
जमशेदपुर: भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं महान शिक्षाविद् डॉ. Syama प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर सोमवार को आदित्यपुर स्थित स्वर्णरेखा गेस्ट हाउस में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। भाजपा आदित्यपुर मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्थानीय विधायक चम्पाई सोरेन, आदित्यपुर नगर निगम के महापौर संजय सरदार, भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन देशभक्ति, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।
श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर की गई। इसके पश्चात उपस्थित नेताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
भाजपा नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे ऐसे दूरदर्शी विचारक थे जिन्होंने स्वतंत्र भारत की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके विचार आज भी करोड़ों भारतीयों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनके बताए मार्ग पर चलने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प भी लिया।
आर्टिकल 370 हटाना डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार करना : चम्पाई सोरेन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष दर्जे और अनुच्छेद 370 के खिलाफ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐतिहासिक संघर्ष किया था।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का प्रसिद्ध नारा था— “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।” यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे का खुलकर विरोध किया और इसके खिलाफ जनआंदोलन खड़ा किया। उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार किया। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा और उसके बाद राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेश को उन्होंने डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
राष्ट्रवाद, त्याग और साहस के प्रतीक थे डॉ. मुखर्जी
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रवाद, त्याग, साहस और सिद्धांतों की राजनीति के प्रतीक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि देशहित के मुद्दों पर डॉ. मुखर्जी ने कभी राजनीतिक लाभ-हानि की चिंता नहीं की। वे हमेशा राष्ट्र के व्यापक हितों को प्राथमिकता देते थे। यही कारण है कि आज भी देश उन्हें एक महान राष्ट्रवादी नेता के रूप में याद करता है।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए और देश की एकता तथा अखंडता को मजबूत बनाने में अपना योगदान देना चाहिए।

बंगाल को भारत में बनाए रखने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
अपने संबोधन में चम्पाई सोरेन ने देश के विभाजन के समय डॉ. मुखर्जी द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में जब भारत का विभाजन हो रहा था, तब मुस्लिम लीग पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करना चाहती थी। उस समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसका जोरदार विरोध किया और बंगाल के हिंदू बहुल क्षेत्रों को भारत में बनाए रखने के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए बंगाल विभाजन की मांग की थी। उनके प्रयासों और दृढ़ संकल्प के कारण बंगाल के दो हिस्से हुए और पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि यदि उस समय डॉ. मुखर्जी ने साहसिक नेतृत्व नहीं दिखाया होता, तो देश का राजनीतिक और भौगोलिक स्वरूप आज अलग हो सकता था।
राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की सीख देते हैं डॉ. मुखर्जी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा में राष्ट्र को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को हमेशा यह सीख दी जाती है कि सबसे ऊपर राष्ट्र का हित, उसके बाद पार्टी का हित, फिर परिवार और सबसे अंत में स्वयं के बारे में सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह सोच और सिद्धांत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन दर्शन से ही प्रेरित है। उन्होंने अपने जीवन में कभी व्यक्तिगत हितों को महत्व नहीं दिया और हमेशा राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि उनके आदर्श और विचार आने वाली पीढ़ियों को युगों-युगों तक देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देते रहेंगे।
भाजपा नेताओं ने भी रखे अपने विचार
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य नेताओं ने भी डॉ. मुखर्जी के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि वे एक महान शिक्षाविद्, कुशल प्रशासक और दूरदर्शी राजनेता थे।
नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता के बाद के दौर में थे। राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी उनके बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और गणमान्य लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें पूर्व उप-महापौर बॉबी सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष उदय सिंहदेव, पार्षद शांतनु घोष, मंडल अध्यक्ष गणेश कालिंदी, पूर्व मंडल अध्यक्ष देवेश महापात्र, रंजीत प्रधान, देवराज चाकी, गुरजीत सिंह, पवन महतो, बुबई शर्मा, अमन कुमार, भंबल दास सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित थे।
सभी उपस्थित लोगों ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
आदित्यपुर में आयोजित डॉ. Syama प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस कार्यक्रम ने उनके राष्ट्रवादी विचारों और देश के प्रति उनके योगदान को एक बार फिर स्मरण करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके जीवन संघर्ष, राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका तथा राष्ट्रीय एकता के लिए किए गए प्रयासों को याद किया।
पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने अनुच्छेद 370 हटाने को डॉ. मुखर्जी के सपनों की पूर्ति बताते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति और राष्ट्रसेवा का अद्वितीय उदाहरण है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रहित और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण के संकल्प के साथ हुआ।






































