
जमशेदपुर/आदित्यपुर। पूर्वी भारत का सबसे बड़ा और कभी सबसे सक्रिय माना जाने वाला आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र आज गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इस मुद्दे पर झारखंड इंटक के अध्यक्ष एवं केंद्रीय इंटक के वरिष्ठ सचिव राकेश्वर पांडे ने चिंता जताते हुए क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर सामने रखी है।

उद्योगों की गिरती हालत
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र राज्य की GDP में बड़ा योगदान करता है। यहाँ करीब 1,800 पंजीकृत इकाइयाँ हैं, जिनमें से 800 इकाइयाँ बंद हो चुकी हैं और शेष लगभग 1,000 इकाइयाँ (50 बड़ी कंपनियाँ एवं 950 लघु इकाइयाँ) किसी तरह कार्यरत हैं। इन इकाइयों में कुल 57,000 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं।
बुनियादी समस्याएँ
राकेश्वर पांडे ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र की हालत बेहद चिंताजनक है:
1️⃣ सड़कें जर्जर हैं और चौड़ाई अपर्याप्त है। बड़े वाहनों और कर्मचारियों को रोज़ाना परेशानी होती है।
2️⃣ सड़क पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं है, जिससे रात में असुरक्षा बनी रहती है।
3️⃣ चोरी और अपराध की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
4️⃣ सबसे गंभीर चिंता महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर है।
उन्होंने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पूर्व सड़क की बदहाली के कारण ही एक महिला की जान जा चुकी है।
निवेश और विकास पर असर
इन समस्याओं के कारण न केवल मौजूदा उद्योग प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि भविष्य में नए निवेश पर भी संकट मंडरा रहा है। क्षेत्र की इस स्थिति से राज्य के औद्योगिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
मीडिया और प्रशासन से अपील
राकेश्वर पांडे ने मीडिया बंधुओं से अनुरोध किया है कि इन समस्याओं को समाज और सरकार तक पहुँचाएँ। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन शीघ्र कार्यवाही करेगा ताकि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र फिर से अपनी पुरानी पहचान और सक्रियता हासिल कर सके।











































