
भारतीय सेना के इतिहास में अनेक ऐसे वीर योद्धाओं के नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं अमर वीरों में एक नाम मेजर Ajay सिंह जसरोटिया का भी है, जिनकी वीरता, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। कारगिल युद्ध के दौरान 15 जून 1999 को द्रास सेक्टर में उन्होंने अपने साथियों की रक्षा करते हुए अद्भुत साहस का परिचय दिया और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

कारगिल युद्ध के 27 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पूरा देश इस महान योद्धा को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है। उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि सच्चा सैनिक अपने राष्ट्र और साथियों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करता।
ऑपरेशन विजय भारतीय सेना के साहस की ऐतिहासिक गाथा
वर्ष 1999 में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों और सैनिकों ने कारगिल, द्रास, बटालिक तथा आसपास की ऊंची पर्वतीय चोटियों पर अवैध कब्जा कर लिया था। दुर्गम पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भारतीय सेना ने इन चोटियों को पुनः प्राप्त करने के लिए “ऑपरेशन विजय” चलाया।
यह अभियान भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे कठिन अभियानों में से एक माना जाता है। हजारों फीट की ऊंचाई, भीषण ठंड और दुश्मन की लगातार गोलाबारी के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया। इसी युद्ध में मेजर अजय सिंह जसरोटिया ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अमर बलिदान दिया।
15 जून 1999 जब वीरता ने इतिहास रच दिया
15 जून 1999 का दिन भारतीय सेना के लिए सदैव यादगार रहेगा। उस दिन द्रास सेक्टर में तैनात 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स (13 JAK RIF) की टुकड़ी दुश्मन की भीषण गोलाबारी का सामना कर रही थी।
दुश्मन की ओर से लगातार तोपों से गोले दागे जा रहे थे। पहले ही विस्फोट में छह भारतीय सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए। पूरा क्षेत्र धमाकों से गूंज रहा था और हर क्षण खतरा बढ़ता जा रहा था।
ऐसी विषम परिस्थितियों में जहां स्वयं की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है, वहीं मेजर अजय सिंह जसरोटिया ने अपने साथियों की रक्षा को सर्वोपरि माना और अद्वितीय नेतृत्व का परिचय दिया।
घायल साथियों की जान बचाने के लिए स्वयं बढ़े आगे
मेजर जसरोटिया ने बिना किसी भय के तत्काल अपने जवानों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया और स्वयं घायल सैनिकों को बचाने के लिए आगे बढ़ गए।
दुश्मन की लगातार गोलाबारी के बीच उन्होंने एक-एक घायल सैनिक तक पहुंचकर उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन की चिंता किए बिना अपने साथियों की रक्षा को अपना पहला कर्तव्य माना।
युद्धभूमि में उनका यह साहस भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं का अनुपम उदाहरण बन गया।
घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ा अपना कर्तव्य
जब मेजर Ajay सिंह जसरोटिया अपने साथियों को सुरक्षित निकालने के अभियान में जुटे थे, तभी उनके निकट एक तोप का गोला आकर फटा। विस्फोट में वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
गंभीर चोट लगने के बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्य से पीछे हटने से इनकार कर दिया। दर्द और रक्तस्राव की स्थिति में भी वे लगातार अपने साथियों की सहायता करते रहे और अंततः छह घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सफल रहे।
अपने साथियों की जान बचाने के बाद उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। उनका यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय सेना के इतिहास में अमर हो गया।
सेवा परमो धर्म की भावना का जीवंत उदाहरण
मेजर Ajay सिंह जसरोटिया का जीवन और बलिदान भारतीय सेना के आदर्श वाक्य “सेवा परमो धर्मः” की भावना को साकार करता है।
उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा सैनिक अपने राष्ट्र और साथियों की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने से कभी पीछे नहीं हटता। उनका साहस, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत है।
असाधारण वीरता के लिए मिला सेना मेडल
मेजर अजय सिंह जसरोटिया की असाधारण वीरता और सर्वोच्च बलिदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से अलंकृत किया।
यह सम्मान केवल एक सैनिक की बहादुरी का पुरस्कार नहीं, बल्कि राष्ट्र की ओर से उस अमर बलिदान को नमन है जिसने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।
आज भी प्रेरणा देता है उनका नेतृत्व और समर्पण
कारगिल युद्ध के 27 वर्ष बाद भी मेजर जसरोटिया का जीवन युवाओं और सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उनका नेतृत्व हमें सिखाता है कि एक सच्चा नेता वही होता है जो संकट की घड़ी में सबसे आगे खड़ा होकर अपने साथियों का मार्गदर्शन करे।
उन्होंने अपने कर्मों से यह सिद्ध किया कि राष्ट्र सेवा केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि सर्वोच्च धर्म है।
देश की सुरक्षा के पीछे छिपे हैं अनगिनत बलिदान
आज भारत सुरक्षित और मजबूत है क्योंकि हमारी सीमाओं पर हजारों सैनिक कठिन परिस्थितियों में दिन-रात डटे रहते हैं। कारगिल युद्ध के वीरों का बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि देश की स्वतंत्रता और अखंडता की रक्षा के लिए अनगिनत सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी है।
मेजर अजय सिंह जसरोटिया का बलिदान हमें राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यपरायणता का संदेश देता है तथा हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना को और प्रबल बनाता है।
राष्ट्र की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि
कारगिल विजय की गौरवगाथा में मेजर अजय सिंह जसरोटिया का नाम सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उनका अदम्य साहस, अद्वितीय नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
आज पूरा राष्ट्र इस अमर वीर सपूत को शत-शत नमन करता है और उनके त्याग को कृतज्ञ भाव से स्मरण करता है।
“जब तक सूरज-चाँद रहेगा, मेजर अजय सिंह जसरोटिया का नाम रहेगा।”
विनम्र श्रद्धांजलि। 🇮🇳🌺🙏







































