्तेमाल से उन क्षेत्रों में भी तेजी से हरियाली विकसित की जा सकेगी, जहां पारंपरिक पौधारोपण या हरित विकास की प्रक्रिया कठिन होती है।

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क्या है हाइड्रोसीडिंग तकनीक और क्यों है यह खास?

हाइड्रोसीडिंग एक आधुनिक और प्रभावी तकनीक है, जिसका उपयोग विशेष रूप से खनन के बाद प्रभावित और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में हरियाली विकसित करने के लिए किया जाता है। यह तकनीक खास तौर पर खड़ी ढलानों, ओवरबर्डन डंप, अस्थिर भूमि और दुर्गम इलाकों में बेहद उपयोगी मानी जाती है, जहां सामान्य तरीके से पौधारोपण करना चुनौतीपूर्ण होता है।

इस प्रक्रिया में बीज, पानी, मल्च, उर्वरक और अन्य पोषक तत्वों का एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। फिर इस मिश्रण का भूमि पर छिड़काव किया जाता है, जिससे बीजों को अंकुरित होने के लिए जरूरी नमी और पोषण एक साथ मिल जाता है। इस तकनीक के जरिए पौधों का विकास तेज़ी से, समान रूप से और अधिक प्रभावी तरीके से होता है। यही कारण है कि खनन क्षेत्रों के पुनर्स्थापन में हाइड्रोसीडिंग को एक उन्नत और उपयोगी समाधान माना जा रहा है।

खनन प्रभावित क्षेत्रों में हरियाली लाने में मिलेगी मदद

वेस्ट बोकारो जैसे खनन क्षेत्र में हाइड्रोसीडिंग तकनीक का उपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खनन के दौरान भूमि की ऊपरी सतह, प्राकृतिक संरचना और हरित आवरण पर असर पड़ता है। कई बार खनन के बाद ऐसे क्षेत्र बन जाते हैं जहां मिट्टी अस्थिर होती है, ढलान तेज होती है या सामान्य पौधारोपण टिक नहीं पाता। ऐसे में हाइड्रोसीडिंग जैसी तकनीक इन क्षेत्रों को दोबारा हरित बनाने में प्रभावी साबित हो सकती है।

इस तकनीक के जरिए ओवरबर्डन डंप, खनन से प्रभावित ढलानों और अन्य बंजर क्षेत्रों में पौधों का तेजी से विकास कराया जा सकता है। इससे न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि खनन के कारण प्रभावित पर्यावरणीय संतुलन को भी दोबारा मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह पहल खनन उद्योग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

हाइड्रोसीडिंग तकनीक के कई पर्यावरणीय और व्यावहारिक फायदे

हाइड्रोसीडिंग तकनीक को अपनाने के पीछे कई व्यावहारिक और पर्यावरणीय कारण हैं। यह तकनीक तेज़ अंकुरण में मदद करती है, यानी बीज कम समय में उगने लगते हैं। साथ ही पौधों का विकास अधिक समान और व्यवस्थित रूप से होता है। यह तकनीक मिट्टी के कटाव को रोकने में भी काफी प्रभावी मानी जाती है, जो खनन प्रभावित क्षेत्रों की एक बड़ी समस्या होती है।

इसके अलावा, यह तकनीक उन दुर्गम क्षेत्रों में भी हरियाली विकसित करने में मदद करती है, जहां श्रमिकों के जरिए पौधारोपण करना मुश्किल होता है। लागत के लिहाज से भी यह कई परिस्थितियों में फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि कम समय में बड़े क्षेत्र को कवर किया जा सकता है। साथ ही यह स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर ढंग से अनुकूलित की जा सकती है। कुल मिलाकर, हाइड्रोसीडिंग पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनर्वास और हरित विकास के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है।

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सतत खनन और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन की दिशा में मजबूत कदम

Tata स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन द्वारा हाइड्रोसीडिंग तकनीक को अपनाना और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाना सतत खनन (Sustainable Mining) की दिशा में कंपनी की सोच को दर्शाता है। आज के समय में खनन उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्स्थापन करना भी है।

हाइड्रोसीडिंग और पौधारोपण जैसी पहलें इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे खनन के बाद खाली या क्षतिग्रस्त पड़ी भूमि को फिर से उपयोगी और हरित बनाया जा सकता है। यह न केवल पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों, जैव विविधता और जलवायु संरक्षण के लिए भी लाभकारी होगा। इस दृष्टि से देखा जाए तो यह पहल केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि जिम्मेदार औद्योगिक विकास का उदाहरण है।

Tata स्टील के वरिष्ठ अधिकारी भी रहे मौजूद

इस आयोजन में टाटा स्टील के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इनमें मज़हर अली, चीफ (इंजीनियरिंग एवं प्रोजेक्ट्स) और आशुतोष कुमार पांडेय, चीफ (कोल बेनिफिशिएशन) प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा वेस्ट बोकारो डिवीजन के विभिन्न विभागों के प्रमुख और अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि टाटा स्टील इस तरह की पर्यावरणीय और तकनीकी पहलों को केवल औपचारिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि अपने दीर्घकालिक संचालन और सतत विकास की रणनीति का हिस्सा मानती है। जब शीर्ष स्तर के अधिकारी स्वयं ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, तो इससे संगठन के भीतर भी पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास के प्रति सकारात्मक संदेश जाता है।

Tata स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन द्वारा डीजीएमएस के 125वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित वृक्षारोपण अभियान और हाइड्रोसीडिंग मशीन का उद्घाटन पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। 120 से अधिक फलदार पौधों का रोपण और पहली बार हाइड्रोसीडिंग तकनीक का उपयोग इस बात का संकेत है कि कंपनी खनन कार्यों के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन और भूमि पुनर्वास को भी समान महत्व दे रही है।

यह पहल आने वाले समय में वेस्ट बोकारो क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने, खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्स्थापन और मिट्टी संरक्षण जैसे कार्यों में अहम भूमिका निभा सकती है। साथ ही यह अन्य औद्योगिक और खनन इकाइयों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर कैसे आगे बढ़ा जा सकता है।

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