
- झामुमो ने चाईबासा में भाजपा नेताओं चंपई सोरेन, मधु कोड़ा, श्रीमती गीता कोड़ा और केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की शवयात्रा निकाली और पोस्ट ऑफिस चौक पर उनके पुतले फूँके।
चाईबासा (जय कुमार): झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा नेताओं के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और उन पर कोल्हान के शांतिपूर्ण माहौल में राजनीतिक स्वार्थ साधने और आदिवासियों को भड़काने का आरोप लगाया। झामुमो कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध जताने के लिए भाजपा नेता चंपई सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, सांसद गीता कोड़ा और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पुतले फूँके।

विरोध मार्च घंटाघर से शुरू होकर आम्रपाली होटल होते हुए पोस्ट ऑफिस चौक पहुँचा, जहाँ नेताओं के पुतले फूँके गए। इस अवसर पर बोलते हुए झामुमो जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि भाजपा नेताओं ने नो-एंट्री और सड़क दुर्घटनाओं को हथियार बनाकर कोल्हान की शांति भंग करने की साजिश रची है। उनका उद्देश्य मंत्री दीपक बिरुआ और राज्य सरकार की छवि धूमिल करके आगामी घाटशिला उपचुनाव में राजनीतिक लाभ प्राप्त करना है।

श्री देवगम ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “4000 करोड़ के घोटालेबाज और खनन माफिया का मुखिया” बताया, जो अभी भी अवैध वसूली में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की शह पर निर्दोष आदिवासी युवाओं को कानूनी जाल में फंसाया जा रहा है।
झामुमो नेता ने कहा कि भाजपा की राजनीति कोल्हान को हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश कर रही है, लेकिन कोल्हान की जनता अब जाग चुकी है और किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने देगी। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री दीपक बिरुआ को आदिवासियों का सच्चा हितैषी बताया और लोगों से भाजपा के बहकावे में न आने की अपील की।
झामुमो ने चेतावनी दी कि कोल्हान में भाजपा नेताओं की नकारात्मक राजनीति किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

झामुमो जिला सचिव राहुल आदित्य, जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी, दीपक प्रधान, इकबाल अहमद, विश्वनाथ बारा, डोमा मिंज, मनोज लागुरी, निसार हुसैन (डोगर), तहसीन अहमद, सोमनाथ चातर, मंगल तुबिद, नारायण तुबिद, दिनेश तुंबलिया, सतीश सुंडी, मन्नाराम कुदादा, चंद्र मोहन बिरूवा, बिपिन पूर्ति, विकास गुप्ता, प्रेम गुप्ता, लाला राउत, दिनेश चंद्र महतो, दिलवर हुसैन, गणेश बोदरा, अग्ना कंडुलना, अकबर खान, बंधना उराँव, रीमू बहादुर, गोवर्धन चौरसिया, ताराकांत सिजुई, रघुनाथ तियु, जवाहर बोइपाई, जरीफ अहमद, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद अहकमुल, अहमद हुसैन, सब्बीर अहमद, राहुल तिवारी, हीरालाल कारजी, तारिक रजा, राजू दास, संदेश सरदार, वाशिद अहमद, जगमोहन गोप, तुराम बिरुली, संजय दास, महती हांसदा, राजीव हांसदा, पुलेंद्र महतो, रंजीत सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और ग्रामीण गोप, दोफेदार हेसा, अर्जुन बानरा, प्रदीप लागुरी, उदय कारवा, बीरसिंह सुंडी, मुन्ना सुंडी, राजाराम गुप्ता, परवेज कैसर, मोनिका बोइपाई, बसंती सुंडी, शीला जामुदा, सुनीता देवगम, रानी बारी, प्रमिला पिंगुवा, चमेली, सुखमती बानरा उपस्थित थे।











































