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Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) — आस्था और भक्ति का संगम

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On: April 13, 2026 7:50 AM
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चक्रधरपुर: Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) में हर साल लगने वाला मेला आस्था और भक्ति का अनुपम संगम बन जाता है। “शक्ति की गोद में शिव का वास, श्रद्धा से पूर्ण हो सबकी आस।” यह पंक्ति बिल्कुल सटीक बैठती है इस दिव्य स्थल पर। यहाँ काशी विश्वनाथ से सिद्ध होकर लाए गए शिवलिंग के साथ माँ भगवती की कृपा भक्तों के सारे कष्ट हर लेती है। आज हम इस Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) की महिमा, इतिहास, मान्यताओं और हर साल लगने वाले मेले की पूरी कहानी जानेंगे। अगर आप भी भक्ति के इस संगम में शामिल होना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। चलिए, शुरू करते हैं इस आध्यात्मिक यात्रा को।

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Maa भगवती सिद्धपीठ का ऐतिहासिक महत्व

Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित एक प्राचीन धार्मिक केंद्र है। चक्रधरपुर से थोड़ी दूरी पर बसे इस केरा गाँव में यह पीठ सदियों से भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि यह शिवलिंग काशी विश्वनाथ मंदिर से सिद्ध होकर यहाँ प्रतिष्ठित किया गया था। स्थानीय कथाओं के अनुसार, एक भक्त ने काशी से यह लिंग लाकर Maa भगवती के सान्निध्य में स्थापित किया, जहाँ से शिव और शक्ति का यह अनोखा संयोग हुआ।

यह पीठ आदिशक्ति माँ भगवती और भगवान शिव का एक साथ विराजमान होने का प्रतीक है। यहाँ का वातावरण इतना शांत और पवित्र है कि पहली ही दर्शन से मन को सुकून मिल जाता है। कोल्हान क्षेत्र के लोग इसे अपनी कुलदेवी और इष्टदेव के रूप में पूजते हैं। इतिहासकारों के अनुसार, यह पीठ आदिवासी संस्कृति और वैदिक परंपराओं का सुंदर मेल है, जहाँ हिंदू और आदिवासी दोनों मिलकर भक्ति में लीन हो जाते हैं। Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक महत्व का भी स्थल है, जहाँ हर साल हजारों लोग एकत्रित होते हैं।

सिद्ध शिवलिंग और Maa भगवती की दिव्य महिमा

Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) का मुख्य आकर्षण वह सिद्ध शिवलिंग है, जो काशी से आया है। इस लिंग पर जलाभिषेक करने से भक्तों के कष्ट निवारण की मान्यता है। Maa भगवती की मूर्ति शिवलिंग के समीप विराजमान है, जो शक्ति-शिव के योग को दर्शाती है। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ दर्शन मात्र से संतान प्राप्ति, रोग निवारण और धन-समृद्धि की कामना पूर्ण होती है।

स्थानीय किंवदंतियों में कहा जाता है कि एक बार महादेव स्वयं यहाँ प्रकट हुए थे और Maa भगवती ने उनके स्वागत में पूजा की। तब से यह पीठ सिद्धपीठ कहलाया। मंदिर परिसर में घंटियों की झनकार और भजन-कीर्तन का माहौल हमेशा बना रहता है। विशेष रूप से नवरात्रि और शिवरात्रि पर यहाँ भक्तों का ताँता लग जाता है। Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) की यह महिमा कोल्हान के कोने-कोने तक फैली हुई है, और दूर-दराज से लोग पदार्थ चढ़ाने आते हैं।

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शिवलिंग की सिद्धि की कथा

एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण को काशी में स्वप्न आया कि वह शिवलिंग को कोल्हान ले आए। कठिन यात्रा के बाद वह केरा पहुँचा, जहाँ Maa भगवती प्रकट होकर बोलीं, “यहाँ मेरा आशीर्वाद है।” तब से यह लिंग सिद्ध माना जाता है। आज भी भक्त दूध, बेलपत्र और जल से अभिषेक करते हैं।

मेलू का भव्य आयोजन आस्था का महापर्व

हर साल 13 तारीख को Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) में ‘मेलू’ का आयोजन होता है, जो कोल्हान का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस वर्ष भी 13 अप्रैल को पूरा कोल्हान उमड़ पड़ा। हजारों श्रद्धालु ट्रक, बस और पैदल आते हैं। मेला परिसर में भोलेनाथ का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है – पुष्पमालाओं, चंदन और धूप से सजा शिवलिंग मनमोहक लगता है।

मेले में रंग-बिरंगे स्टॉल लगते हैं, जहाँ प्रसाद, पूजा सामग्री और आदिवासी हस्तशिल्प बिकते हैं। शाम को भजन संध्या और डांडा नृत्य होता है, जो स्थानीय संस्कृति को जीवंत कर देता है। रातभर जागरण चलता है, जिसमें भक्त माँ भगवती के जयकारे लगाते हैं। इस वर्ष का मेला विशेष रूप से भव्य रहा, जहाँ सुगंधित पुष्पों से मंदिर भक्तिमय हो गया। Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) का यह मेलू न केवल पूजा-अर्चना का, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है।

मेले की विशेषताएँ

  • जलाभिषेक: सुबह से शाम तक सिद्ध शिवलिंग पर जल चढ़ाने की होड़।
  • श्रृंगार दर्शन: भगवान का फूलों और रत्नों से सजा रूप।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: लोक नृत्य, भजन और रामलीला।
  • प्रसाद वितरण: माँ भगवती का विशेष भोग सभी को मिलता है।

कैसे पहुँचें माँ भगवती सिद्धपीठ?

Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) तक पहुँचना आसान है। चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से मात्र 10-15 किमी दूर यह पीठ है। रांची से बस या ट्रेन से चक्रधरपुर आकर ऑटो या टैक्सी लें। मेले के दौरान विशेष शटल बसें चलती हैं। सड़क मार्ग से NH-20 से गुजरते हुए केरा गाँव आसानी से मिल जाता है। पार्किंग की उचित व्यवस्था है, लेकिन भीड़ को ध्यान में रखें।

यदि आप झारखंड के अन्य स्थलों से आ रहे हैं, तो चाईबासा या सरायकेला होते हुए पहुँच सकते हैं। मेले के समय रुकने के लिए धर्मशालाएँ उपलब्ध हैं। Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) आने के लिए सबसे अच्छा समय फरवरी-मार्च या नवरात्रि है।

भक्तों के अनुभव और चमत्कार

Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) से जुड़े असंख्य चमत्कार भक्त बताते हैं। एक भक्त ने बताया, “मेरी बेटी को वर्षों से बीमारी थी, यहाँ दर्शन के बाद स्वस्थ हो गई।” दूसरा कहते हैं, “व्यापार में नुकसान हो रहा था, मेलू में मन्नत माँगी तो सब ठीक हो गया।” इन अनुभवों से पीठ की महिमा और बढ़ जाती है। कोल्हान के लोग इसे अपनी शक्ति मानते हैं।

Maa भगवती सिद्धपीठ, केरा (चक्रधरपुर) आस्था और भक्ति का ऐसा संगम है, जहाँ शक्ति की गोद में शिव विराजते हैं। काशी सिद्ध शिवलिंग, माँ भगवती की कृपा और मेले का भव्य आयोजन हर भक्त को मोहित कर देता है। इस वर्ष के मेले की तरह हर बार यहाँ हजारों लोग कष्ट निवारण के लिए आते हैं। यदि आप कोल्हान में हैं, तो अवश्य दर्शन करें। जय Maa भगवती! जय बाबा विश्वनाथ! 

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