
रांची: के खेलगांव में हुई National कराटे चैंपियनशिप में इनके 19 खिलाड़ियों ने कुल 19 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। और अब इन वीर योद्धाओं का भव्य सम्मान समारोह सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित हुआ। यह घटना न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे देश में प्रेरणा का स्रोत बन गई है। आइए, इस National कराटे चैंपियनशिप में व्हाईट टाइगर गोजू रियु कराटे एसोसिएशन द्वारा 19 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान समारोह आयोजित होने की पूरी कहानी को विस्तार से जानें।

National कराटे चैंपियनशिप एक भव्य मंच
National कराटे चैंपियनशिप भारत के खेल जगत का एक प्रमुख आयोजन है। इस बार रांची के खेलगांव में गुरुवार, 7 मई 2026 को यह चैंपियनशिप हुई। देशभर से करीब 350 कराटेकार इसमें शरीक हुए। झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे 9 राज्यों की टीमें मैदान में उतरीं। खास बात यह रही कि भारतीय सेना की टीम ने पहली बार पूरे जोश के साथ भाग लिया, जो प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण बना।
चैंपियनशिप का फॉर्मेट और चुनौतियां
यह चैंपियनशिप दो मुख्य वर्गों में लड़ी गई – काता (फॉर्म प्रदर्शन) और कुमिते (पूर्ण संपर्क मुकाबला)। काता में खिलाड़ी विभिन्न तकनीकों का सटीक प्रदर्शन करते हैं, जबकि कुमिते में असली जंग होती है। इतने बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा में सफल होना आसान नहीं। लेकिन व्हाईट टाइगर गोजू रियु कराटे एसोसिएशन चक्रधरपुर और गोइलकेरा शाखा की संयुक्त टीम ने कमाल कर दिया। 14 खिलाड़ियों और 5 कोचों के साथ कुल 19 सदस्यों की यह टीम पहली बार इतने बड़े मंच पर उतरी और 5 गोल्ड, 6 सिल्वर तथा 8 ब्रॉन्ज मेडल जीत लिए। पहले दिन काता में 8 पदक और दूसरे दिन कुमिते में 11 पदक – यह उपलब्धि वाकई काबिले-तारीफ है।
National कराटे चैंपियनशिप में व्हाईट टाइगर गोजू रियु कराटे एसोसिएशन द्वारा 19 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान समारोह आयोजित होना इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों में भी बड़ा सपना देखा जा सकता है। संस्था प्रमुख सेंसेई आशीष कुमार पाण्डेय ने कहा, “कम समय और संसाधनों में नए खिलाड़ियों को तैयार करना हमारा गर्व है।”
पदक विजेताओं की शानदार उपलब्धियां
अब आइए जानें इन नन्हे योद्धाओं के नाम और उनकी जीत। ये बच्चे चक्रधरपुर और गोइलकेरा के हैं, जहां संसाधन कम हैं लेकिन जज्बा बुलंद।
गोल्ड मेडल विजेता स्टार्स
- शिवांगी पाण्डेय: 14 वर्ष बालिका कैडेट ओपन कुमिते में गोल्ड और अंडर-41 किलोग्राम काता में सिल्वर। उनकी फुर्ती और सटीकता ने सबको हैरान कर दिया।
- तनवी साहू: अंडर-61 किलोग्राम कुमिते में गोल्ड और काता में सिल्वर। दोहरी सफलता ने उन्हें स्टार बना दिया।
- रिशान बक्सी: जूनियर वर्ग अंडर-26 किलोग्राम कुमिते में गोल्ड। छोटी उम्र में इतना दमखम!
