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NHRC की बड़ी पहल शहरी क्षेत्रों में Heat लू से बचाव के लिए तैयार होगा नया रोडमैप विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

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On: June 4, 2026 7:55 PM
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भारत: हर वर्ष गर्मियों के दौरान बढ़ती Heat और लू की घटनाएं लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं। जलवायु परिवर्तन, अनियोजित शहरीकरण, हरित क्षेत्रों में कमी तथा जल स्रोतों के क्षरण के कारण शहरी क्षेत्रों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी गंभीर चुनौती को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली स्थित मानव अधिकार भवन में शहरी क्षेत्रों में लू और उसके निवारण” विषय पर पर्यावरण एवं जलवायु संबंधी कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।

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इस बैठक में देशभर के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, नगर प्रशासन, पर्यावरणविदों तथा विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और लू की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए व्यापक सुझाव प्रस्तुत किए।

NHRC अध्यक्ष ने जताई चिंता

बैठक की अध्यक्षता करते हुए एनएचआरसी अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि सर्दियों में प्रदूषण और गर्मियों में लू पर वर्षों से चर्चा होती रही है, लेकिन इसके बावजूद मानव जीवन की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों का अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहा है।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और अनियंत्रित शहरीकरण ने पर्यावरणीय असंतुलन को बढ़ाया है। जल निकायों का अतिक्रमण, वनों की कटाई और कंक्रीट के विस्तार ने शहरों को गर्मी के बड़े केंद्रों में बदल दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब केवल चर्चा नहीं बल्कि व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान अपनाने की आवश्यकता है।

गांधीवादी सोच और वर्तमान शहरी संकट

न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने अपने संबोधन में गांधीवादी अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी आत्मनिर्भर गांवों की कल्पना करते थे। लेकिन समय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर शहरों की ओर पलायन हुआ, जिससे शहरी आबादी और दबाव बढ़ा।

इसका परिणाम यह हुआ कि शहरों में हरित क्षेत्रों की जगह कंक्रीट संरचनाओं ने ले ली और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि दशकों से हुए पर्यावरणीय नुकसान को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव को कम करने के लिए प्रभावी रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं।

पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन आवश्यक

एनएचआरसी सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रकृति संरक्षण, हरित क्षेत्रों के विस्तार और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों की सुरक्षा हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

उनका मानना था कि यदि शहरी विकास योजनाओं में पर्यावरणीय दृष्टिकोण को शामिल नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में गर्मी और लू की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।

लू अब मानवाधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा

NHRC के महासचिव भरत लाल ने कहा कि लू केवल एक मौसमीय घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह अब एक गंभीर मानवाधिकार चुनौती बन चुकी है।

उन्होंने बताया कि निर्माण श्रमिक, दिहाड़ी मजदूर, स्ट्रीट वेंडर, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और कमजोर आर्थिक वर्ग के लोग लू के सबसे बड़े शिकार बनते हैं।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि तमाम प्रयासों के बावजूद देश में लू से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

विशेषज्ञों ने सुझाए आधुनिक तकनीकी समाधान

बैठक में शामिल विभिन्न विशेषज्ञों ने लू के प्रभाव को कम करने के लिए तकनीक आधारित समाधान प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि:

  • वार्ड स्तर पर मौसम पूर्वानुमान विकसित किए जाएं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित जोखिम मानचित्र तैयार किए जाएं।
  • संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जाए।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए।
  • मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाई जाए।

इन उपायों से समय रहते लोगों को सचेत किया जा सकेगा और जनहानि कम होगी।

जून में अधिक लू की आशंका मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. अखिल श्रीवास्तव ने बैठक में बताया कि जून माह के दौरान कई राज्यों में सामान्य से अधिक लू पड़ने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि मौसम विभाग बहुस्तरीय चेतावनी प्रणाली विकसित कर रहा है ताकि स्ट्रीट वेंडर, गिग वर्कर और अन्य संवेदनशील वर्गों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाई जा सके।

23 राज्यों में लागू हैं हीट एक्शन प्लान

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के प्रतिनिधियों ने बताया कि देश के सभी 23 लू प्रभावित राज्यों में हीट एक्शन प्लान लागू किए जा चुके हैं।

