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Pahalgam terror attack: जांच में हुआ बड़ा खुलासा, तीन पाकिस्तानी और दो स्थानीय आतंकियों की पहचान

On: April 24, 2025 11:09 PM
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Pahalgam terror attack: दो दशक में सबसे बड़ी आतंकी वारदात, लश्कर और ISI से जुड़ रही कड़ियां, सैफुल्लाह कसूरी की भूमिका संदिग्ध

जम्मू-कश्मीर : 24 April 2025

📌 पहलगाम हमले की जांच तेज, पांच आतंकी हुए चिन्हित

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पहलगाम के बैसरन क्षेत्र में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच कई स्तरों पर चल रही है। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। बुधवार को जांच एजेंसियों ने हमले में शामिल पांच आतंकियों की पहचान की। इसमें तीन पाकिस्तानी नागरिक और दो कश्मीरी निवासी शामिल हैं।

पाकिस्तान से आए थे हमलावर, लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय

तीनों पाकिस्तानी आतंकियों की पहचान आसिफ फौजी (कोड नाम मूसा), सुलेमान शाह (कोड नाम यूनुस) और अबू तल्हा (कोड नाम आसिफ) के रूप में हुई है। ये आतंकी हाल ही में भारत में घुसे थे, लेकिन इनमें से फौजी और शाह पहले से ही घाटी में सक्रिय थे और पुंछ जैसे अन्य हमलों में भी इनकी भूमिका सामने आ चुकी है।

दो स्थानीय युवक भी बने आतंक का चेहरा

जांच में सामने आया कि अनंतनाग के बिजबेहरा निवासी आदिल गुरी और पुलवामा का अहसान 2018 में पाकिस्तान गए थे, जहां इन्होंने आतंकी प्रशिक्षण लिया और फिर भारत लौटकर आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बन गए। इन दोनों का संपर्क लश्कर के शीर्ष सरगनाओं से रहा है।

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🗣️ उर्दू में संवाद, धार्मिक पहचान पूछकर दी गई मौत

हमले के दौरान आतंकियों ने उर्दू भाषा में संवाद किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकियों ने पर्यटकों से उनकी धार्मिक पहचान से संबंधित सवाल पूछे। जो पर्यटक स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए, उन्हें नजदीक से गोली मार दी गई। यह हमले की सांप्रदायिक मानसिकता को उजागर करता है।

🏞️ सीसीटीवी के अभाव में जांच में कठिनाई, पीर पंजाल की ओर भागे आतंकी

हमले का इलाका बैसरन पूरी तरह से खुला और प्राकृतिक स्थल है। यहां कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं है, जिससे जांच एजेंसियों को काफी कठिनाई हो रही है। अनुमान है कि हमला करने के बाद आतंकी पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों की ओर भाग गए, जहां तलाश अभियान जारी है।

💻 सैफुल्लाह कसूरी का विवादित वीडियो बना नई जांच की कड़ी

जांच एजेंसियों की नजर अब लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेता हाफिज सईद के सहयोगी सैफुल्लाह कसूरी पर है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में वह कहता दिख रहा है,

“कश्मीर 2 फरवरी 2026 तक पवित्र भूमि बन जाएगा और मुजाहिद्दीन अपने हमले तेज करेंगे।”

इस वीडियो के सामने आने के बाद एजेंसियां कसूरी की भूमिका और संपर्कों की जांच में जुट गई हैं। माना जा रहा है कि इसने आतंकी हमले को वैचारिक और रणनीतिक समर्थन दिया है।

🛡️ भारत सरकार सख्त, कार्रवाई के संकेत

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आतंकी हमलों के खिलाफ अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, और सेना प्रमुख लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पीर पंजाल क्षेत्र में विशेष बलों और ड्रोन की मदद से तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

📊 विश्लेषण: आतंकियों की पहचान से बदलेगा जांच का रुख

इन पांच आतंकियों की पहचान होने के बाद अब जांच का रुख और भी तेज हो गया है। जहां पाकिस्तान की भूमिका और लश्कर जैसे संगठनों की संलिप्तता फिर उजागर हो रही है, वहीं यह भी स्पष्ट हो रहा है कि घाटी में आतंक की जड़ें अब भी गहरी हैं। इस हमले ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया नेटवर्क को और मजबूत करने की चुनौती भी पेश की है।

आतंक के खिलाफ एकजुटता और कार्रवाई का समय

यह हमला सिर्फ कश्मीर या पर्यटकों पर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता पर सीधा हमला है। जैसे सैयद आदिल हुसैन शाह जैसे भारतीय मुस्लिमों ने पर्यटकों को बचाते हुए अपनी जान कुर्बान की, वैसे ही अब पूरे देश को आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ एकजुट होना होगा।

भारत सरकार के पास अब राजनयिक, सैन्य और खुफिया तीनों स्तरों पर एक निर्णायक कार्रवाई का अवसर है। यह वक्त निष्क्रिय रहने का नहीं, बल्कि आतंक को उसकी जड़ से उखाड़ फेंकने का है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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