
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में आम लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित और मिलावट रहित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग ने Chaibasa नगर में विशेष जांच अभियान चलाया। इस अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री धनेश्वर हेम्ब्रम ने गांधी मैदान के आसपास संचालित विभिन्न होटलों, भोजनालयों और ठेलों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान न केवल तैयार खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच की गई, बल्कि स्वच्छता, खाद्य लाइसेंस, रसोई व्यवस्था और कर्मचारियों की व्यक्तिगत साफ-सफाई जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की भी बारीकी से पड़ताल की गई।

इस सघन अभियान के दौरान क्षेत्र के कई प्रमुख भोजनालय जांच के दायरे में आए। इनमें मनोज होटल, कोल्हान होटल, गुड्डू होटल, रामजी होटल, गणेश होटल, अजय होटल और अमित होटल सहित अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। विभागीय कार्रवाई के दौरान कुछ राहत देने वाली बातें सामने आईं, तो दूसरी ओर कई गंभीर अनियमितताएं भी उजागर हुईं, जिन पर विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित संचालकों को नोटिस जारी किया है।
आम लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए चला विशेष अभियान
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाया गया यह औचक निरीक्षण अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य शहर में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक स्पष्ट संदेश देना भी था। आज के समय में सड़क किनारे के ठेलों, छोटे भोजनालयों और स्थानीय होटलों में बड़ी संख्या में लोग भोजन करते हैं। ऐसे में यदि भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता या खाद्य सुरक्षा मानकों से समझौता होता है, तो इसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने चाईबासा नगर के व्यस्त इलाके गांधी मैदान के आसपास के उन प्रतिष्ठानों को निरीक्षण के लिए चुना, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग भोजन, नाश्ता और मिठाइयों का सेवन करते हैं। विभाग की कोशिश थी कि मौके पर ही खाद्य पदार्थों की स्थिति, उनके भंडारण, तैयारी और परोसने के तरीकों की जांच की जाए तथा आवश्यकतानुसार तत्काल निर्देश भी दिए जाएं।
किन-किन प्रतिष्ठानों में हुई जांच
निरीक्षण अभियान के दौरान जिन प्रमुख होटलों और भोजनालयों की जांच की गई, उनमें मनोज होटल, कोल्हान होटल, गुड्डू होटल, रामजी होटल, गणेश होटल, अजय होटल और अमित होटल के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इसके अलावा गांधी मैदान के आसपास संचालित कुछ ठेलों और छोटे खाद्य विक्रेताओं की भी जांच की गई।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इन प्रतिष्ठानों में उपलब्ध तैयार खाद्य सामग्री, रसोईघर की साफ-सफाई, भंडारण व्यवस्था, उपयोग में लाई जा रही सामग्री, पानी की गुणवत्ता, खाद्य रंगों का इस्तेमाल और कर्मचारियों की स्वच्छता संबंधी स्थिति का निरीक्षण किया। विभाग की यह कार्रवाई यह बताती है कि अब केवल बड़े प्रतिष्ठान ही नहीं, बल्कि छोटे होटल और ठेले भी खाद्य सुरक्षा के दायरे से बाहर नहीं रहेंगे।
दाल, हल्दी, भुजिया, चोखा, लड्डू और जलेबी की हुई जांच
निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने उन खाद्य पदार्थों की विशेष जांच कराई, जो आम तौर पर स्थानीय भोजनालयों में बड़े पैमाने पर तैयार और परोसे जाते हैं। इनमें दाल, हल्दी, भुजिया, चोखा, लड्डू और जलेबी जैसी वस्तुएं शामिल थीं। इन खाद्य पदार्थों में विशेष रूप से हानिकारक अखाद्य रंग ‘मेटानिल येल्लो’ की मौजूदगी की जांच की गई।
मेटानिल येल्लो एक ऐसा रासायनिक रंग है, जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों में नहीं किया जाना चाहिए। इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है और लंबे समय तक इसके सेवन से गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसी कारण खाद्य सुरक्षा विभाग ऐसे रंगों के इस्तेमाल को लेकर विशेष सतर्कता बरतता है।
राहत की बात यह रही कि जांच के दौरान जिन खाद्य पदार्थों की जांच की गई, उनमें मेटानिल येल्लो की उपस्थिति नहीं पाई गई। इससे यह संकेत मिला कि कम से कम इस स्तर पर संबंधित प्रतिष्ठानों में हानिकारक अखाद्य रंग का प्रयोग नहीं किया जा रहा था। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया कि केवल एक बार की जांच के आधार पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और आगे भी ऐसे निरीक्षण जारी रहेंगे।