- त्रिशिका सरकार: अंडर-25 किलोग्राम बालिका कुमिते में गोल्ड। उनकी चपलता देखते ही बनी।
- सुशांत सिरका: अंडर-50 किलोग्राम कुमिते में गोल्ड। संस्था का गौरव बढ़ाया।
सिल्वर और ब्रॉन्ज के हीरो
- सिम्मी शेरॉन सिरका: दो सिल्वर मेडल।
- परी गांगुली: एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज।
- क्रिसमस सिरका: एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज।
- समृद्धि पाण्डेय: दो ब्रॉन्ज।
- मोहम्मद माविया अफसर: दो ब्रॉन्ज।
- मोहम्मद जोराइज और नवीन सोनी: ब्रॉन्ज मेडल।
इसके अलावा मोहम्मद अहियान जावेद और अभ्युदय एस लाल को भी संस्था ने सम्मानित किया।
ये National कराटे चैंपियनशिप में व्हाईट टाइगर गोजू रियु कराटे एसोसिएशन द्वारा 19 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान समारोह आयोजित होने का मुख्य कारण बने। इनकी मेहनत ने साबित कर दिया कि उम्र या बैकग्राउंड मायने नहीं रखता, लगन ही सब कुछ है।
सम्मान समारोह गर्व और प्रेरणा का पल
सम्मान समारोह सरस्वती शिशु विद्या मंदिर प्रांगण में हुआ। संस्था प्रमुख सेंसेई आशीष कुमार पाण्डेय ने सीनियर ब्लैक बेल्ट प्रशिक्षकों के साथ खिलाड़ियों को सम्मानित किया। मुख्य अतिथि समाजसेवी मनोज जिंदल, विद्यालय अध्यक्ष उमाशंकर गिरी, रामकृष्ण सेवा समिति के सचिव तापस विश्वास और प्रधानाचार्य रमेश ठाकुर उपस्थित रहे। अतिथियों ने पुरस्कार, प्रमाण-पत्र दिए और भविष्य की शुभकामनाएं दीं। बड़ी संख्या में अभिभावक भी आए, जो अपने बच्चों पर गर्व से नतमस्तक थे।
कोचों की भूमिका
इस सफलता के पीछे कोचों का हाथ है। सेंसेई आशीष कुमार पाण्डेय, राहुल कुमार गांगुली, अफसर अली, वीर सिंह सिरका और उमाशंकर जाल ने महीनों की कड़ी मेहनत की। सुबह-शाम ट्रेनिंग, तकनीक पर फोकस – यही राज है। संस्था ने वादा किया कि आगे भी ऐसे सम्मान जारी रहेंगे।
गोजू रियु कराटे क्या है खासियत?
गोजू रियु कराटे जापान की एक प्रसिद्ध शैली है, जो हार्ड (गो) और सॉफ्ट (जू) तकनीकों का मिश्रण है। व्हाईट टाइगर गोजू रियु कराटे एसोसिएशन इसे चक्रधरपुर में फैला रहा है। यह न सिर्फ फिटनेस देता है बल्कि आत्मरक्षा, अनुशासन और आत्मविश्वास भी सिखाता है। राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में इसकी सफलता से साबित हो गया कि स्थानीय स्तर पर भी विश्वस्तरीय ट्रेनिंग संभव है।
कराटे के फायदे युवाओं के लिए
- शारीरिक मजबूती बढ़ती है।
- मानसिक तनाव कम होता है।
- नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
- राष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिलते हैं।
ऐसे आयोजनों से ग्रामीण बच्चे भी बड़े सपने देख सकते हैं।
भविष्य की योजनाएं और प्रेरणा
संस्था आगे भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेगी। सेंसेई आशीष ने कहा कि अगली चैंपियनशिप में और पदक लाएंगे। यह राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में व्हाईट टाइगर गोजू रियु कराटे एसोसिएशन द्वारा 19 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान समारोह आयोजित होना स्थानीय खेल संस्कृति को मजबूत करेगा। अभिभावकों को भी संदेश है – अपने बच्चों को खेलों की ओर प्रेरित करें।
National कराटे चैंपियनशिप से जुड़े रोचक तथ्य
- 350+ खिलाड़ी, 9 राज्य।
- भारतीय सेना की पहली भागीदारी।
- चक्रधरपुर टीम का डेब्यू ही धमाकेदार।
National कराटे चैंपियनशिप में व्हाईट टाइगर गोजू रियु कराटे एसोसिएशन द्वारा 19 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान समारोह आयोजित होना एक मील का पत्थर है। यह दिखाता है कि मेहनत और समर्पण से कोई लक्ष्य असंभव नहीं। चक्रधरपुर जैसे छोटे स्थान से राष्ट्रीय स्तर पर चमकना प्रेरणा देता है। आइए, हम सभी इन युवा योद्धाओं को बधाई दें और खेलों को बढ़ावा दें। अधिक जानकारी के लिए संस्था से जुड़ें। जय हिंद!














