
जबलपुर, मध्य प्रदेश: जबलपुर के बरगी डैम पर शुक्रवार को नर्मदा नदी में उतरा पर्यटक क्रूज़ बोट पलटने के दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ़ कई परिवारों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी, बल्कि मां की ममता की वह दिल दहला देने वाली तस्वीर लेकर आया जो पूरे देश को भावुक कर गई। हादसे के लगभग 15 घंटे बाद निकाले गए शवों में मां और उसके मासूम बेटे को एक‑दूसरे से लिपटे हुए देख सभी की आँखें नम हो गईं।

हादसा कैसे हुआ?
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक़ शुक्रवार शाम करीब छह बजे बरगी डैम पर नर्मदा नदी में चल रहे एक पर्यटक क्रूज़ पर अचानक तूफानी हवाओं और तेज़ लहरों के बीच बोट पलट गया। इस बोट पर दर्जनों पर्यटक, जिनमें कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, सवार थे। अचानक आई लहरों और तेज़ हवाओं के बीच कई यात्री पानी में फँस गए, जिसके बाद बचावकर्मियों ने तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया।
प्रारंभिक जांच और स्थानीय प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार हादसे में कम से कम 5–6 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल या लापता हो गए। रात भर चले बचाव अभियान में राज्य आपदा मोचन बल (SDF), नौसेना, स्थानीय नौकाओं और निजी बोट चालकों की टीमें शामिल रहीं।
15 घंटे बाद सामने आई दिल दहला देने वाली तस्वीर
हादसे के बाद रात भर जारी रहे बचाव कार्य के दौरान रेस्क्यू टीम ने नर्मदा के पानी से मां और उसके मासूम बच्चे के शव निकाले। जब इन शवों को ऊपर लाया गया तो जो दृश्य दिखा, वह सभी को हिला गया: मां के सीने पर सिर टिकाए बेटा, जबकि मां की बाहें अभी भी उसे गले लगाए हुए थीं। ऐसा लग रहा था, मानो अंतिम पल तक भी मां ने अपने बच्चे को किसी भी खतरे से बचाने की कोशिश की हो।
यह तस्वीर सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तेज़ी से वायरल हो गई, जिसने “मां की ममता” की अमर गाथा को एक नई ऊंचाई पर खड़ा कर दिया। कई बचावकर्मियों ने बताया कि यह मंजर देख उनकी आँखें भर आईं और कुछ लोग रोते हुए वापस लौट गए।
प्रशासन और जांच पर जोर
हादसे के बाद जबलपुर प्रशासन ने घटना की मुकम्मल जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बोट की दुरुपयोग, लाइसेंसिंग, यात्री संख्या और मौसम की चेतावनी के बावजूद चलाए जाने जैसे कई पहलुओं पर जांच की जाएगी। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत राशि और चिकित्सा सहायता का ऐलान किया है, साथ ही घटनास्थल पर अस्थायी राहत शिविर भी लगाए गए हैं।
एक माँ की अमर गवाही
यह तस्वीर बस एक दुर्घटना की दृष्टि नहीं, बल्कि माँ के निस्वार्थ प्रेम की जीवंत गवाही बन गई है। अंतिम सांस तक माँ ने अपने बच्चे को अपनी बाहों में कसकर थामे रखा, जैसे स्वयं को भूलकर केवल उसकी रक्षा ही उसका धर्म हो। एक ओर यह घटना यात्रा सुरक्षा, नियमों की अनदेखी और पर्यटन नीतियों पर सवाल खड़े करती है, तो दूसरी ओर यह माँ की असीम ममता को जीवन से भी आगे बढ़ाकर दिखाती है।
ऐसी महान, त्यागमयी और ममतामयी माँ को समाज की ओर से शत–शत नमन।











