संचालकों को खाद्य रंगों के सही इस्तेमाल के बारे में किया गया जागरूक
निरीक्षण के दौरान केवल जांच ही नहीं की गई, बल्कि होटल और भोजनालय संचालकों को अनुमत खाद्य रंगों के सीमित, नियंत्रित और सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक भी किया गया। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने उन्हें समझाया कि बाजार में उपलब्ध हर रंग खाद्य उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं होता। कई बार आकर्षक दिखाने के लिए मिठाइयों, नमकीन या अन्य खाद्य पदार्थों में ऐसे रंग मिला दिए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
अधिकारियों ने संचालकों से कहा कि यदि खाद्य रंगों का इस्तेमाल करना हो, तो केवल वही रंग उपयोग में लाए जाएं जो खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों और निर्धारित मात्रा में ही प्रयोग किए जाएं। यह भी स्पष्ट किया गया कि रंगों का अंधाधुंध या अनियंत्रित इस्तेमाल न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।
जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं
जहां एक ओर मिलावट की जांच में राहत की खबर सामने आई, वहीं दूसरी ओर कई भोजनालयों में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी और गंभीर कमियां भी पाई गईं। निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि कुछ प्रतिष्ठानों में अनिवार्य खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र परिसर में प्रदर्शित नहीं किया गया था। खाद्य कारोबार से जुड़े किसी भी प्रतिष्ठान के लिए लाइसेंस या पंजीकरण का स्पष्ट प्रदर्शन बेहद जरूरी होता है, ताकि उपभोक्ता और निरीक्षण टीम दोनों यह जान सकें कि प्रतिष्ठान विधिक रूप से पंजीकृत है या नहीं।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों को रखने या परोसने में अखबार का इस्तेमाल किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह गंभीर लापरवाही मानी जाती है, क्योंकि अखबार की स्याही और कागज में मौजूद रसायन भोजन को दूषित कर सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे पदार्थों के संपर्क में आया भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
बिना लेबल वाले मसाले और अस्वच्छ रसोई व्यवस्था पर विभाग सख्त
निरीक्षण के दौरान कुछ रसोईघरों में बिना लेबल वाले हल्दी के पैकेट भी पाए गए। यह स्थिति इसलिए गंभीर मानी जाती है क्योंकि बिना लेबल वाले पैकेटों में रखे मसालों या खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्रोत और वैधता पर संदेह बना रहता है। ऐसे मामलों में यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है कि उपयोग में लाई जा रही सामग्री सुरक्षित, प्रमाणित और मानक के अनुरूप है या नहीं।
विभाग ने इसे खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खामी माना और संचालकों को साफ निर्देश दिया कि वे सभी खाद्य सामग्री को सही लेबलिंग, सुरक्षित भंडारण और साफ-सुथरी व्यवस्था के साथ रखें। खाद्य पदार्थों के स्रोत, पैकेजिंग और उपयोग की पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि यही उपभोक्ता के भरोसे और खाद्य सुरक्षा का आधार बनती है।
बिना हेडगियर और एप्रोन काम करते मिले कर्मचारी
निरीक्षण में एक और महत्वपूर्ण कमी यह सामने आई कि कई भोजनालयों में भोजन बनाने और परोसने वाले कर्मचारी बिना हेडगियर और एप्रोन के काम करते मिले। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों के लिए साफ-सुथरे वस्त्र, हेडकवर, एप्रोन और व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना अनिवार्य होता है। ऐसा न करने पर भोजन में बाल, धूल, पसीना या अन्य अशुद्धियां जाने का खतरा बढ़ जाता है।
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वच्छता भोजन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ी हुई है। यदि रसोई में काम करने वाले कर्मचारी बुनियादी साफ-सफाई का पालन नहीं करेंगे, तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को जोखिम हो सकता है। इसलिए सभी प्रतिष्ठानों को निर्देश दिया गया कि वे अपने कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रूप से हेडगियर, एप्रोन और स्वच्छ कार्य-व्यवस्था सुनिश्चित करें।
संबंधित प्रतिष्ठानों को सुधार के लिए जारी किया गया आधिकारिक नोटिस
निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी द्वारा संबंधित होटल और भोजनालय संचालकों को आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है। इन नोटिसों के माध्यम से संचालकों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि उनके प्रतिष्ठान में कौन-कौन सी कमियां पाई गईं और उन्हें किस समयसीमा के भीतर सुधारना होगा।
विभाग का यह कदम केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक भी माना जा रहा है। प्रशासन चाहता है कि भोजनालय संचालक नियमों को समझें, कमियों को दूर करें और खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन करते हुए अपने प्रतिष्ठानों का संचालन करें। हालांकि यह भी साफ कर दिया गया है कि यदि नोटिस के बावजूद सुधार नहीं किया गया, तो आगे की कार्रवाई कहीं अधिक कठोर हो सकती है।
विभाग के सख्त निर्देश स्टेनलेस स्टील के औजार, स्वच्छ पानी और लाइसेंस का प्रदर्शन अनिवार्य
खाद्य सुरक्षा विभाग ने निरीक्षण के बाद सभी संबंधित संचालकों को कई सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि भोजन तैयार करने में स्टेनलेस स्टील के काटने वाले औजारों का ही इस्तेमाल किया जाए। इसके पीछे कारण यह है कि खराब गुणवत्ता वाले या जंग लगे औजार खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इसके साथ ही विभाग ने यह भी निर्देश दिया कि भोजन बनाने और परोसने में केवल स्वच्छ पेयजल का उपयोग किया जाए। दूषित पानी कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकता है, इसलिए पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है।
साथ ही, सभी प्रतिष्ठानों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि:
- खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र मुख्य परिसर में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो,
- कर्मचारियों के लिए हेडगियर और एप्रोन अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों,
- खाद्य सामग्री का भंडारण साफ, सुरक्षित और लेबलयुक्त तरीके से किया जाए,
- अखबार या किसी भी असुरक्षित सामग्री का इस्तेमाल भोजन रखने या परोसने में न किया जाए।
सुधार नहीं होने पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय के भीतर अनियमितताओं में सुधार नहीं किया गया या भविष्य में दोबारा नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित भोजनालयों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई, जब्ती या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं।
विभाग की यह चेतावनी केवल औपचारिक बयान नहीं है, बल्कि यह उन सभी संचालकों के लिए स्पष्ट संदेश है जो अब तक खाद्य सुरक्षा नियमों को हल्के में लेते रहे हैं। प्रशासन चाहता है कि जनता को सुरक्षित भोजन मिले और बाजार में चल रहे भोजनालय कानून के दायरे में रहकर जिम्मेदारी के साथ काम करें।
उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं: विभाग का स्पष्ट संदेश
इस पूरे अभियान से खाद्य सुरक्षा विभाग ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि आम लोगों के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। चाहे मामला खाद्य रंगों के इस्तेमाल का हो, रसोई की स्वच्छता का, कर्मचारियों की साफ-सफाई का या खाद्य लाइसेंस के पालन का—हर स्तर पर सख्ती बरती जाएगी।
Chaibasa में हुआ यह औचक निरीक्षण न केवल स्थानीय भोजनालय संचालकों के लिए चेतावनी है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भरोसे का संदेश भी है कि प्रशासन खाद्य सुरक्षा को लेकर सतर्क है। यदि ऐसे अभियान लगातार जारी रहते हैं, तो निश्चित रूप से बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार आएगा और आम जनता को अधिक सुरक्षित एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध हो सकेगा।
मिलावट नहीं मिली, लेकिन स्वच्छता और नियमों में सुधार की बड़ी जरूरत
Chaibasa में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में यह राहत जरूर मिली कि जांच किए गए खाद्य पदार्थों में मेटानिल येल्लो जैसे हानिकारक रंग की मिलावट नहीं पाई गई, लेकिन इसके साथ ही कई होटल और भोजनालयों में स्वच्छता, लाइसेंस प्रदर्शन, सुरक्षित भंडारण और कर्मचारियों की व्यक्तिगत साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं।
यही वजह है कि विभाग ने सुधार के लिए नोटिस जारी कर सख्त निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित संचालक इन निर्देशों का कितना पालन करते हैं। यदि वे समय रहते सुधार कर लेते हैं, तो यह न केवल उनके व्यवसाय के लिए बेहतर होगा, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और भरोसे के लिए भी एक सकारात्मक कदम साबित होगा।













