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Handloom उद्योग को नई उड़ान देने की जरूरत बुनकरों की आय बढ़ाना प्राथमिकता राज्यपाल

On: August 7, 2026 4:54 PM
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जमशेदपुर: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि आज जरूरत केवल Handloom उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि बुनकरों की आय में वृद्धि करने की भी है। बुनकरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए नए डिजाइन, ई-कॉमर्स, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, कौशल उन्नयन और युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना जरूरी है। यदि नई पीढ़ी हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़ेगी तो इस पारंपरिक उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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राज्यपाल शुक्रवार को जमशेदपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन की ओर से आयोजित 13वें हस्तकरघा दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और उद्योग जगत को भी आगे आकर बुनकरों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा।

Handloom भारत की संस्कृति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भारत में हस्तकरघा केवल कपड़ा बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है।

उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बुनकर पीढ़ियों से अपनी कला और कौशल को आगे बढ़ाते आए हैं। उनके हाथों से तैयार होने वाले उत्पादों में केवल कपड़ा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाई देती है।

राज्यपाल ने कहा कि हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों की मेहनत और कला को उचित सम्मान तथा बाजार उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

चरखा और खादी ने जगाई थी आत्मनिर्भरता की भावना

राज्यपाल ने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि दो दिन बाद देश अगस्त क्रांति दिवस मनाएगा। 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया गया था। उस दौर में चरखा, खादी और हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण के साधन नहीं थे, बल्कि वे आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के मजबूत प्रतीक बन गए थे।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी और स्वदेशी को जनआंदोलन का स्वरूप देकर देशवासियों में आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा की। आज भी उसी भावना को आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ने की आवश्यकता है।

झारखंड के तसर रेशम की विशेष पहचान

राज्यपाल ने झारखंड में मौजूद हस्तशिल्प और हस्तकरघा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में हस्तशिल्प एवं हस्तकरघा की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने विशेष रूप से झारखंड के तसर रेशम का उल्लेख किया और कहा कि अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण तसर रेशम की देशभर में अलग पहचान है। झारखंड के बुनकरों की कला और हुनर भी शानदार है।

उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता इस बात की है कि बुनकरों के पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन और बेहतर मार्केटिंग माध्यमों से जोड़ा जाए। इससे झारखंड के हस्तकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।

ई-कॉमर्स से बुनकरों को मिलेगा बड़ा बाजार

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में बाजार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऑनलाइन खरीदारी और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव का लाभ बुनकरों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

यदि बुनकरों के उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाए तो वे सीधे देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है और बुनकरों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकता है।

उन्होंने नए डिजाइन तैयार करने, उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने और आधुनिक बाजार की मांग को समझने पर भी जोर दिया।

युवाओं और महिलाओं की भागीदारी जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि हस्तकरघा उद्योग को नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्र के युवा यदि इस क्षेत्र से जुड़ते हैं तो उन्हें अपने गांव और आसपास ही रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से भी हस्तकरघा और इससे जुड़े कार्यों में आगे आने की अपील की। इससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ परिवार की आय बढ़ाने में भी योगदान दे सकती हैं।

बुनकरों की समस्याओं को नजदीक से देखा है राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने बुनकरों की समस्याओं को नजदीक से देखा, जाना और समझा है। उन्होंने बताया कि जब वे भारत सरकार में कपड़ा मंत्री थे, उस समय राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस मनाने की पहल शुरू हुई थी।

इसका उद्देश्य देश के बुनकरों के श्रम, कौशल और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना तथा हस्तकरघा क्षेत्र को नई पहचान दिलाना था।

उन्होंने कहा कि बुनकर केवल वस्त्र नहीं बुनता, बल्कि वह अपने परिवार के सपनों, भारतीय सभ्यता, संस्कृति और देश के सम्मान को भी सहेजने का काम करता है।

बुनकरों को बेहतर बाजार और सम्मान दिलाना सामूहिक जिम्मेदारी

राज्यपाल ने कहा कि बुनकरों की आजीविका को मजबूत करना, उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, उचित सम्मान और सुरक्षा देना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि यदि बुनकरों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा तो इस पारंपरिक उद्योग से जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। इसके लिए उत्पादन से लेकर बिक्री तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प आर्थिक विकास की बड़ी ताकत बन सकते हैं।

स्थानीय उत्पादों को अपनाने की अपील

राज्यपाल ने आम लोगों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि लोग अपने दैनिक जीवन में हस्तकरघा से बने कपड़ों और अन्य उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ाएंगे तो इससे सीधे तौर पर बुनकरों को लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना केवल खरीदारी नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों और बुनकरों की मेहनत का सम्मान भी है।

बुनकरों के हुनर को उचित अवसर मिले अनिल ठाकुर

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अनिल ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में बुनकरों के हुनर को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बुनकरों को अपने कौशल का प्रदर्शन करने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए उचित अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि बुनकरों को सही प्रशिक्षण, बाजार और सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो हस्तकरघा क्षेत्र में रोजगार की बड़ी संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

Handloom उद्योग आज भी उपेक्षित मनोज सिंह

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ने कहा कि बुनकर बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन कई बार उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि आज भी देश में हस्तकरघा उद्योग अपेक्षित स्तर पर विकसित नहीं हो पाया है और यह क्षेत्र कई मायनों में उपेक्षित है। उन्होंने Handloom उद्योग में नई तकनीक लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मनोज सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन की गुणवत्ता और क्षमता दोनों को बेहतर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार और संबंधित संस्थाओं को बुनकरों को तकनीकी सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल और मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया।

कार्यक्रम का स्वागत भाषण श्रम मंत्रालय के पूर्व बोर्ड सदस्य आनंद साहू ने दिया। मंच संचालन वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के संस्थापक अध्यक्ष विजय भारती ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी आशुतोष राय ने किया।

पांच लोगों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने Handloom एवं संबंधित क्षेत्र में योगदान के लिए बलराम पात्रो, मंगल पात्रो, अमित मोदक, अनीता मैत्रे और बिलाय तांती को सम्मानित किया।

राज्यपाल ने कहा कि ऐसे सम्मान बुनकरों और कारीगरों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी इस पारंपरिक क्षेत्र से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

परंपरा को आधुनिक बाजार से जोड़ने की जरूरत

Handloom दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की पारंपरिक बुनकरी को बचाने के साथ उसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

नए डिजाइन, बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक, ऑनलाइन मार्केटिंग, कौशल विकास और युवाओं की भागीदारी के जरिए इस क्षेत्र को नई दिशा दी जा सकती है। राज्यपाल का संदेश भी इसी दिशा में रहा कि हस्तकरघा की परंपरा तभी मजबूत होगी, जब बुनकर आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।

इसलिए अब लक्ष्य केवल अधिक उत्पादन करना नहीं, बल्कि बुनकरों की आय बढ़ाना, उन्हें उचित बाजार और सम्मान दिलाना तथा हस्तकरघा को आत्मनिर्भर भारत की आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करना होना चाहिए।

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