
जमशेदपुर। र्मिजाडीह फुटबॉल मैदान में रविवार को आयोजित र्मिजाडीह बांध विस्थापित एवं रैयतों की संयुक्त बैठक में गहरी नाराजगी देखने को मिली। बैठक में 4 अगस्त 2025 को र्मिजाडीह रैयत के निर्माणाधीन मकान को बिना किसी सरकारी नोटिस या आदेश के तोड़े जाने की घटना की कड़ी निंदा की गई। लोगों ने इसे अन्यायपूर्ण और मनमानी कार्रवाई करार देते हुए तीव्र विरोध दर्ज किया।

23 सितम्बर को उपायुक्त कार्यालय पर विशाल धरना
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस घटना के विरोध और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आगामी 23 सितम्बर 2025 को उपायुक्त कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा, जिसमें हजारों लोग शामिल होंगे।
20 हजार लोगों के जुटने का अनुमान
नेताओं ने कहा कि आंदोलन में टाटा स्टील कंपनी से विस्थापित लोग और झारखंड राज्य के विभिन्न विस्थापन आंदोलनों से जुड़े नेता आमंत्रित किए जाएंगे। अनुमान है कि र्मिजाडीह बांध विस्थापित एवं रैयत समुदाय से जुड़े प्रत्येक पंचायत और गांव से लगभग 20,000 आदिवासी-मूलवासी लोग जुलूस में शामिल होंगे।
नेताओं का बयान
बैठक में मौजूद नेताओं ने स्पष्ट कहा –
- “विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन और तेज किया जाएगा।”
- “सरकार और प्रशासन को अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
- “यदि न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।”
र्मिजाडीह की यह बैठक न केवल विस्थापितों के गुस्से को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि आने वाले समय में यह आंदोलन पूरे जिले में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकता है।










