हालांकि उन्होंने माना कि योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए:

  • जिला स्तर पर निगरानी बढ़ानी होगी।
  • शहरों में विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित करने होंगे।
  • समर्पित बजट उपलब्ध कराना होगा।
  • नियमित मूल्यांकन प्रणाली विकसित करनी होगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र को करना होगा और मजबूत

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने चेतावनी दी कि वर्ष 2035 तक गर्मी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि:

  • अस्पतालों में हीटस्ट्रोक प्रबंधन इकाइयां स्थापित हों।
  • चिकित्सा कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
  • एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत किया जाए।
  • स्वास्थ्य निगरानी तंत्र को डिजिटल बनाया जाए।

इससे लू से प्रभावित मरीजों को त्वरित उपचार मिल सकेगा।

शहरों को बनाना होगा ताप-प्रतिरोधी

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के शहरों को जलवायु-अनुकूल बनाना अनिवार्य है।

इसके लिए निम्न उपाय महत्वपूर्ण बताए गए:

कूल रूफ तकनीक

छतों पर परावर्तक सामग्री और विशेष कोटिंग का उपयोग।

ग्रीन कॉरिडोर

शहरों में हरित गलियारों का निर्माण।

जल निकायों का पुनर्जीवन

तालाब, झील और नदियों की सुरक्षा एवं पुनर्स्थापना।

सतत परिवहन

प्रदूषण कम करने वाले परिवहन साधनों को बढ़ावा।

ऊर्जा कुशल भवन

ऐसे भवन जिनमें प्राकृतिक वेंटिलेशन और कम ऊर्जा खपत हो।

प्रकृति आधारित समाधान सबसे प्रभावी

बैठक में अधिकांश विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि लू से निपटने का सबसे स्थायी तरीका प्रकृति आधारित समाधान हैं।

इसके अंतर्गत:

  • बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण
  • शहरी वन विकसित करना
  • आर्द्रभूमियों की रक्षा
  • नदी एवं झील संरक्षण
  • हरित क्षेत्रों का विस्तार

जैसे कदम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि जहां अधिक पेड़ और जल स्रोत मौजूद हैं, वहां तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।

श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष जोर

बैठक में यह भी कहा गया कि बाहरी वातावरण में काम करने वाले श्रमिक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

उनकी सुरक्षा के लिए सुझाव दिए गए:

  • कार्य समय में बदलाव
  • दोपहर की अत्यधिक गर्म अवधि में काम सीमित करना
  • पीने के पानी की व्यवस्था
  • विश्राम केंद्र स्थापित करना
  • स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करना

इन उपायों से लाखों श्रमिकों को राहत मिल सकती है।

लू से निपटने के लिए प्रमुख अनुशंसाएं

बैठक से उभरकर सामने आए महत्वपूर्ण सुझावों में शामिल हैं:

  • वार्ड स्तर पर ताप संवेदनशीलता मानचित्र तैयार करना।
  • एआई और जीआईएस आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करना।
  • लू से होने वाली मृत्यु और बीमारी का वैज्ञानिक डेटा प्रबंधन।
  • कमजोर वर्गों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय।
  • अस्पतालों की तैयारी बढ़ाना।
  • शहरी हरियाली का विस्तार।
  • वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
  • भूजल पुनर्भरण कार्यक्रम लागू करना।
  • भवनों के लिए ताप-प्रतिरोधी मानक बनाना।
  • बहुभाषी जागरूकता अभियान चलाना।
  • नगर योजनाओं में ताप-प्रतिरोध को शामिल करना।

भारत तेजी से बदलती जलवायु परिस्थितियों का सामना कर रहा है। बढ़ती गर्मी और लू अब केवल मौसम संबंधी समस्या नहीं बल्कि स्वास्थ्य, आजीविका, पर्यावरण और मानवाधिकारों से जुड़ा व्यापक मुद्दा बन चुकी है। NHRC द्वारा आयोजित यह बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य के शहरों को अधिक हरित, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि सुझाए गए उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में लू से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है और करोड़ों लोगों के जीवन की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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