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Illegal mining: दामोदर नदी पर अवैध खनन का कहर: प्रशासनिक संरक्षण में प्रकृति का दोहन?

On: February 22, 2026 8:13 PM
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Illegal mining: धनबाद ज़िले में दामोदर नदी के पेट से लेकर किनारे तक चल रहा अवैध कोयला खनन अब भयावह रूप ले चुका है। धनबाद–बोकारो की सीमा पर स्थित बारनी घाट के सामने नदी की धारा मोड़कर, किनारे पर मोहाना बनाकर और भारी मशीनों—विशेषकर पोकलेन—के जरिए कोयले का उत्खनन किया जा रहा है। इस अवैध गतिविधि के चलते न सिर्फ नदी का अतिक्रमण और प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि ग्रामीण पेयजल परियोजनाएँ भी नाकाम होती दिख रही हैं।

नदी की धारा से छेड़छाड़, प्रकृति पर सीधा हमला

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प्रत्यक्षदर्शी तस्वीरों और स्थानीय सूचनाओं के अनुसार खननकर्ता दामोदर के किनारे एक से अधिक मोहाना बनाकर नदी के प्रवाह को प्रभावित कर रहे हैं। पोकलेन से कोयला निकाला जाता है, बोरियों में भरकर जमा किया जाता है और फिर ट्रकों से परिवहन होता है। यह सब खुलेआम—दिनदहाड़े—हो रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह गतिविधि प्रशासन की जानकारी के बिना संभव है?

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प्रशासन और पुलिस की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले की जानकारी धनबाद जिला के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को दी जा चुकी है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जान जोखिम में डालकर दूर से तस्वीरें खींचीं और संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाईं। कुछ पत्रकारों ने भी प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई का अभाव है। यह चुप्पी संदेह को और गहरा करती है कि कहीं यह सब प्रशासनिक संरक्षण में तो नहीं हो रहा?

ग्रामीण पेयजल परियोजना पर संकट

अवैध खनन से नदी का जलस्तर, जलगुणवत्ता और किनारों की स्थिरता प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप आसपास के गाँवों की पेयजल परियोजनाएँ फेल हो रही हैं। स्वच्छ जल का अधिकार खतरे में है—जो सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य और आजीविका पर चोट है।

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प्रदूषण, अतिक्रमण और दीर्घकालिक नुकसान

दामोदर के पेट से खनन न सिर्फ तत्काल पर्यावरणीय नुकसान पहुँचाता है, बल्कि दीर्घकाल में बाढ़, कटाव और जैवविविधता के क्षरण का जोखिम भी बढ़ाता है। नदी-तंत्र के साथ ऐसी छेड़छाड़ भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रही है।

विधानसभा में उठेगा मुद्दा

इस गंभीर मामले को विधानसभा के बजट सत्र में उठाने का निर्णय लिया गया है। यह केवल अवैध कोयला खनन का प्रश्न नहीं, बल्कि नदी की सुरक्षा, ग्रामीण जल-जीवन और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा है।

मांगें: त्वरित और कठोर कार्रवाई

  1. बारनी घाट क्षेत्र में चल रहे सभी अवैध खनन कार्यों पर तत्काल रोक।
  2. दोषी खननकर्ताओं के साथ-साथ संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई।
  3. नदी के अतिक्रमण हटाकर पर्यावरणीय क्षति का आकलन और पुनर्स्थापन योजना।
  4. प्रभावित ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं का त्वरित पुनर्जीवन।
  5. निगरानी के लिए स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट और सतत मॉनिटरिंग।

दामोदर नदी झारखंड की जीवनरेखा है। यदि आज अवैध खनन पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कल इसका खामियाजा पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने को भुगतना पड़ेगा। अब समय है—कार्रवाई का, जवाबदेही का और दामोदर को बचाने का।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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