
जमशेदपुर: पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु श्री शिबू सोरेन के सम्मान में आज राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन द्वारा एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आज सुबह 11 बजे जमशेदपुर के ईएसआईसी डिस्पेंसरी, प्रथम तल, न्यू कालिमाटी रोड, मेहुलबेरा चौक स्थित कार्यालय में संपन्न हुआ।

इस भावुक क्षण में संगठन के अधिकारीयों ने दिवंगत नेता को गहरे सम्मान और श्रद्धा के साथ नमन किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार मौर्य ने कहा
“आज हम एक युगपुरुष दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को अंतिम विदाई देने एकत्र हुए हैं, जिनका जीवन, संघर्ष और सेवा का अद्वितीय उदाहरण रहा है, वे न केवल झारखंड के बल्कि पूरे देश के जनवादी, जननेता एवं आदिवासियों के सच्चे नेता थे। उनका जन्म रामगढ़ ज़िले के नेमरा गाँव में हुआ, जहाँ उन्होंने बचपन में ही सामाजिक अन्याय का सामना किया। अपने पिता की हत्या जैसे व्यक्तिगत आघात को उन्होंने सामाजिक परिवर्तन के मिशन में बदल दिया। उन्होंने 18 वर्ष की आयु में ही ‘संथाल नवयुवक संघ’ का गठन किया और आगे चलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। उन्होंने आदिवासियों की ज़मीन और अधिकार के लिए ज़बरदस्त आंदोलन चलाए, और अपने जीवन को झारखंड व आदिवासी समाज के उत्थान में समर्पित कर दिया। दिशोम गुरु शिबू सोरेन न केवल झारखंड राज्य के निर्माण के अग्रदूत रहे, बल्कि उन्होंने आदिवासी समाज, किसानों, और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया।”

महासचिव कमलेश गिरी ने कहा
“दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी का राजनैतिक जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उनका उद्देश्य सदैव स्पष्ट था — झारखंड की आत्मा को पहचान दिलाना। वे चार बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए, राज्यसभा सदस्य रहे, केंद्रीय कोयला मंत्री बने और झारखंड के मुख्यमंत्री भी। उन्होंने बार-बार साबित किया कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता नहीं, समाज सेवा है। एक जनवादी नेता के रूप में उन्होंने जमींदारों, सूदखोरों और शोषणकारी ताकतों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। वे जन अदालतें लगाकर पीड़ितों को न्याय दिलाते थे। उनके नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आदिवासी समाज को आत्मबल और पहचान दी। वे अपने कार्यों से जनमानस के दिलों में घर कर चुके थे — क्योंकि वे केवल भाषण नहीं, व्यवहार से जनसेवा करते थे।”
सचिव अमित कुमार ने कहा
“आज जब दिशोम गुरु हमारे बीच नहीं हैं, तो केवल एक नेता नहीं, एक पिता तुल्य संरक्षक हमें छोड़ कर चले गए हैं। उनका जीवन उन लाखों आदिवासी परिवारों के लिए प्रेरणा है जो अपने अधिकारों के लिए आज भी संघर्षरत हैं। वे एक जननेता थे, जिन्होंने झारखंड की अस्मिता को जाग्रत किया। उनके पुत्र हेमंत सोरेन आज मुख्यमंत्री हैं और उनके सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं। पर आज जो शून्यता हमें महसूस हो रही है, वह शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। यह केवल शोक का क्षण नहीं है, यह संकल्प का भी क्षण है — कि हम दिशोम गुरु की विचारधारा, उनके सपनों और उनके द्वारा शुरू किए गए संघर्ष को कभी नहीं भूलेंगे। झारखंड और भारतवर्ष के हर कोने में उनका नाम एक प्रतीक रहेगा — संघर्ष, सेवा और स्वाभिमान का। दिशोम गुरु शिबू सोरेन को हमारी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।”
संगठन के अधिकारीयों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके विचारों एवं संघर्षों को पत्रकारिता में अपनाने का संकल्प लिया।









































