मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

धरती आबा बिरसा मुंडा (Dharti Aaba Birsa Munda) पर करुणामय मंडल की कविता

On: June 9, 2025 8:53 PM
Follow Us:

Karunamay Mandal’s poem on Dharti Aaba Birsa Munda

---Advertisement---
Netaji Advertisement

🌿 धरती आबा को नमन

“जल जंगल जमीन से
जिनके थे अनोखे बंधन।
सुरक्षा में जो हुए कुर्बान
हे धरती आबा तुझे नमन।।

शोषित वंचित उपेक्षितों को
दिए संगठित सम्मान।
हर संकट में साथ निभाये
बनके उनके भगवान।।

मात्र पच्चीस वर्ष के परमायू
शायद मिला था वरदान।
पीड़ित मातृभूमि के लिए
दे दिए जो बलिदान।।

थर्राया था जिस वीर ने
हुकूमत ए अंग्रेजों की।
आगाज थी वो लड़ाई की
झारखंड के पूर्वजों की।।

9 जून वो पुण्य तिथि है
बिरसा तेरे बलिदान का।
ये रांची जेल भी गवाह है
आबा तेरे महाप्रयाण का।।

ना जाने तेरे स्वप्न कंहा तक
हमने सफल बनाया है।
संज्ञान की ये उत्कृष्ट पल है
क्या खोया क्या पाया है।।

आए थे तुम इस धरा पर
ये भूमि गौरवशाली है।
वीर बिरसा तेरे स्मरण में
आज भक्ति श्रद्धांजलि है।।”

✍️ लेखक: करुणामय मंडल
पूर्व जिला पार्षद पोटका
पूर्वी सिंहभूम झारखंड
9693623151
प्रस्तुति – 9 जून 2025
सुबह – 9.43 मिनट

यह कविता बिरसा मुंडा को सच्ची श्रद्धांजलि है, जो आदिवासी समाज के गौरव और संघर्ष की पहचान हैं।

करुणामय मंडल, पूर्व जिला पार्षद, पोटका (पूर्वी सिंहभूम, झारखंड) द्वारा लिखी गई यह कविता महान आदिवासी नेता धरती आबा बिरसा मुंडा को समर्पित है। इस कविता में बिरसा मुंडा के जल-जंगल-जमीन से प्रेम, अंग्रेजी शासन के खिलाफ वीरता, और जनजातीय समाज के लिए किए गए बलिदान को सजीव रूप में उकेरा गया है।

कविता के भावनात्मक पक्ष का वर्णन

  1. प्राकृतिक जुड़ाव और बलिदान
    – कविता की शुरुआत बिरसा मुंडा के “जल, जंगल, जमीन” से आत्मिक संबंध से होती है। ये वही मूल्य हैं, जिनके लिए उन्होंने अपनी जान तक दे दी। कवि ने उन्हें “धरती आबा” कहकर नमन किया है, जो आदिवासियों की आस्था और सम्मान का प्रतीक है।
  2. शोषितों के मसीहा
    – कवि बताते हैं कि बिरसा मुंडा ने समाज के वंचित, शोषित, और उपेक्षित वर्गों को संगठित किया और उन्हें आत्मसम्मान दिलाया। उन्हें भगवान का रूप तक बताया गया है जो हर संकट में अपने लोगों के साथ खड़े रहे।
  3. वीरता और संघर्ष
    – मात्र 25 वर्ष की उम्र में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख देना, कविता में यह वीर गाथा गर्व से बयां की गई है। कविता यह भी याद दिलाती है कि बिरसा मुंडा की शहादत ने झारखंड में स्वाधीनता संग्राम की नींव रखी।
  4. 9 जून – बलिदान दिवस
    – 9 जून की तिथि को ‘पुण्य तिथि’ बताते हुए, कवि रांची जेल को ‘महाप्रयाण का गवाह’ बताते हैं। यह पंक्तियाँ पाठक को भावविभोर कर देती हैं।
  5. आत्ममंथन का स्वर
    – कविता अंत में पाठकों से एक सवाल पूछती है: “ना जाने तेरे स्वप्न कहाँ तक हमने सफल बनाया है?” यह आत्मावलोकन की प्रेरणा देती है कि क्या हम आज भी बिरसा के सपनों को साकार कर रहे हैं?

🌼 कविता की विशेषताएँ

  • भाषा: सादा, प्रभावी और भावनाओं से ओतप्रोत।
  • शब्द चयन: ‘परमायू’, ‘महाप्रयाण’, ‘संज्ञान’, ‘श्रेष्ठ पल’ जैसे शब्द कविता को साहित्यिक गरिमा देते हैं।
  • भाव: श्रद्धा, संघर्ष, आत्ममंथन और प्रेरणा—चारों भाव समाहित हैं।

करुणामय मंडल की यह कविता न केवल श्रद्धांजलि है, बल्कि यह एक सामाजिक दस्तावेज की तरह भी है जो हमें याद दिलाती है कि हमारी आज़ादी और अस्मिता की नींव किन वीरों ने रखी। यह रचना भावनाओं, इतिहास और प्रेरणा का अद्भुत संगम है।

---Advertisement---
Netaji Advertisement
---Advertisement---
Netaji Advertisement

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment